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UK Election: लेबर पार्टी की नसों से निकाला एंटी-इंडिया जहर, कीर स्टारमर के भारत के साथ कैसे होंगे संबंध?

UK General Election Result 2024: सुनक बाहर और स्टारमर अंदर। यूनाइटेड किंगडम के आम चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं और जैसा कि अनुमान लगाया गया था, सर कीर स्टारमर के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी ने कंजरवेटिव पार्टी के खिलाफ शानदार जीत हासिल कर ली है।

इसके साथ ही, यूनाइटेड किंगडम में सरकार में एक नाटकीय बदलाव देखने को मिला है, 14 साल में पहली बार लेबर पार्टी ने शानदार जीत हासिल की है और पांच साल पहले किसी ने भी यकीन नहीं किया था, कि लेबर पार्टी किसी चुनावी रेस में भी है।

UK General Election Result 2024

ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे स्टारमर ने उत्तरी लंदन की अपनी सीट से व्यक्तिगत जीत के बाद कहा, कि "आज रात, यहां और पूरे देश के लोगों ने अपनी बात रखी है। वे बदलाव के लिए तैयार हैं। बदलाव यहीं से शुरू होता है, क्योंकि यह आपका लोकतंत्र, आपका समुदाय और आपका भविष्य है। आपने वोट दिया है और अब हमारे लिए काम करने का समय आ गया है।"

यूनाइटेड किंगडम में लेबर पार्टी की जीत के साथ, नीतिगत बदलाव होने तय हैं। न सिर्फ घरेलू स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी। इसमें भारत के साथ ब्रिटेन के संबंध भी शामिल हैं। आइए इस पर करीब से नजर डालें, कि लेबर पार्टी की जीत का नई दिल्ली के लिए क्या मतलब है?

नई दिल्ली की पुरानी चिंताएं

ऋषि सुनक के जाने और ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सत्ता में वापसी से द्विपक्षीय संबंधों को लेकर भारत की कुछ पुरानी चिंताएं फिर से उभर सकती हैं। पिछले प्रमुख जेरेमी कॉर्बिन के कार्यकाल में लेबर पार्टी को व्यापक रूप से नई दिल्ली के प्रति विरोधी माना जाता था। उस वक्त एक्सपर्ट्स ने लेबर पार्टी को भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने के लिए कुख्यात तक कहा था।

सितंबर 2019 में, भारत ने जब जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को निरस्त किया था, तो लेबर पार्टी ने कश्मीर पर एक आपातकालीन प्रस्ताव पारित किया था। प्रस्ताव में कहा गया था, कि "कश्मीर में एक बड़ा मानवीय संकट चल रहा है" और "अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को इस क्षेत्र में प्रवेश करने और देखने" का आह्वान किया गया था।

इसमें आगे "नागरिकों के जबरन गायब होने", "मानवाधिकारों के उल्लंघन की व्यापक व्यापकता" और "मुख्यधारा के राजनेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरबंदी/कारावास" का भी उल्लेख किया गया था। प्रस्ताव में कहा गया था, कि "कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया जाना चाहिए।"

इस प्रस्ताव का ब्रिटिश भारतीय समुदाय में भारी विरोध हुआ, जिसके कारण बाद में कॉर्बिन को यह स्पष्ट करना पड़ा, कि वह कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच एक "द्विपक्षीय मामला" मानते हैं। और जब लेबर पार्टी 2019 के चुनावों में हार गई, तो कई लोगों ने उस हार का श्रेय कश्मीर प्रस्ताव को दिया था।

2020 में कीर स्टारमर लेबर पार्टी के प्रमुख बने और यहां से लेबर पार्टी का नजरिया भारत को लेकर बदल गया।

कीर स्टारमर ने बढ़ाए भारत से संबंध

कीर स्टारमर के नेतृत्व में पार्टी ने खुद को फिर से भारतीयों के बीच स्थापित किया है और लेबर पार्टी, कश्मीर सहित अपने भारत विरोधी पिछले रुख से अलग हट गई है। स्टारमर ने खुद घोषणा की है, कि लेबर पार्टी भारत और ब्रिटिश भारतीय समुदाय के साथ घनिष्ठ संबंध बनाना चाहेगी, जिनकी संख्या लगभग 18 लाख है और जो ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में छह प्रतिशत से ज्यादा का योगदान करते हैं।

हिंदू विरोधी, खालिस्तानी नफरत पर सख्त रुख

स्टारमर के नेतृत्व में लेबर पार्टी की जीत करे बाद अब हिंदू नफरत के मामलों पर पार्टी के पुराने रूख में बदलाव देखने को मिलेगा। पिछले शुक्रवार को किंग्सबरी में श्री स्वामीनारायण मंदिर का दौरा करते हुए, स्टारमर ने कहा था, कि "ब्रिटेन में हिंदूफोबिया के लिए बिल्कुल भी जगह नहीं है" और लेबर पार्टी, "भारत के साथ एक नई रणनीतिक साझेदारी बनाएगी।"

उन्होंने कहा था, कि "अगर हम अगले हफ्ते चुने जाते हैं, तो हम आपकी और जरूरतमंद दुनिया की सेवा करने के लिए सेवा की भावना से शासन करने का प्रयास करेंगे।"

उन्होंने आगे कहा था, कि "हिंदू मूल्यों से मजबूत होकर, आप न केवल हमारी अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर योगदान दे रहे हैं, बल्कि आप नवाचार और विशेषज्ञता ला रहे हैं जो हमें वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखता है।"

इसके अलावा, लेबर पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं के भीतर भारत विरोधी भावनाओं को खत्म करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले प्रशासन के साथ एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी बनाने की भी कसम खाई है। और यही वजह है, कि भारतीय समुदाय ने इस चुनाव में लेबर पार्टी को समर्थन दिया है।

लेबर पार्टी के वादे सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है। अप्रैल में, पार्टी ने अपने एक सिख काउंसलर परबिंदर कौर के खिलाफ जांच शुरू की थी, क्योंकि उन पर खालिस्तानी आतंकवादी समूहों और भारत में सार्वजनिक हस्तियों की हत्या करने वाले आतंकवादियों का समर्थन करने वाले पोस्ट शेयर करने का आरोप लगे थे। पिछले साल सितंबर में लेबर पार्टी ने भारतीय मूल की शेडो मंत्री प्रीत कौर गिल को भी खालिस्तानी चरमपंथियों के साथ कथित संबंध रखने के कारण पार्टी में स्थान छोटा कर दिया।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर क्या है लेबर पार्टी का रूख?

इन मुद्दों के अलावा, लेबर पार्टी ने कहा है, कि अगर वह चुनाव जीतती है तो वह भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) करने के लिए पूरी तरह से "तैयार" है। जून के अंत में, पार्टी के शेडो विदेश मंत्री डेविड लैमी ने अपनी महत्वाकांक्षाओं को व्यक्त करते हुए कहा था, कि FTA उनके "मित्र" विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ साझेदारी की "एक मंजिल" है, न कि छत"।

लैमी ने पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा FTA के लिए निर्धारित दिवाली 2022 की समय सीमा चूक जाने का जिक्र करते हुए कहा था, कि "कई दिवाली बिना व्यापार समझौते के गुजर गईं और बहुत से व्यवसाय प्रतीक्षा में रह गए।"

उन्होंने कहा, "वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और व्यापार मंत्री पीयूष गोयल को मेरा संदेश है, कि लेबर पार्टी आगे बढ़ने के लिए तैयार है। आइए आखिरकार अपना मुक्त व्यापार समझौता करें और आगे बढ़ें।"

उन्होंने कहा, कि अगर वे 4 जुलाई को सरकार में चुने जाते हैं तो जुलाई के अंत से पहले वे दिल्ली में होंगे।

लैमी ने कहा था, कि कंजरवेटिव पार्टी ने भारत के साथ ब्रिटेन के संबंधों पर "वादे ज्यादा किए और काम कम किए"।

उन्होंने यह भी वादा किया, कि अगर लेबर पार्टी सत्ता में आती है तो वे भारत के साथ संबंधों को फिर से स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा, कि "लेबर पार्टी के साथ, बोरिस जॉनसन द्वारा एशिया में रुडयार्ड किपलिंग की उस पुरानी कविता को सुनाने के दिन खत्म हो गए हैं। अगर मैं भारत में कोई कविता सुनाती हूं, तो वह टैगोर की होगी, क्योंकि भारत जैसी महाशक्ति के साथ, सहयोग और सीखने के क्षेत्र असीमित हैं।"

भारत और यूके ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वार्ता के 13 दौर पूरे कर लिए हैं, लेकिन भारत और यूके दोनों में चुनाव आ जाने की वजह से बातचीत रूक गई थी।

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ऋषि सुनक ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर जल्दबाजी इसलिए नहीं की, क्योंकि उनकी पहचान भारतीय थी और भारत के प्रति उनपर पूर्वाग्रह के आरोप लग सकते थे। उनकी पत्नी अभी भी भारतीय नागरिक हैं और उनका ससुराल (नारायण मूर्ति) का भारत में प्रतिष्ठित कारोबार है, इसलिए वो कोई भी ऐसा संदेश नहीं देना चाहते थे, कि भारत के साथ उनके कुछ भी संबंध निजी लगे।

लिहाजा अब यह देखना दिलचस्प होगा, कि आगे क्या होता है और क्या स्टारमर मौजूदा भारत-यूके संबंधों को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे या फिर पलटी मारेंगे।

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