तो इतनी खासियतों वाली एके-47 होगी 'रीलांच'

माॅस्को। देश-दुनिया में बंदूकों के शौकीन लोगों की पसंदीदा एके-47 राइफल का लोगो अब बदल गया है। दरअसल, दुनिया की सबसे पुरानी रायफल एके-47 को बनाने वाली रूसी कंपनी कलाश्निकोव ने इसकी ब्रांडिंग के लिए नया अभियान शुरू किया है। इसी के तहत इसका लोगो बदला गया है। री-ब्रांडिंग अभियान के तहत कंपनी ने इसे "शांति का हथियार" बताया है। कंपनी ने मंगलवार को री-ब्रांडिंग अभियान की शुरुआत की। गौरतलब है कि एके-47 को लोग इसकी खासियतों की वजह से पसंद करते हैं।

AK-47

इस अभियान पर 228 करोड़ रु. खर्च होंगे। नए लोगो के रूप में राइफल पर "सीके' अंकित है। इसका मतलब कलाश्निकोव कनसर्न है। यह राइफल को कंपनी द्वारा दिया गया नया नाम है, एके-47 राइफल्स का हथियार कई देशों की सुरक्षाबलों के साथ ही आतंकियों द्वारा भी किया जाता है।

एके-47 की खासियतें:

-एके-47 का आकार छोटा है और बहुत कम लागत में बड़ी संख्या में निर्माण किया जा सकता है।
-नाल में बहुत सारा कचरा फंस जाने के बाद भी ये काम कर सकती है।
-इस राइफल में लगे लोहे के गेज से निशाना लेने में काफी आसानी होती है।
-एके-47 चलाने वाला 250 मीटर तक आसानी से निशाना लगा सकता है।
-रायफल को सेमी आटोमेटिक और आटोमेटिक दोनों ही तरीके से चला सकते हैं।
-इस्तेमाल के दौरान राइफल में रीकोइल तकनीक से पुराने कारतूस गिरते जाते हैं और नए कारतूस आते जाते हैं।
-रायफल के अंदरुनी भागों गैस चेम्बर, बोर आदि पर क्रोमियम की प्लेटिंग की जाती है। जिससे इस राइफल की जिंदगी बढ़ जाती है और कभी जंग नहीं लगती।
-आज ज्यादातर कारतूसों के प्राइमर में परे के अंश रहते हैं, जो किसी हथियार को जंग लगाने और गलने में सहयोग देते हैं।

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