भारत, चीन, रूस, यूक्रेन... भारतवंशी कमला हैरिस दुनिया को कैसे देखती हैं? वो कितनी भारतीय बची हैं?

Kamala Harris on India: समाचार एजेंसी AP के सर्वेक्षण के मुताबिक, अमेरिका की उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस ने डेमोक्रेटिक पार्टी का नामांकन जीतने के लिए जरूरत से ज्यादा डेलिगेट्स का समर्थन हासिल कर लिया है और इसके साथ ही करीब करीब तय हो गया है, कि बाइडेन के नामांकन वापस लेने के लिए कमला हैरिस की राष्ट्रपति की उम्मीदवारी होंगी।

लिहाजा, ये जानना जरूरी हो जाता है, कि आखिर कमला हैरिस की विदेश नीति क्या हो सकती है, अलग अलग देशों के बारे में उनका क्या सोचना है, खासकर उन देशों के बारे में क्या सोचना है, जिनसे भारत का किसी ना किसी तरह से जुड़ाव है या आमना सामना है।

Kamala Harris on India

गाजा को लेकर कमला हैरिस की सोच क्या है?

विश्लेषकों को उम्मीद है, कि अगर कमला हैरिस राष्ट्रपति चुनाव जीतती हैं, तो वे गाजा युद्ध के लिए बाइडेन की पॉलिसी को ही आगे बढ़ाएंगी। उन्होंने गाजा में फिलिस्तीनी नागरिकों के प्रति सहानुभूति जताते हुए बार-बार इजरायल की सुरक्षा और आत्मरक्षा के लिए समर्थन का वादा किया है।

हैरिस ने इजरायल के 'आत्मरक्षा के अधिकार' का बचाव किया है। दिसंबर 2023 में उन्होंने एक ब्रीफिंग के दौरान कहा था, कि "इजरायल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है। और हम (बाइडेन और हैरिस) उस मजबूत विश्वास में टिके रहेंगे" और "हम हमास के खतरे को खत्म करने के लिए इजरायल के वैध सैन्य उद्देश्यों का समर्थन करते हैं"।

इस सप्ताह, जब इजराइल के प्रधानमंत्री अमेरिका की यात्रा करने वाले हैं, तो माना जा रहा है, कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कमला हैरिस मुलाकात कर सकती हैं।

4 मार्च को, कमला हैरिस ने गाजा में तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया था और कहा था, कि इजराइल को एन्क्लेव में मानवीय सहायता के प्रवाह में सुधार करने की आवश्यकता है।

वहीं 14 अप्रैल को, कमला हैरिस ने इजरायल पर ईरान के हमलों के एक दिन बाद एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था, कि "इजरायल की सुरक्षा के लिए हमारा समर्थन अडिग है।"

रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या सोच है?

बाइडेन के रुख के मुताबिक ही, कमला हैरिस रूस के खिलाफ यूक्रेन के आत्मरक्षा प्रयासों का दृढ़ता से समर्थन करती हैं। हैरिस भी, बाइडेन की तरह, नाटो की प्रतिबद्ध समर्थक रही हैं। जून में, उन्होंने स्विट्जरलैंड में यूक्रेन में शांति पर शिखर सम्मेलन में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की थी।

शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उन्होंने कहा, कि "रूस की आक्रामकता न केवल यूक्रेन के लोगों के जीवन और स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर हमला है।" शिखर सम्मेलन में, हैरिस ने यह भी घोषणा की, कि यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय विकास के लिए अमेरिकी एजेंसी और अमेरिकी विदेश विभाग के माध्यम से 1.5 बिलियन डॉलर वितरित करेगा।

चीन को लेकर कमला हैरिस की सोच क्या है?

कमला हैरिस से उम्मीद की जा रही है, कि वे चीन पर बाइडेन की नीति को ही आगे ले जाएंगी और उनका फोकस भी एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना होगा। सितंबर में, उन्होंने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। शिखर सम्मेलन के दौरान, उन्होंने चीन पर विवादित दक्षिण चीन सागर में अपने क्षेत्रीय दावों को छोटे पड़ोसियों पर थोपने का आरोप लगाया था। बाइडेन ने हैरिस को इस क्षेत्र के प्रमुख सहयोगी जापान और दक्षिण कोरिया का दौरा करने का भी काम सौंपा था।

2020 में उपराष्ट्रपति पद की बहस के दौरान, उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के चीनी आयात पर टैरिफ की आलोचना की थी और उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी पर चीन के साथ व्यापार युद्ध हारने और उसने नतीजे में सैकड़ों हजारों नौकरियां खोने का आरोप लगाया था। हालांकि, बाइडेन प्रशासन ने भी चीन को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की ही नीतियों को ना सिर्फ आगे बढ़ाया, बल्कि उन्होंने चीन के साथ ट्रेड वॉर को और तेज कर दिया।

कमला हैरिस ने ताइवान का भी समर्थन किया है, और उम्मीद है कि अगर वह राष्ट्रपति बनती हैं, तो भी वे ऐसा ही करेंगी। सितंबर 2022 में, उन्होंने प्रतिज्ञा की थी, कि "हम अपनी दीर्घकालिक नीति के मुताबिक ताइवान की आत्मरक्षा का समर्थन करना जारी रखेंगे।"

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भारत को लेकर क्या सोच रखती हैं कमला हैरिस?

पिछले पांच सालों में भारत को लेकर कमला हैरिस के विचारों में काफी बदलाव आ गया है। उन्होंने उप-राष्ट्रपति बनने के बाद सार्वजनिक रूप से बार-बार अपनी मां की भारतीय विरासत का जिक्र किया है और बताया है, कि भारत उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है।

2019 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म किया था, तो कमला हैरिस ने इस कदम की निंदा करते हुए कहा था, कि "हमें कश्मीरियों को याद दिलाना होगा, कि वे दुनिया में अकेले नहीं हैं।" उस समय वह कैलिफोर्निया से सीनेटर थीं और 2020 के चुनाव के लिए संभावित डेमोक्रेटिक उम्मीदवार थीं। लेकिन, उप-राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने कश्मीर को लेकर भी बयान नहीं दिया है।

बाइडेन के सत्ता में आने के बाद कमला हैरिस के विचार भी भारत को लेकर पूरी तरह से बदल चुके हैं, भले ही वो मजबूरी में हों।

2021 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ एक सार्वजनिक बैठक की थी और कोविड-19 टीकों के उत्पादन में भारत की भूमिका की प्रशंसा की थी।

अमेरिका और भारत, चीन को लेकर समान चिंताएं साझा करते हैं, जिससे भारत, एशिया में अमेरिका का रणनीतिक साझेदार बन गया है। बाइडेन ने अपने कार्यकाल के दौरान पीएम मोदी के साथ कई रक्षा और प्रौद्योगिकी समझौते किए हैं।

2023 में, कमला हैरिस ने एक राजकीय लंच में पीएम मोदी की मेजबानी की थी, और उन्होंने पिछले साल जी-20 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए, "भारत को 21वीं सदी में एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने में मदद करने के लिए" भारतीय पीएम को धन्यवाद दिया था।

कमला हैरिस ने पहले भारत के खिलाफ कई बयान दिए थे, और माना जा रहा है, कि अगर वो राष्ट्रपति भी बनती है, तो उनकी भारत को लेकर नीति वही होगी, जो अभी बाइडेन प्रशासन की है। अगर कश्मीर को लेकर उन्हें भारत सरकार की नीति निजी तौर पर पसंद नहीं होगी, फिर भी वो इसपर टिप्पणी नहीं करेंगी, क्योंकि फिर उन्हें भारत पर अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक ही करना और कहना होगा। और पिछले चार साल में यही देखा गया है।

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