LCA Tejas: PM मोदी ने पूरा किया इंदिरा गांधी का सपना... एलसीए तेजस MK1A इसी महीने आसमान में भरेगा उड़ान
LCA Tejas MK1A: हल्के लड़ाकू विमान (LCA) का नया वेरिएंट 'तेजस' MK1A वेरिएंट की उड़ान भरने का सपना आखिरकार इस महीने साकार होने जा रहा है और इस महीने के अंत तक LCA Tejas MK1A फाइटर जेट आसमान में उड़ान भरेगा। एयरोस्पेस निर्माता LCA Tejas MK1A को भारतीय वायु सेना (IAF) को सौंपने जा रही है।
LCA Tejas MK1A, भारतीय एयरोस्पेस निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का बेशकीमती उत्पादन रहा है। ये वो फाइटर जेट है, जिसके डेवलपमेंट में काफी समय लगा है, उसने भारतीय फाइटर जेट को डिजाइन करने, विकसित करने और तैनात करने की देश की महत्वाकांक्षा को बढ़ावा दिया है।

एलसीए तेजस के निर्माण ने, भारत को उन देशों के विशिष्ट समूह में शामिल कर दिया है, जिन्होंने इलेक्ट्रॉनिक फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल सिस्टम, ऑनबोर्ड स्थिति जागरूकता डिस्प्ले और ओवर-द-क्षितिज स्ट्राइक क्षमताओं से लैस अपने चौथी पीढ़ी के लड़ाकू जेट विकसित करने की क्षमता का प्रदर्शन किया है।
अब, LCA Tejas MK1A के साथ, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड अपनी टेक्नोलॉजी परिपक्वता का प्रदर्शन करेगा।
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना की नंबर 3 स्क्वाड्रन जिसका नाम 'कोबरा' है, LCA Tejas MK1A को संचालित करने वाली पहली इकाई होगी, क्योंकि यह अपने मिग-21 बाइसन को रिटायर कर रही है।
एलसीए तेजस का सपना साकार
यूरेशियन टाइम्स ने भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी का नाम गुप्त रखते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि "फरवरी के अंत तक, एलसीए एमके1ए के उड़ान भरने की उम्मीद है, और इसे सीधे भारतीय वायुसेना को सौंप दिया जाएगा। भारतीय वायुसेना एचएएल बेंगलुरु में कुछ ट्रेनिंग कर सकती है।"
एलसीए तेजस MK1A वेरिएंट में, इसके पहले के वेरिएंट LCA Mk1 के मुकाबले 40 से ज्यादा सुधार किए गये हैं। मार्क1ए के नए वेरिएंट में हवा से हवा में ईंधन भरने, दृश्य-सीमा से परे या बीवीआर क्षमताओं और दुश्मन के राडार को जाम करने की क्षमता जैसे सुधार किए गये हैं।
IAF ने 2021 में 83 LCA Mk1A विमानों के लिए ऑर्डर दिया था, और सरकार ने 97 LCA MK 1A के अतिरिक्त ऑर्डर के लिए भी रास्ता साफ कर दिया है। विमान का पहला वेरिएंट 2016 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था।
वर्तमान में, IAF के दो स्क्वाड्रन, 45 स्क्वाड्रन और 18 स्क्वाड्रन, LCA तेजस के साथ पूरी तरह से ऑपरेशनल हैं। आने वाले वर्षों में, तेजस भारतीय वायुसेना द्वारा संचालित किया जाने वाला लड़ाकू विमानों का सबसे बड़ा बेड़ा होगा।

भारत की तेजस उत्पादन क्षमता क्या है?
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड वर्तमान में हर साल 8 एलसीए तेजस विमान बना सकता है। इसे 2025 तक हर साल 16 विमान और अगले तीन वर्षों में हर साल 24 विमान तक उत्पादन करने की क्षमता कर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
एलसीए एमके 1ए की डिलीवरी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अगले चार वर्षों में होने की संभावना है। लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी को पूरा करने के लिए भारतीय वायुसेना काफी हद तक एलसीए तेजस पर निर्भर है।
एलसीए एमके 1ए चरणबद्ध तरीके से मिग-21, मिग-23 और मिग-27 लड़ाकू विमानों को भारतीय वायुसेना के बेड़े से रिप्लेस करेगा। इंडियन एयर फोर्स ने अपने मिग-29 को, उसके बाद मिराज और फिर जगुआर को भी आने वाले समय में रिटायर करने की योजना बनाई है। स्वदेशी एलसीए तेजस आने वाले दशक में भारतीय वायुसेना की ताकत का बड़ा हिस्सा बनेगा।
Mk1A तेजस लड़ाकू विमानों में से लगभग आधे में इजरायली एईएसए रडार शामिल किया गया है, जो ट्रेनर जेट पर लगे पल्स डॉपलर रडार से काफी ज्यादा एडवांस है। बाकी एलसीए Mk1A, जिसे 2026 के आसपास एयरफोर्स के बेड़े में शामिल किया जाएगा, उनमें स्वदेशी रूप से विकसित टॉप-ऑफ़-द-लाइन गैलियम नाइट्राइड उत्तम एईएसए रडार का इस्तेमाल किया जाएगा, जो गैलियम आर्सेनाइड रडार की तुलना में काफी ज्यादा शक्तिशाली है।
इन लड़ाकू विमानों को स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली एस्ट्रा मिसाइल से लैस किया जाना है। हवा से हवा में मार करने वाली एस्ट्रा मिसाइल, दुनिया की सबसे अत्याधुनिक मिसाइलों में से एक है। अगस्त 2023 में, एलसीए ने गोवा के तट से एस्ट्रा स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल को सफलतापूर्वक दागा था।
भारत सरकार ने इसके अलावा LCA Mk 2 के निर्माण के लिए भी मंजूरी दे दगी है और इसके लिए 1.1 अरब डॉलर का बजट दिया गया है, जिसमें अमेरिकी हथियार कंपनी GE का इंजन लगाया जाएगा, जिसका निर्माण भारत में किया जाएगा।

एलसीए तेजस का निर्माण से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के उस सपने को पूरा होना है, जिसे उन्होंने कई दशक पहले देखा था। 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में स्वदेशी फाइटर जेट विकसित करने का कार्यक्रम शुरू हुआ था। और पहले प्रोटोटाइप को अपनी पहली उड़ान भरने में 17 साल और लग गए। और भारतीय वायुसेना को लड़ाकू जेट को शामिल करने में 15 साल और लग गए।
तेजस की अब तक की सबसे बड़ी बाधा यह रही है, कि अभी तक इसे किसी युद्ध में टेस्ट नहीं किया गया है और इसने अभी तक किसी भी चुनौती का सामना नहीं किया है।
लेकिन यह सब बदल सकता है, अगर तेजस को पश्चिम या उत्तर की ओर भारत के अग्रिम हवाई अड्डों में से एक में स्थायी रूप से तैनात किया जाता है, और इसके लिए इसे भारत की दो अस्थिर सीमाओं पर आसमान में गश्त करने की आवश्यकता होगी।
भारतीय वायुसेना ने पहले से ही मौजूदा दो एलसीए स्क्वाड्रनों को पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं के साथ आगे के हवाई अड्डों पर भेजना शुरू कर दिया है, और हाल ही में तेजस विमानों को जम्मू और कश्मीर के अवंतीपुर में एक स्क्वाड्रन के साथ उड़ान भरते देखा गया है। लिहाजा, अब तेजस को आक्रामक क्षमता के साथ दुश्मनों से लोहा लेने के लिए तैनात किया जाएगा और इसके साथ ही, भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री अब उस चरण में प्रवेश कर रही है, जहां से भारत आने वाले सालों में भारत में ही तमाम हथियारों के निर्माण का सपना देख सकता है।












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