लेबनान ने सऊदी अरब पर अपने पीएम को नजरबंद करने का लगाया आरोप, अल-हरीरी दो सप्ताह से नहीं लौटे हैं अपने मुल्क
बेरूत। लेबनान के प्रधानमंत्री साद अल-हरिरि ने 3 नवंबर को अपने सऊदी अरब की यात्रा के दौरान ही पद से इस्तीफा दे दिया था। प्रधानमंत्री हरीरी ने ईरान पर लेबनान में राजनितिक अस्थिरता फैलाने और अपनी हत्या की डर से सऊदी अरब में एक टीवी चैनल पर इस्तीफे की घोषणा कर सभी को चौंका दिया। इस बीच लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल एउन ने सऊदी अरब पर प्रधानमंत्री साद अल-हरीरी को हिरासत में लेने का आरोप लगाया है।

अपने इस्तीफे की घोषणा करने के बाद से ही साद अल-हरीरी करीब दो सप्ताह से सऊदी अरब में ही हैं। लेबनान के राष्ट्रपति ने ट्वीट कर कहा कि 12 दिन से साद अल-हरीरी का स्वदेश नहीं लौटना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सऊदी अरब ने वियना समझौते का उल्लंघन करते हुए अल-हरीरी को हिरासत में ले लिया है।
न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक, हरीरी के नजदीकी राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री को सऊदी अरब ने इस्तीफा देने का दबाव डाला था। हालांकि, हरीरी और सऊदी अरब ने इस आरोप का खंडन किया है। हरीरी ने कहा कि इस्तीफा देने के लिए उन पर किसी ने भी दबाव नहीं डाला है और वे जल्द ही लेबनान लौटकर आधिकारिक रूप से इस्तीफा देंगे।
लेबनान के प्रधानमंत्री ने इस्तीफे की घोषणा कर मिडिल ईस्ट को एक बार फिर तनाव की ओर धकेल दिया है। अपने इस्तीफे के दौरान हरीरी ने ईरान पर तीखा हमला बोलते हुए लेबनान में अराजकता, संघर्ष और हिंसा फैलाने का आरोप लगाया था। हरीरी ने साथ में यह भी कहा कि ईरान जिस तरह से लेबनान में पाप फैला रहा है, आने वाले वक्त में उन्हीं पर प्रतिघात होने वाला है।












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