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मिलिए अफगानिस्‍तान एयर फोर्स की पायलट कैप्‍टन निलोफर से

काबुल। इस वर्ष 18 जून को भारत को पहली महिला फाइटर पायलट मिलेगी और इसके साथ ही इंडियन एयरफोर्स के साथ भी एक एतिहासिक अध्‍याय जुड़ जाएगा।

भारत से अलग अगर हम आपको बताएं कि तालिबान के प्रभाव वाले अफगानिस्‍तान में वर्ष 2012 में कुछ ऐसा हुआ था जिसकी वजह से यह देश भारत और इंडियन एयरफोर्स से एक कदम आगे निकल गया था।

अफगान एयरफोर्स को वर्ष 2013 में निलोफर रहमानी नामक पहली महिला पायलट मिली थी। यह बात और है कि निलोफर फाइटर नहीं बल्कि फिक्‍स्‍ड विंग पायलट हैं लेकिन वह एक ऐसे देश से आती हैं जहां पर लड़कियों की शिक्षा तो दूर उन्‍हें खुलेआम किसी पुरुष से बात करने की भी इजाजत नहीं है।

इसलिए हमने ऊपर लिखा है कि निलोफर की वजह से अफगानिस्‍तान ने भारत को एक कदम पीछे कर दिया था। निलोफर फाइटर पायलट नहीं हैं लेकिन तालिबान के खतरे के बावजूद उन्‍होंने उस सपने को पूरा किया जो कभी-कभी ही पूरा हो पाताहै।

तालिबान ने उनके सपने के रास्‍ते में कई रुकावटें डालीं लेकिन इसके बाद भी उन्‍होंने अपने हौसले और जज्‍बे को कमजोर नहीं होने दिया।

आइए आज आपको बताते हैं कि कौन हैं निलोफर हैं और कैसे उन्‍होंने अपने इस सपने को पूरा किया।

कौन हैं निलोफर

कौन हैं निलोफर

23 वर्ष की निलोफर अफगानिस्‍तान एयरफोर्स के इतिहास में पहली महिला फिक्‍स्‍ड विंग पायलट हैं।

तालिबान से भी नहीं डरीं निलोफर

तालिबान से भी नहीं डरीं निलोफर

वर्ष 2012 में जब निलोफर अफगान एयरफोर्स एकेडमी से सेंकेड लेफ्टिनेंट बनकर निकलीं तो उन्‍हें और उनके परिवार को तालिबान की ओर से जान से मारने की धमकियां मिलीं। लेकिन उनके परिवार और निलोफर ने साहस नहीं छोड़ और आज भी निलोफर अपनी ड्यूटी को पूरा कर रही हैं।

बचपन से था पायलट बनने का सपना

बचपन से था पायलट बनने का सपना

वर्ष 1992 में जन्‍मी निलोफर बचपन से ही पायलट बनने का सपना देखती थीं। सोवियत दौर में उन्‍होंने अपने पिता, जो खुद भी अफगान एयरफोर्स का हिस्‍सा रह चुके हैं, के साथ दो महिला पायलट्स को देखा जो कि हेलीकॉप्‍टर फ्लाइ करती थीं और तब से ही उनके मन में भी पायलट बनने का सपना पनपने लगा।

एक वर्ष तक सीखी अंग्रेजी

एक वर्ष तक सीखी अंग्रेजी

निलोफर ने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए जी-जान लगा दिया और करीब एक वर्ष तक अंग्रेजी की पढ़ाई की। निलोफर किसी भी कीमत पर फ्लाइट स्‍कूल में एडमिशन का मौका नहीं गंवाना चाहती थीं।

कैसे मिला एडमिशन

कैसे मिला एडमिशन

जब निलोफर 18 वर्ष की थी तो अफगान एयरफोर्स ने महिलाओं की भर्ती के लिए प्रोग्राम शुरू किया। वर्ष 2011 में निलोफर ने अपने परिवार की मदद से इस प्रोग्राम को ज्‍वॉइन कर लिया।

क्‍या कहा था निलोफर ने

क्‍या कहा था निलोफर ने

जिस समय निलोफर ट्रेनिंग कर रही थी उन्‍होंने वॉल स्‍ट्रीट जनरल को दिए अपने इंटरव्‍यू में कहा था कि अफगानिस्‍तान में महिलाओं को यह अधिकार होना चाहिए। साथ ही उन्‍होंने बाकी महिलाओं से भी इस तरह से आगे आने की अपील की थी।

सी-130 को फ्लाइ करने का सपना

सी-130 को फ्लाइ करने का सपना

निलोफर आज C-208 जो कि एक मिलिट्री ट्रांसपोर्टेशन एयरक्राफ्ट है उसके साथ उड़ान भरी थी। अब निलोफर का सपना है कि वह सी-130 को फ्लाइ करें।

सारे बंधन तोड़ने वाली निलोफर

सारे बंधन तोड़ने वाली निलोफर

महिलाओं को इस बात के लिए प्रतिबंधित किया गया है कि वे घायल या फिर मृत सैनिकों को ट्रांसपोर्ट करें लेकिन जब कभी भी निलोफर को आदेश मिला उन्‍होंने उसे हमेशा पूरा किया और कभी कोई हिचक नहीं दिखाई।

अमेरिका ने किया है सम्‍मानित

अमेरिका ने किया है सम्‍मानित

जिस तरह से निलोफर ने बिना डरे हुए अपनी ट्रेनिंग पूरी की उसके बाद अमेरिका ने भी उनका लोहा माना। वर्ष 2015 में निलोफर को अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से इंटरनेशनल वीमेल ऑफ करेज का पुरस्‍कार दिया गया था।

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