भारत के चार दिवसीय दौरे पर पहुंचे मालदीव के राष्ट्रपति, जानिए दिल्ली के दोस्त सोलिह का दौरा कितना अहम?
मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का प्रमुख पड़ोसी देश है और भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी' में एक विशेष स्थान रखता है।
नई दिल्ली, जुलाई 01: मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत करने और दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करने के लिए सोमवार को नई दिल्ली पहुंच गये हैं। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह, पीएम मोदी के निमंत्रण पर चार दिवसीय भारत दौरे पर आए हैं। इस दौरे पर उनके साथ एक उच्च स्तरीय अधिकारी और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है।

भारत दौरे पर मालदीव के राष्ट्रपति
मालदीव के राष्ट्रपति के भारत पहुंचने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक ट्वीट में लिखा कि, "एक करीबी दोस्त और समुद्री पड़ोसी का गर्मजोशी से भारत में स्वागत है। मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह आधिकारिक यात्रा के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। हमारे दोनों देशों के बीच अटूट दोस्ती को पोषित करने और बहुआयामी साझेदारी को और गति देने का ये अवसर होगा।" इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति सोलिह भारत के नये राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से मिलेंगे और प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसके साथ ही भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी राष्ट्रपति सोलिह की मुलाकात होगी। अपनी चार दिवसीय यात्रा के दौरान नई दिल्ली में आधिकारिक कार्यक्रमों के अलावा, राष्ट्रपति सोलिह दिल्ली में एक भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा करेंगे। इस यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति सोलिह मुंबई का भी दौरा करेंगे और व्यापारिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

भारत-मालदीव में करीबी संबंध
आपको बता दें कि, मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का प्रमुख पड़ोसी देश है और भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी' में एक विशेष स्थान रखता है। हाल के वर्षों में, साझेदारी ने सहयोग के सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास देखा है। पिछले सप्ताह एक प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रपति सोलिह ने अपनी बारत यात्रा को लेकर कहा था, कि उनकी भारत यात्रा दोनों नेताओं को इस व्यापक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करने और इसे और गति प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगी। भारत के लिए मालदीव हमेशा से एक करीबी और महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी रहा है। महामारी से संबंधित व्यवधानों के बावजूद दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंध मजबूत हुए हैं। भारत की "पड़ोसी पहले" नीति और मालदीव की "भारत पहले" नीति साझा चिंताओं से निपटने और आपसी हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करती है। इसी साल मार्च महीने में मालदीव के राष्ट्रपति सोलिह ने पिछले दो वर्षों में मालदीव को भारत ने कोविड संकट के दौरान जो मदद पहुंचाई है, उसपर प्रकाश डाला था। एक राष्ट्रीय संबोधन में सोलिह ने टीके देने सहित अपने देश को COVID-19 महामारी से निपटने में मदद करने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया था।

भारत के लिए काफी अहम मालदीव
भारत चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए हिंद महासागर में दो प्रमुख पड़ोसियों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है, लिहाजा जब इसी साल मार्च महीने में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मालदीव की यात्रा की थी, तो मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने के अलावा स्वास्थ्य और शिक्षा पर समझौतों पर हस्ताक्षर किए गये थे। द्विपक्षीय वार्ता के बाद जयशंकर ने कहा था कि, "मैं एक साल से अधिक समय के बाद मालदीव लौटा और बीच के समय में, कोविड के बावजूद, हमारे संबंधों में तेजी से प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के बीच हुई बातचीत के तहत, हमारे सहयोग ने वास्तव में महामारी के समय और पीड़ा को देखा और झेला है।" भारतीय विदेश मंत्री ने कहा था कि, 'हमने द्विपक्षीय साझेदारी पर व्यापक चर्चा की और विभिन्न क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं और पहलों का जायजा भी लिया।'

चीन को रोकने में मालदीव अहम
आपको बता दें कि, भारत और मालदीव के बीच का संबंध बहुत लंबे अर्से से काफी घनिष्ठ रहे हैं और हिंद महासागर में मालदीव भारत का रणनीतिक साझेदार भी है। भारत अपने पड़ोसी देशों को जो आर्थिक और अन्य प्रकार की दूसरी मदद करता है, उसका सबसे बड़ा लाभार्थी मालदीव ही रहा है। भारत ने मई 2020 में मालदीव को 580 टन खाद्य सामग्री की आपूर्ति की थी। हालांकि, मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के कार्यकाल में मालदीव-भारत के संबंधों में खटास जरूर आई थी और मालदीव चीन के पक्ष में झुकता नजर आया था, लेकिन मालदीव के वर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के कार्यकाल में फिर से भारत-मालदीव संबंध पटरी पर आ चुके हैं। दरअसल, मालदीव रणनीतिक तौर पर भारत के नजदीक और हिंद महासागर में समुद्री मार्ग पर स्थिति देश है। और चीन भी अपना नियंत्रण मालदीव पर करना चाहता है, ताकि वो हिंद महासागर में अपने कदम बढ़ा सके, लिहाजा मालदीव के साथ बेहतर संबंध बनाना ही भारत के पक्ष में है।












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