Khaleda Zia Net Worth: अपने पीछे कितनी संपत्ति छोड़ गईं बांग्लादेश की पूर्व PM खालिदा जिया, कैसे करती थीं कमाई
khaleda zia Net Worth: बांग्लादेश की राजनीति की सबसे ताकतवर और विवादास्पद चेहरों में शुमार रहीं पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार 30 दिसंबर को 80 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके जाने के साथ ही न सिर्फ एक युग का अंत हुआ, बल्कि यह सवाल भी चर्चा में आ गया कि दशकों तक सत्ता के केंद्र में रहीं खालिदा जिया अपने पीछे कितनी संपत्ति छोड़ गईं और उनकी कमाई के सोर्स क्या थे।
खालिदा जिया पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। ढाका के एवरकेयर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। सीने का संक्रमण, लिवर और किडनी की बीमारी, डायबिटीज, गठिया और आंखों की परेशानी ने उनकी सेहत को काफी कमजोर कर दिया था। इसी महीने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी और हरसंभव मदद की पेशकश की थी। निधन की पुष्टि उनके परिवार और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेताओं ने की।

▶️ बेटे की वापसी और मां की विदाई
खालिदा जिया के बड़े बेटे और BNP के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल बाद 25 दिसंबर को लंदन से ढाका लौटे थे। बेटे की वापसी के महज पांच दिन बाद खालिदा जिया का निधन हो गया। उनके छोटे बेटे अराफात रहमान का पहले ही 2015 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो चुका था।
▶️ khaleda zia Net Worth News: खालिदा जिया की कुल संपत्ति
Khaleda Zia financial details: खालिदा जिया की कुल संपत्ति को लेकर कोई सटीक सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ मिलियन डॉलर में आंकी जाती रही है।
2018 में दाखिल किए गए हलफनामे से उनकी संपत्ति और कमाई की एक झलक जरूर मिलती है। उस हलफनामे के मुताबिक खालिदा जिया की सालाना आय करीब 1.52 करोड़ बांग्लादेशी टका थी। भारतीय मुद्रा में देखें तो एक बांग्लादेशी टका लगभग 0.74 रुपये के बराबर है। इसमें से लगभग 67.31 लाख टका उन्हें घर, अपार्टमेंट और दुकानों के किराए से मिलते थे। बाकी करीब 85.09 लाख टका की कमाई शेयर, बचत प्रमाण पत्र और बैंक डिपॉजिट से होती थी।
हलफनामे के मुताबिक, खालिदा जिया के पास नकद के रूप में सिर्फ 50,300 टका थे। लेकिन बैंकों और वित्तीय संस्थानों में उनके करीब 4.77 करोड़ टका जमा थे। उनके पास मौजूद कारों की कीमत करीब 48.65 लाख टका, इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमत 5 लाख टका और फर्नीचर की कीमत करीब 2.60 लाख टका बताई गई थी।
Khaleda Zia income: अचल संपत्ति के तौर पर खालिदा जिया के पास गैर-खेती योग्य जमीन थी, जिसकी कीमत नाममात्र की बताई गई थी। वहीं, किराए के रूप में उन पर करीब 1.58 करोड़ टका की देनदारी भी थी।

▶️ राजनीति में कैसे आईं खालिदा जिया? (Khaleda Zia political career)
खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। उन्होंने 1991 से 1996 और फिर 2001 से 2006 तक देश की सत्ता संभाली। वे पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य शासक से नेता बने जियाउर रहमान की पत्नी थीं। राजनीति में उनका प्रवेश आसान नहीं था, लेकिन पति की हत्या के बाद उन्होंने जिस तरह सत्ता की लड़ाई लड़ी, वह उन्हें इतिहास में खास जगह देता है।
खालिदा जिया का जन्म 1945 में जलपाईगुड़ी में हुआ था। 1959 में उनकी शादी जियाउर रहमान से हुई, जो बाद में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने। 1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद BNP बिखरने लगी। पार्टी नेताओं ने खालिदा जिया से कमान संभालने की अपील की। शुरुआती हिचक के बाद 1984 में उन्होंने पार्टी की कमान संभाली और फिर 1991 में चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनीं।
▶️ शेख हसीना से अदावत और 'बैटल ऑफ बेगम्स'
बांग्लादेश की राजनीति दशकों तक खालिदा जिया और शेख हसीना के इर्द-गिर्द घूमती रही। कभी दोनों सैन्य शासन के खिलाफ साथ लड़ीं, लेकिन सत्ता की लड़ाई ने उन्हें कट्टर प्रतिद्वंद्वी बना दिया। मीडिया ने इसे 'बैटल ऑफ बेगम्स' नाम दिया। 1990 के बाद देश में सत्ता या तो खालिदा जिया के पास रही या फिर शेख हसीना के पास।

▶️ खालिदा जिया: जेल, सजा और रिहाई (Khaleda Zia corruption case)
खालिदा जिया का राजनीतिक जीवन विवादों से भी भरा रहा। 8 फरवरी 2018 को उन्हें जिया अनाथालय ट्रस्ट मामले में 5 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया। इस दौरान उन पर भारी जुर्माना भी लगा। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 6 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट के एक दिन बाद उन्हें रिहा किया गया। बेहतर इलाज के लिए वे लंदन गईं और मई में वापस लौटीं।
▶️ एक युग का अंत
खालिदा जिया का जाना बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े अध्याय के बंद होने जैसा है। सत्ता, संघर्ष, बीमारी, जेल और फिर वापसी, उनकी जिंदगी किसी राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं रही। संपत्ति के आंकड़े चाहे सीमित हों, लेकिन बांग्लादेश की राजनीति पर उनकी छाप हमेशा कायम रहेगी।












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