Explainer: कमला हैरिस ने नेतन्याहू को 'करीबी सहयोगी' मानने से किया इनकार, जानिए किस बात का है डर?

Kamala Harris has declined to consider Israeli Prime Minister Netanyahu a close ally. This decision reflects her cautious approach to US-Israel relations ahead of the upcoming elections, particularly in light of potentia

Kamala Harris on Israel: अमेरिका में पांच नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रपति उम्मीदवार कमला हैरिस ने हैरान करते हुए इजराइल को अमेरिका का 'करीबी सहयोगी' मानने से इनकार कह दिया है।

अमेरिकी उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस ने यह कहने से इनकार कर दिया है, कि क्या वह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अपना "करीबी सहयोगी" मानती हैं, क्योंकि बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान में युद्धविराम के जो बाइडेन प्रशासन के आह्वान को मानने से इनकार कर दिया। वहीं, अमेरिका ने ये भी माना है, कि उसे पता नहीं है, कि उसकी मनाही के बाद भी इजराइल, ईरान पर हमला करेगा या नहीं।

Harris refuses to call Netanyahu an ally

रविवार रात को सीबीएस न्यूज पर प्रसारित होने वाले "60 मिनट" के इंटरव्यू में हैरिस से पूछा गया, कि अमेरिका इजराइल को अरबों डॉलर की सैन्य सहायता कैसे दे सकता है, जबकि ऐसा मालूम होता है, कि उसका नेतन्याहू पर "कोई प्रभाव" नहीं है।

इस सवाल का अस्पष्ट उत्तर जवाब देने के बाद उन्होंने दावा किया, कि अमेरिका ने नेतन्याहू को गाजा और लेबनान में चल रहे युद्ध को खत्म करने के करीब पहुंचा दिया है, लेकिन कमला हैरिस से जब फिर से पूछा गया, कि क्या अमेरिका के पास "प्रधानमंत्री नेतन्याहू के रूप में कोई वास्तविक करीबी सहयोगी है?"

उन्होंने जवाब दिया, "मुझे लगता है, पूरे सम्मान के साथ, बेहतर सवाल यह है कि क्या हमारे पास अमेरिकी लोगों और इजराइली लोगों के बीच एक महत्वपूर्ण गठबंधन है। और उस सवाल का जवाब हां है।"

कमला हैरिस क्या इजराइल-हमास पर कनफ्यूज हैं?

जुलाई में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति जो बाइडेन की जगह लेने के बाद से, कमला हैरिस का इजराइल पर रुख, पार्टी के भीतर इजरायल समर्थक और फिलिस्तीन समर्थक दोनों गुटों की आलोचना का विषय रहा है।

जाहिर तौर पर दोनों पक्षों को शांत करने के प्रयास में, कमला हैरिस ने अगस्त में डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के लिए अपना समर्थन घोषित किया, लेकिन इसके फौरन बाद उन्होंने वादा किया, कि वह इजराइल को हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति जारी रखेगी।

वहीं, बेंजामिन नेतन्याहू, जिनके बारे में व्यापक रूप से माना जाता है, कि वे आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन करेंगे, उन्होंने पिछले अक्टूबर में हमास पर युद्ध की घोषणा करने के बाद से कई मौकों पर बाइडेन और हैरिस से बात की है और उनसे मुलाकात की है। इन बातचीत के बाद, बाइडेन और कमला हैरिस, दोनों ने दावा किया है कि इजराइली नेता युद्ध विराम की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन नेतन्याहू इजराइल लौट आए और उन्होंने अपने लोगों से युद्ध जारी रखने का वादा कर दिया।

अमेरिकी और अन्य पश्चिमी अधिकारियों ने पिछले महीने दावा किया, हाल ही में, नेतन्याहू ने अमेरिका और फ्रांस की तरफ से तैयार किए गए युद्ध विराम प्रस्ताव पर सहमति जताई, लेकिन आखिरी समय में पीछे हट गए। दूसरी तरफ, उन्होंने बेरूत में हिज्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की हत्या का आदेश दे दिया। दो दिन बाद, उन्होंने फिर से लेबनान में जमीनी सेना भेजकर तनाव कम करने के अमेरिकी आह्वान की अवहेलना की, और मंगलवार को उन्होंने इजराइल पर मिसाइल हमले के लिए ईरान से "बदला लेने" की कसम खाई, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने उनसे ऐसे किसी भी कदम से बचने का आग्रह किया था जिससे व्यापक क्षेत्रीय युद्ध शुरू हो सकता है।

Harris refuses to call Netanyahu an ally

इजराइल का खुला समर्थन करने से क्यों डरी कमला हैरिस?

नेतन्याहू को करीबी सहयोगी मानने से इनकार करने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं, कि क्या कमला हैरिस, मुस्लिम वोटर्स का समर्थन खोने से डर गई हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि गाजा में चल रही पिछले एक साल की लड़ाई ने अमेरिकी मुस्लिमों को बाइडेन प्रशासन के खिलाफ कर दिया है और कई बार मुस्लिम संगठनों ने इलेक्शन में जो बाइडेन का बहिष्कार करने की धमकी दी थी।

हालांकि, जो बाइडेन तो रेस से हट चुके हैं, लेकिन मुस्लिम वोटर्स का समर्थन खोना कमला हैरिस नहीं चाहती हैं और ये एक बड़ी वजह है, कि कमला हैरिस इस मुद्दे पर काफी संभलकर और सोच-विचारकर बोल रही हैं।

पिछले साल दिसंबर में अमेरिका में मुस्लिम नेताओं 'बाइडेन को बहिष्कार' करने का फैसला #AbandonBiden हैशटैग के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर ट्रेंड करता रहा और ये अभियान उस वक्त शुरू हुआ, जब मिनेसोटा के मुस्लिम अमेरिकियों ने बाइडेन से 31 अक्टूबर तक युद्धविराम का आह्वान करने की मांग की थी, लेकिन जब ऐसा नहीं हो पाया, तो धीरे धीरे ये अभियान दूसरे अमेरिकी राज्यों मिशिगन, एरिज़ोना, विस्कॉन्सिन, पेंसिल्वेनिया और फ्लोरिडा तक फैल गया।

पिछले साल दिसंबर महीने में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि मिनेसोटा के मुस्लिम अमेरिकी मसूह ने एक्सियोस को कहा है, कि "यह #AbandonBiden 2024 सम्मेलन आगामी 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के बैकग्राउंड में किया है, क्योंकि राष्ट्रपति जो बाइडेन युद्धविराम करवाने और फिलीस्तीन के निर्दोष लोगों की रक्षा करने में नाकाम रहे हैं, लिहाजा मुस्लिम संगठन ने बाइडेन से समर्थन वापस लेने का फैसला किया है।"

मिनेसोटा राज्य में मुस्लिम की एक बड़ी आबादी रहती है, जो अरब मूल के हैं और उनकी नाराजगी कमला हैरिस के चुनावी कैम्पेन के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा कर सकती है और मुस्लिमों का विरोध, राष्ट्रपति चुनाव में इलेक्टोरल कॉलेज की संभावनाओं के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।

अमेरिकी मुस्लिम यहां तक कह चुके हैं, कि उन्हें उम्मीद नहीं है, कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोबारा चुने जाने पर उनके समुदाय के साथ बेहतर व्यवहार करेंगे, लेकिन उन्होंने अमेरिकी नीति को आकार देने के लिए बाइडेन को वोट देने से इनकार करना ही उनका एकमात्र साधन माना।

कमला हैरिस को अगर मुस्लिम वोट नहीं मिले?

हालांकि, यह देखा जाना बाकी है, कि क्या मुस्लिम मतदाता सामूहिक रूप से कमला हैरिस के खिलाफ होंगे या नहीं, लेकिन अगर मुस्लिम वोटर्स, कमला हैरिस को वोट देने से मुंह मोड़ते हैं, तो उन राज्यों में फर्क पड़ सकता है, जहां बाइडेन ने 2020 में मामूली अंतर से जीत हासिल की थी।

वहीं, 5 नवंबर को होने वाले चुनाव से एक महीने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कांटे की टक्कर हो रही है और कोई उम्मीद नहीं लगा सकता, कि कौन जीत सकता है? वहीं, अरब अमेरिकी संस्थान के अनुसार, कांटेदार मुकाबले का मिशिगन जैसे राज्यों में महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है, जहां दिसंबर में हुए एक सर्वे में बाइडेन ने 2.8 प्रतिशत अंकों से जीत हासिल की थी, जहां अरब अमेरिकियों का वोट प्रतिशत 5% है। ऐसे में अगर कमला हैरिस को अरब अमेरिकियों का साथ नहीं मिल पाता है, तो वो इलेक्टोरेल कॉलेज में पूरा राज्य ही हार सकती हैं।

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