बाइडेन ने किया था 'अपमान', आज पुतिन-शी जिनपिंग मिलकर बनाएंगे अमेरिका के खिलाफ प्लान

एक्सपर्ट्स का मानना है कि, पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान अमेरिका को कोई 'खास' सिग्नल भेजा जा सकता है। खासकर इस वक्त चीन और रूस, दोनों को एक दूसरे की जरूरत है।

मॉस्को/बीजिंग, दिसंबर 15: अमेरिका के खिलाफ रूस और चीन मिलकर एक साथ कमर कसने वाले हैं। खासकर पिछले हफ्ते जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने लोकतांत्रिक शिखर सम्मेलन में रूस और चीन, दोनों को दरकिनार कर दिया, उसके बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच पहली वर्चुअल मुलाकात होने वाली है। यूक्रेन को लेकर जहां रूस और अमेरिका में तनाव काफी बढ़ा हुआ है, वहीं ताइवान पर चीन के सामने अमेरिका खड़ा है, लिहाजा ऐसी उम्मीद है कि, दोनों देश आज मिलकर अमेरिका को रोकने का कोई प्लान बना सकते हैं।

आज पुतिन-जिनपिंग की वर्चुअल मुलाकात

आज पुतिन-जिनपिंग की वर्चुअल मुलाकात

एक्सपर्ट्स का मानना है कि, पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान अमेरिका को कोई 'खास' सिग्नल भेजा जा सकता है। खासकर इस वक्त चीन और रूस, दोनों को एक दूसरे की जरूरत है। यूक्रेन को लेकर रूस के सामने अमेरिका के साथ साथ ब्रिटेन समेत यूरोपीय देश खड़े हैं, तो ताइवान को चीन से बचाने के लिए भी अमेरिका के साथ साथ ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने मोर्चाबंदी कर रखा है। लिहाजा, चीन और रूस की मुलाकात के दौरान अमेरिका को लेकर चेतावनी जारी किए जाने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि, चीन और रूस, दोनों ही पिछले काफी समय से पश्चिमी देशों के निशाने पर हैं और विवाद लगातार बढ़ता ही जा रही है, लिहाजा दोनों देश एकजुटता का प्रदर्शन भी कर सकते हैं।

मजबूत कर रहे हैं संबंध

मजबूत कर रहे हैं संबंध

सोवियत यूनियन के पतन के बाद रूस की आर्थिक स्थिति काफी खराब होती चली गई है और इस वक्त रूस गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लिहाजा रूस को चीन की जरूरत है, जबकि चीन को एक ऐसे शक्तिशाली 'पार्टनर' की जरूरत है, जो उसे 'नैतिकता' के स्तर पर समर्थन दे सके, खासकर यूनाइटेड नेशंस में ताइवान के मुद्दे पर उसके साथ खड़ा हो सके। लिहाजा, दोनों ही देशों ने पिछले कुछ सालों से अपने संबंधों को ट्रेड, एनर्जी सेक्टर, रक्षा सेक्टर के साथ-साथ टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी विस्तार देना शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉस्को और बीजिंग, दोनों ही विदेश नीति को लेकर एक समान विचार ही रखते हैं, खासकर ईरान, सीरिया, वेनेजुएला और पिछले दिनों उत्तरी कोरिया पर यूनाइटेड नेशंस द्वारा लगाए गये प्रतिबंधों को लेकर। लिहाजा, दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की आज की मुलाकात में इन मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा

अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा

रूस-यूक्रेन सीमा पर बढ़ते वैश्विक तनाव को देखते हुए विदेश नीति पर व्यापक चर्चा बुधवार को व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के बीच वर्चुअल बैठक में होने की संभावना है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक दिन पहले पुष्टि की थी, कि राष्ट्रपति पुतिन आगामी वर्चुअल बैठक के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिसमें नाटो की "आक्रामक बयानबाजी" और यूक्रेन से संबंधित संयुक्त राज्य अमेरिका की अप्रोच भी शामिल हैं। स्पुतनिक समाचार एजेंसी ने क्रेमलिन के प्रवक्ता के हवाले से कहा कि, "अंतर्राष्ट्रीय मामलों की स्थिति, विशेष रूप से यूरोपीय महाद्वीप को लेकर स्थिति बहुत तनावपूर्ण है, और निश्चित रूप से, मास्को और बीजिंग के बीच सहयोगियों के तौर पर चर्चा की आवश्यकता है।" स्पुतनिक ने कहा कि, "हम नाटो और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों से बहुत, बहुत आक्रामक बयानबाजी देखते हैं, इसके लिए चीनी पक्ष के साथ हमारी चर्चा की आवश्यकता है।"

ऊर्जा सेक्टर पर चीन का फोकस

ऊर्जा सेक्टर पर चीन का फोकस

क्रेमलिन के प्रवक्ता पेसकोव के अनुसार, दोनों देश क्षेत्रीय मुद्दों, ऊर्जा और द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा करेंगे। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि, इस वर्ष जीवाश्म ईंधन के भंडार में भीषण कमी के बीच चीन को अपने उत्तरी पड़ोसी से महत्वपूर्ण मात्रा में कोयला प्राप्त हुआ था, लिहाजा दोनों देशों के पश्चिम के प्रभाव के खिलाफ मजबूती से एक दूसरे के साथ गर्माहट भरे रिश्तों का प्रदर्शन करना भी जरूरी होगा, ऐसे में वर्चुअल बैठक में इसको लेकर भी संकेत दिए जा सकते हैं।

सहयोग की होगी समीक्षा

सहयोग की होगी समीक्षा

दूसरी ओर, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने यह नहीं बताया कि, दोनों राष्ट्राध्यक्ष क्या चर्चा करेंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि बैठक का पूरा विवरण बाद में जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा, "बैठक में दोनों राष्ट्राध्यक्ष इस साल चीन-रूस संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की पूरी समीक्षा करेंगे और अगले साल द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए शीर्ष-स्तरीय डिजाइन तैयार करेंगे।" हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि यूक्रेन पर बीजिंग का रुख क्या है? मॉस्को ने रूसी सीमाओं के पास नाटो के सैन्य उपकरणों के हस्तांतरण और डोनबास में यूरोपीय दखलअंदाजी में वृद्धि के बारे में चिंता जताई है और यूक्रेन पर आक्रमण को लेकर अमेरिकी दावों का बार बार खंडन किया है। रूस ने यह भी कहा है कि उसे अपने क्षेत्र में सेना को ट्रांसफर करने का अधिकार है।

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