आपको मेरी प्रशंसा करनी चाहिए.. US के सामने रूस पर की गई भारत को घेरने की कोशिश, जयशंकर ने कराया चुप
S. Jaishankar News: जियो-पॉलिटिक्स में शब्दों का खेल कैसे होता है, वो भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के बीच हुई बातचीत को देखकर समझना चाहिए। एस. जयशंकर ने बीच स्टेज पर अपने अमेरिकी समकक्ष की उस वक्त बोलती बंद कर दी, जब वो भारत के दोस्त रूस को घेर रहे थे।
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में भारतीय विदेश मंत्री ने भारत के 'ऑल एलाइमेंट' नीति का बचाव किया है और कहा, कि उन देशों की प्रशंसा की जानी चाहिए, तो वैश्विक स्तर पर संबंधों का बढ़ावा देने की क्षमता रखते हैं।

दरअसल, रूस से तेल खरीदने को लेकर पश्चिमी देश लगातार भारत को घेरने में लगे हुए हैं और यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद से ही भारत लगातार अपने दोस्त रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीद रहा है, जो पश्चिमी देशों को बर्दाश्त नहीं है। और म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में भी ऐसी ही कोशिश की गई, जब जयशंकर ने सलाह देते हुए कहा, कि भारत को 'असंवेदनशील' देश के तौर पर लेबल नहीं करना चाहिए।
भारतीय विदेश मंत्री ने क्या कहा?
एस. जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में इस सवाल के जवाब में, कि क्या भारत के पश्चिमी साझेदार यूक्रेन संघर्ष के दौरान रूसी तेल की खरीद को मंजूरी देते हैं? अमेरिकी विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकन और जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक के बगल में पैनल में बैठे हुए भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, "अगर मैं इतना स्मार्ट हूं, कि मेरे पास कई विकल्प हैं, तो आपको मेरी प्रशंसा करनी चाहिए।"
जब उनसे पूछा गया, कि क्या नई दिल्ली रूस और अमेरिका जैसे देशों के साथ गठबंधन चुन सकती है?
विदेश मंत्री ने आगे कहा, कि "नहीं, आपको आलोचना नहीं करनी चाहिए। लेकिन, क्या यह अन्य लोगों के लिए भी समस्या है? मुझे ऐसा नहीं लगता। हमने यह समझाने की कोशिश की है, कि देशों पर अलग अलग दबाव हैं और खींचतान चल रही है, ऐसें में सिर्फ एक दिशा में संबंध रखना काफी कठिन है।"
'असंवेदनशील रूप से लेन-देन' नहीं
किसी एक देश के साथ गठबंधन के सवाल पर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि भारत का नजरिए 'असंवेदनशील होकर लेन-देन' करने का नहीं।
उन्होंने कहा, कि "हम लोगों के साथ जुड़ते हैं, हम चीजों में विश्वास करते हैं, हम चीजों को शेयर करते हैं और हम चीजों पर सहमत होते हैं और मुझे लगता है, कि आज की दुनिया में ये काफी जरूरी है, ताकि आज की हमारी दुनिया की जटिलता को और भी ज्यादा जटिल बना दिया जाए। और मुझे लगता है, कि वो युग हमारे साथ है।"
भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा, कि "इसलिए मुझे लगता है, कि जो अच्छे पार्टनर होते हैं, वो आपको कई विकल्प देते हैं और जो स्मार्ट पार्टनर होते हैं, वो कुछ विकल्प चुनते भी हैं।"
वहीं, इस सवाल पर, कि क्या ब्रिक्स का उदय पश्चिमी देशों के लिए चुनौती बन सकता है? भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, कि "करीब 30 देश ऐसे हैं, जो ब्रिक्स में शामिल होने की इच्छा रखते हैं और इसे महत्वपूर्ण मानते हैं, तो इसमें जरूर कुछ अच्छा होगा। और आज के समय में सबसे अच्छी बात ये हो सकती है, कि आप ना तो पश्चिम के गुट में जाएं और ना ही पश्चिम के खिलाफ जाएं। और मैं निश्चित रूप से भारत को एक ऐसे देश के रूप में चित्रित करूंगा, जो गैर-पश्चिमी है, लेकिन जिसके पश्चिमी देशों के साथ बेहद मजबूत संबंध हैं और उनमें सुधार हो रहा है।"
इजराइल-हमास युद्ध पर क्या बोले?
कार्यक्रम में जब भारतीय विदेश मंत्री से इजराइल-हमास युद्ध पर सवाल पूछा गया, को उन्होंने कहा, कि "सबसे पहली बात, हमें पूरी तरह से साफ होना जाहिए, कि 7 अक्टूबर को जो कुछ हुआ था, वो आतंकवाद था। और इसको लेकर कोई सफाई नहीं दी जा सकती है। वो आतंकवाद था। और दूसरी बात, कि अब इजराइल प्रतिक्रिया दे रहा है, तो इजराइल को बहुत सावधानी से इस बात पर ध्यान देना चाहिए, कि उसके ऑपरेशंस में आम नागरिकों को नुकसान ना हो और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना उसका दायित्व है।"
इजराइल-हमास युद्ध पर बोलते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा, कि "तीसरी बात, कि बंधकों की रिहाई अत्यंत आवश्यक है। चौथी बात, मानवीय कॉरिडोर खोलना जरूरी है, ताकि मानवीय सहायता पहुंचाई जा सके और अंत में.. एक स्थाई समाधान की जरूरत है, नहीं तो हम ऐसी घटनाओं को बार बार देखेंगे।"
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि "भारत लंबे समय से दो-राज्य सिद्धांत का समर्थन करता है और भारत अपनी पुरानी स्थति पर आज भी कामय है।"












Click it and Unblock the Notifications