पाकिस्तान, मिस्र के बाद एक और मुस्लिम देश हुआ पस्त, 95 फीसदी से अधिक गिरा करेंसी का मूल्य
पाकिस्तान और मिस्र के बाद अब एक और मुस्लिम बहुल देश पर कंगाली का खतरा मंडराने लगा है। कभी आर्थिक तौर पर संपन्न देश के रूप में पहचाने जाने वाले देश लेबनान में लोगों के लिए अब 2 वक्त की रोटी जुटा पाना मुश्किल हो गया है।

Image: PTI
4 सालों से आर्थिक संकट से जूझ रहा लेबनान की स्थिति अब और भी बदतर हो गई है। देश की मुद्रा पूरी तरह से बिखर गई है और उसका मूल्य कौड़ी के भाव हो चुका है। लेबनान की मुद्रा इतिहास में पहली बार 100,000 LBP प्रति अमेरिकी डॉलर तक गिर गई है। इसकी वजह देश में बैंक हड़ताल पर चले गए हैं। इसके साथ ही लेबनान में लंबे समय से वित्तीय संकट और राजनीतिक गतिरोध का जारी रहना भी बताया जा रहा है।
मंदी के बाद बिगड़े हालात
मुद्रा संकट की वजह से लेबनान में खाने-पीने और रोजमर्रे के सामान और ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। लेबनान के राजनीतिक और वित्तीय अभिजात वर्ग द्वारा बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के बाद 2019 में लेबनान की वित्तीय मंदी आ गई थी। इसके बाद से लेबनानी पाउंड लगातार गोते खा रहा है। इस संकट से पहले 2019 में एक डॉलर के मुकाबले लेबनानी मुद्रा का मूल्य 1500 के करीब था। जनवरी में लेबनानी मुद्रा का मूल्य डॉलर के मुकाबले 60,000 के करीब चल रहा था। 14 मार्च को यह एक लाख को छू चुका है।
लंबे वक्त से देश में नहीं है राष्ट्रपति
संकट की गंभीरता के बावजूद, राजनीतिक अभिजात वर्ग, जिसे व्यापक रूप से देश के वित्तीय पतन के लिए दोषी माना जाता है, मुद्रा की लगातार गिरावट को रोकने में विफल रहा है। संसद में प्रतिद्वंद्वी गठजोड़ के बीच लगातार गतिरोध के बीच पिछले साल से देश में कोई राष्ट्रपति नहीं है और केवल एक कार्यवाहक सरकार है। इसकी वजह से लेबनान की 60 लाख में से 80 फीसदी आबादी अब गरीबी में जी रही है और भूखे पेट सड़क पर धूल फांकने को मजबूर है। महंगाई इस कदर बढ़ चुकी है कि लोग अपने लिए खाना तक मुश्किल से खरीद पा रहे हैं। साथ ही तेल, बिजली और दवा की आपूर्ति भी सीमित हो चुकी है।
विश्व शक्तियों ने मदद से किया इनकार
विश्व बैंक से लेकर बाकी अन्य देश लेबनान को मदद करने से साफ इनकार कर चुके हैं। उनका कहना है कि जब तक लेबनान में कोई नई सरकार नहीं बन जाती, जो सुधारों को लागू कर सके और भ्रष्टाचार से निपट सके तब तक हम कोई भी मदद नहीं कर सकते। विश्व बैंक ने लेबनान की मौजूदा स्थिति के लिए लेबनान के राजनेताओं को जिम्मेदार ठहरा चुका है। आपको बता दें कि लेबनान में धार्मिक सत्ता-साझेदारी प्रणाली के तहत, प्रधानमंत्री का पद एक सुन्नी, राष्ट्रपति का पद एक ईसाई और संसद अध्यक्ष एक शिया के लिए आरक्षित है। हालांकि अलग-अलग दलों के बीच गतिरोध की वजह से लंबे वक्त से देश में राष्ट्रपति तक नहीं चुना जा सका है।












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