मालदीव: सेना के घेरे में संसद और सुप्रीम कोर्ट, लाखों लोग सड़कों पर

नई दिल्ली। मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक बंदियों को रिहा करने आदेश को मानने से इनकार करने के बाद बड़ी तादाद में सड़कों पर उतर गए हैं। मालदीप की राजधानी माले में लाखों की तादाद में लोग अब्दुल्ला यामीन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों के सड़कों पर उतर आने के बाद आर्मी को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वहीं चीफ जस्टिस अब्दुल्ला सईद ने राजनीतिक बंदियों की रिहाई का फैसला पलटने की सरकार की तरफ से दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस ने अपनी और साथी जजों की जान को खतरा बताया है और कहा है कि वो, जज अली हामिद और जूडिशल एडमिनिस्ट्रेटर हसन सईद कोर्ट के बाहर नहीं निकलेंगे और रातभर यहीं रहेंगे। कोर्ट आर्मी के सुरक्षा घेरे में है।

संसद भी सेना के घेरे में

संसद भी सेना के घेरे में

कोर्ट के साथ-साथ मालदीव की सेना ने रविवार को संसद परिसर को भी अपने घेरे में ले लिया है। देश के संसदीय सचिव जनरल अहमद मोहम्मद के रविवार की सुबह अपने पद से इस्तीफा देने के बाद विपक्षी सांसद संसदों ने परिसर में घुसने की कोशिश की जिसके बाद सेना ने संसद को घेर रखा है।

राष्ट्रपति को गिरफ्तार कराना चाहता है कोर्ट: मालदीव सरकार

राष्ट्रपति को गिरफ्तार कराना चाहता है कोर्ट: मालदीव सरकार

मालदीव की में गुरुवार से राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। गुरुवार को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत जेल में बंद दूसरे नेताओं को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था, जिसे मामने से देश की सरकार ने इंकार कर दिया। मालदीव की सरकार ने रविवार को कहा गया है कि कि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को गिरफ्तार कराना चाहती है।

गुरुवार को कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

गुरुवार को कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को आतंकवाद के सभी आरोपों से बाइज्जत बरी करते हुए सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद लंदन में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे नशीद और उनके समर्थकों की रिहाई की उम्मीद बढ़ी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद से ही मालदीप की राजनीति में तूफान आया हुआ है। कोर्ट के फैसला सुनाया नशीद के समर्थकों नारेबाजी करने लगे और राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन की तत्काल इस्तीफे की मांग करने लगे, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। रविवार को नशीद और दूसरे बंदियों का रिहाई से सरकार के इंकार के बाद लोग फिर सड़कों पर हैं।

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