Maldives: मोहम्मद मुइज्जू का 'एंटी इंडिया' कैम्पेन हिट या फ्लॉप? मालदीव में आज हो रहे संसदीय चुनाव में फैसला
Maldives Parliamentary Polls: मालदीव में आज संसदीय चुनाव के लिए मतदान शुरू हो चुका है और सबसे कड़ा इम्तिहान 'इंडिया ऑउट' कैम्पेन चलाने वाले राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की होने वाली है, जिनकी पार्टी आंतरिक कलह से जूझ रही है।
इसके अलावा, पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू ने भारत के खिलाफ लगातार कैम्पेन चलाया है और चुनाव प्रचार के दौरान भारत के साथ मालदीव के बिगड़ते संबंध प्रमुख मुद्दा रहा है, लिहाजा उनकी 'एंटी-इंडिया' पॉलिसी की भी परीक्षा होने वाली है।

मालदीव में आज संसदीय चुनाव
हिंद महासागर की गोदी में बसा मालदीव पर्यटन के लिए प्रख्यात रहा है और सबसे ज्यादा भारतीय पर्यटक मालदीव जाते रहे हैं, लेकिन जनवरी में मालदीव के मंत्रियों की प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद दोनों देशों के बीच के संबंध काफी खराब हो गये और भारत में जोरशोर से 'बॉयकॉट मालदीव' अभियान चलाया गया, जिसका सीधा असर मालदीव की टूरिज्म और अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।
मालदीव की मौजूदगी रणनीतिक तौर पर भारत के लिए काफी अहम है, लेकिन मुइज्जू की एंटी-इंडिया पॉलिसी ने भारत को रणनीतिक तौर पर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। मुख्य विपक्षी मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) ने तो यहां तक आरोप लगाए हैं, कि मालदीव में चीन सैन्य बंदरगाह बनाने की तैयारी में है।
इसके अवाला, मालदीव में इंडिया ऑउट कैम्पेन के जनक और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन, जिन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में 11 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, उनकी सजा भी कोर्ट ने सस्पेंड कर दी है और उन्हें पिछले हफ्ते रिहा कर दिया गया है। मोहम्मद मुइज्जू, अब्दुल्ला यामीन के ही शागीर्द हैं। जेल जाने की वजह से अब्दुल्ला यामीन पिछला राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ पाए थे और उन्होंने माले के मेयर मोहम्मद मुइज्जू को अपना कैंडिडेट चुना था।
मुइज्जू के एंटी-इंडिया कैम्पेन का टेस्ट
मोहम्मद मुइज्जू ने इसी महीने चीनी राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों को देश में हाई-प्रोफाइल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट दिए हैं, क्योंकि संसदीय चुनावों के लिए प्रचार जोरों पर था। उन्होंने अपने समर्थकों को दिखाने की कोशिश की है, कि वो कितने बड़े भारत विरोधी नेता हैं।
इसके अलावा, मालदीव में मौजूद करीब आधे भारतीय सैनिक वापस लौट आए हैं, जबकि बाकी सैनिक भी भारत लौटने की प्रक्रिया में हैं। इस मुद्दे को भी मोहम्मद मुइज्जू ने काफी भुनाने की कोशिश की है और हर भाषण में भारतीय सैनिकों की पूर्ण वापसी का जिक्र किया है।
मालदीव की संसदीय व्यवस्था कैसी है?
मालदीव में मोहम्मद मुइज्जू से पहले इब्राहिम सोलिह थे, जो भारत समर्थक थे और उनकी भारत समर्थक मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) मौजूदा संसद में बहुमत में है। अगर MDP को संसद में बहुमत नहीं मिलता है, तो मोहम्मद मुइज्जू पूरी तरह से बेलगाम हो सकते हैं और फिर वो निरंकुश होकर एंटी-इंडिया फैसले ले सकते हैं।
जबकि, राष्ट्रपति मुइज्जू के एक वरिष्ठ सहयोगी ने नाम न छापने की शर्त पर सामाचार एजेंसी AFP को बताया है, "रविवार को होने वाले चुनाव के बैकग्राउंड में जियो-पॉलिटिकल मुद्दे शामिल हैं।"
उन्होंने कहा, कि "वह भारतीय सैनिकों को वापस भेजने के वादे पर सत्ता में आए और वह इस पर काम कर रहे हैं। उनके सत्ता में आने के बाद से संसद उनका सहयोग नहीं कर रही है।"
मुइज्जू के कार्यालय में आने के बाद से, सांसदों ने उनके तीन नॉमिनेट्स को कैबिनेट में शामिल करने से रोक दिया है और उनके कुछ खर्च प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया है।
वहीं, मुइज्जू के लिए सिरदर्द उनकी पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) में आंतरिक कलह है। इसके अलावा, तमाम पार्टियां एक दूसरे खिलाफ लड़ रही हैं, जिससे संसद में किसी एक पार्टी को बहुमत मिलने की संभावना काफी कम है।
मालदीव की संसद में कितनी सीटें हैं?
मालदीव में इस बार चौथे संसदीय चुनाव के लिए मतदान शुरू हो चुके हैं और इस बार के चुनाव में 8 राजनीतिक पार्टियां चुनावी मैदान में हैं। मालदीव में 93 संसदीय सीटें हैं और कुल 368 उम्मीदवार जनता के बीच हैं। देश के 2.8 लाख मतदाताओं को उनकी किस्मत का फैसला करना है।
देश में 602 मतदान केन्द्र बनाए गये हैं, वहीं तीन मतदान केन्द्र विदेशों में भी बनाए गये हैं, जो श्रीलंका के कोलंबो, भारत के त्रिवेन्द्रम और सिंगापुर के क्वालालंपुर में स्थित हैं।
मौजूदा संसद में भारत समर्थक मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 44 सीटे हैं और इसने मोहम्मद मुइज्जू को अभी तक संसद में कंट्रोल करके रखा हुआ है। लेकिन, अगर इसकी सीटों की संख्या में कमी आती है, तो भविष्य में मालदीव में चीन की घुसपैठ और पढ़ेगी और भारत विरोधी अभियान को और बल मिलेगा।












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