शेरी सिंह के इस्तीफे के बाद मॉरीशस में बवाल, चीन को लीक की थी भारत की जानकारी, FBI भी परेशान
मॉरीशस टेलीकॉम के पूर्व सीईओ शेरी सिंह के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद अब उनके चीन के साथ संबंधों की जानकारी सामने आई है।
पोर्ट लुईस, 01 अगस्तः मॉरीशस टेलीकॉम के पूर्व सीईओ शेरी सिंह के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद अब उनके चीन के साथ संबंधों की जानकारी सामने आई है। ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि चीनी टेक कंपनी हुआवेई और मॉरीशस टेलीकॉम के पूर्व सीईओ शेरी सिंह के बीच काफी नजदीकी संबंध रहे हैं। शेरी सिंह पर भारत की जासूसी करने के इल्जाम लगाए जा रहे हैं।

बीते महीने शेरी सिंह ने दिया इस्तीफा
बतातें चलें कि शेरी सिंह ने सात साल से अधिक समय तक कंपनी का नेतृत्व करने के बाद बीते महीने मॉरीशस की राष्ट्रीय दूरसंचार कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद से इस्तीफा दे दिया था। शेरी सिंह के इस्तीफे के बाद से मॉरीशस की राजनीति में भूचाल आ गया था। शेरी सिंह को प्रविंद जगन्नाथ का दाहिना हाथ और सरकार के अंदरूनी घेरे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। शेरी सिंह के इस्तीफे के बाद से ही उनके और हुआवेई के बीच रिश्ते की खबरें सामने आने लगीं। दरअसल इस्तीफा देने के कुछ समय बाद ही शेरी सिंह ने दो अलग-अलग इंटरव्यू में भारत को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए थे।

पीएम जगन्नाथ पर लगाया आरोप
शेरी सिंह ने अपने इंटरव्यू में कहा कि मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ के अनुरोध पर भारत की टीम ने उनके देश का दौरा किया। इस दौरान इस टीम ने पूरे देश का सर्वे किया था। मॉरीशस टेलीकॉम के कर्मचारियों को लिखे एक लेटर में शेरी सिंह ने कहा कि वह मूल्यों से समझौता करके सीईओ के रूप में काम करने में असमर्थ हैं। शेरी सिंह ने कहा कि पीएम जगन्नाथ ने उन्हें भारतीय टीम को 'स्नीफिंग डिवाइस' (जासूसी डिवाइस) स्थापित करने के उद्देश्य से एक फैसिलिटी तक पहुंचने की अनुमति देने के लिए मजबूर किया था।

आरोपों के बाद मॉरीशस में मचा बवाल
शेरी सिंह ने आरोप लगाया कि पीएम जुगनाथ ने उन्हें मजबूर किया, कि एक भारतीय टीम को बेइ-दु-जेकोटे में स्थित एक सेफ केबल लैंडिंग स्टेशन तक पहुंचने की अनुमति दे दें। यह द्वीप राष्ट्र का एक प्रतिबंधित क्षेत्र है। अब इस बात को लेकर पूरे मॉरीशस में बवाल मचा हुआ है कि प्रधानमंत्री ने जिस भारतीय टीम को वहां तक पहुंचने की अनुमति दी, वह कथित तौर पर वहां 'जासूसी' उपकरण लगाने गई थी ताकि मॉरीशस के इंटरनेट ट्रैफिक पर नजर रखी जा सके। शेरी सिंह के दावे ने भारत की भूमिका के बारे में अटकलों को हवा दी है। विपक्ष ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री पर देशद्रोह का आरोप लगाया है।

पीएम जगन्नाथ ने विपक्ष को लगाई फटकार
हालांकि मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने इन आरोपों पर विपक्षी दलों को फटकार लगाते हिए कहा कि उन्होंने इस सर्वेक्षण के लिए एक सक्षम टीम भेजने के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क किया था। पीएम जगन्नाथ कहा, 'मॉरीशस में हमारे पास इस सर्वे के लिए टेक्नीशियन उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए हमने टेक्नीशियंस की इस भारतीय टीम के साथ जाना पसंद किया।' इस मामले पर बयान देते हुए एक नियमित ब्रीफिंग में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि विवाद के बारे में पीएम जगन्नाथ का बयान भारत के दृष्टिकोण से काफी अच्छी तरह मेल खाता है।

शेरी सिंह ने की चीन की मदद
हालांकि यह मामला इतना भी साधारण नहीं दिख रहा है। दरअसल शेरी सिंह के समय में में हुआवेई को कॉन्ट्रैक्ट के आवंटन का मुद्दा कार्यकारी और चीनी सरकार के बीच 'अपवित्र' गठबंधन की ओर इशारा करता है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एमटी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने कॉन्ट्रैक्ट के आवंटन के दौरान कुछ प्रक्रियाओं के बारे में गंभीर आपत्ति व्यक्त की है। शेरी सिंह पर चीनी मेगा फर्म हुआवेई की मदद करने के लिए चयनात्मक बोली अभ्यास का दुरुपयोग करने का भी आरोप है। बतादें कि मॉरीशस में 3जी नेटवर्क काफी हद तक हुआवेई द्वारा विकसित किया गया है।

शेरी सिंह ने हुवाई को ऊंचाईयों पर पहुंचाया
मॉरीशस टेलीकॉम के मुख्य अधिकारी रहे शेरी सिंह के युग में हुआवेई को अनुबंधों के आवंटन के मुद्दे ने कार्यकारी और चीनी सरकार के अपवित्र गठबंधन का इशारा किया है। हुआवेई को 2006-07 में मॉरीशस में प्रवेश दिया गया था। इस अवधि के दौरान, हुआवेई को करोड़ों रुपये के कॉन्ट्रैक्ट दिए गए थे, लेकिन सिंह के कार्यकाल के दौरान इसकी कीमत अरबों रुपये तक पहुंच गई थी। पूर्व एमटी सीईओ पर हुआवेई को अपने व्यवसाय का विस्तार करने में मदद करने का आरोप है।

एफबीआई ने भी लगाए आरोप
इसके अलावा एफबीआई ने चीन पर हुआवेई के माध्यम से निगरानी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों के पास सेल टावरों के ऊपर चीनी निर्मित हुआवेई उपकर अमेरिकी सामरिक कमान द्वारा उपयोग किए जाने वाले अत्यधिक प्रतिबंधित रक्षा विभाग संचार को पकड़ सकते हैं और बाधित कर सकते हैं। हालांकि यह साबित करना मुश्किल है कि इन टावरों से बीजिंग तक डेटा भेजा गया था या नहीं। भले ही चीन ने अमेरिका के इन आरोपों का खंडन किया है लेकिन कई श्रोतों के मुताबिक हुआवेई उपकरण में सैन्य सेवा द्वारा उपयोग किए जाने वाले अत्यधिक प्रतिबंधित एयरवेव को बाधित करने की क्षमता है।
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