रूसी हथियारों को लेकर जयशंकर ने अमेरिका को धो डाला, कहा, पहले तानाशाही की, अब ज्ञान दे रहे
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि, "रूस के साथ हमारे लंबे समय से संबंध हैं, और इस संबंध ने हमारे हितों की अच्छी तरह से सेवा की है। हमारे पास सोवियत और रूसी मूल के हथियारों की पर्याप्त लिस्ट है।"
S jaishankar on india russia arms deal: रूसी हथियार खरीदने को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना पर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका समेत पश्चिमी देशों पर जोरदार पलटवार किया है और उन्होंने सीधे तौर पर कहा है कि, पिछले कई दशकों ने हथियार बेचने के नाम पर पश्चिमी देशों ने तानाशाही रवैया अपनाया। भारतीय विदेश मंत्री ने सीधे तौर पर अमेरिका और पश्चिमी देशेों को आड़े हाथ लिया है, जो यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही रूसी हथियार खरीदने को लेकर भारत की आलोचना कर रहे थे।

अमेरिका को धो दिया
भारतीय विदेश मंत्री ने रूसी हथियारों की खरीद को लेकर अमेरिका को धो दिया है और उन्होंने इंडियन आर्मी के रूसी हथियारों के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा कि, पश्चिमी देशों में सैन्य तानाशाही को पसंदीदा साझेदार के रूप में चुना और कई दशकों तक भारत को हथियारों की आपूर्ति नहीं की। उन्होंने परोक्ष तौर पर पाकिस्तान का हवाला देते हुए कहा कि, पश्चिमी देशों ने पाकिस्तान को अपना हथियार साझेदार चुना और भारत को हथियार नहीं बेची, इसीलिए भारत को रूस से हथियार खरीदना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिका के खिलाफ काफी सख्त तेवर दिखाए हैं, जिससे एक बार फिर से साबित हो रहा है, कि भारत और अमेरिका के रिश्ते कुछ सही नहीं चल रहे हैं।

रूसी हथियार पर क्या बोले?
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि, "रूस के साथ हमारे लंबे समय से संबंध हैं, और इस संबंध ने हमारे हितों की अच्छी तरह से सेवा की है। हमारे पास सोवियत और रूसी मूल के हथियारों की पर्याप्त लिस्ट है।" उन्होंने कहा कि, "पिछले कई दशकों से भारत को हथियार नहीं दिए गये और भारत के बगल में सैन्य तानाशाहों को एक पसंदीदा भागीदार के तौर पर देखा गया।" आपको बता दें कि, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर का ऑस्ट्रेलिया में भव्य स्वागत किया गया है और ऑस्ट्रेलिया का संसद भवन तिरंगे की रोशनी में नहाया हुआ था। आपको बता दें कि, भारत के साथ साथ ऑस्ट्रेलिया भी क्वाड के पार्टनर हैं, जिसमें भाग लेने के लिए इस साल फरवरी महीने में भी भारतीय विदेश मंत्री ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था। लेकिन, पिछले कुछ महीनों से भारतीय विदेश मंत्री पश्चिमी देशों को जिस तरह से धो रहे हैं, वो भारत की बदलती विदेश नीति की तरफ इशारा कर रहा है।

अमेरिका को कैसे दिखाया आईना
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि, "अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में हम ऐसे निर्णय लेते हैं जो हमारे भविष्य के हितों और वर्तमान स्थिति को दर्शाते हैं।" इसके साथ ही उन्होंने अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष के साथ यूक्रेन में चल रहे संघर्ष और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर इसके प्रभावों पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कि, "हमने यूक्रेन और भारत-प्रशांत क्षेत्र में इसके नतीजों, क्वाड में प्रगति, जी -20 मुद्दों, हमारे त्रिपक्षीय, आईएईए से संबंधित कुछ चीजों और जलवायु वित्त सतत विकास लक्ष्यों पर चर्चा की है।" यूक्रेन युद्ध पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि, "हम बहुत स्पष्ट रूप से यूक्रेन में संघर्ष के खिलाफ रहे हैं। हमारा मानना है कि युद्ध किसी के, प्रतिभागियों या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित की सेवा नहीं करता है। वैश्विक दक्षिण के देश के रूप में, हम पहली बार देख रहे हैं कि, युद्ध ने कम आय वाले देश को कितना प्रभावित किया है । जैसा कि पीएम मोदी ने समरकंद में कहा था, यह युद्ध का युग नहीं है।"

ऑस्ट्रेलिया के साथ कई मुद्दों पर बात
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि, भारत और ऑस्ट्रेलिया की चर्चा इस तथ्य पर आधारित थी, कि "उदार लोकतंत्र के रूप में, दोनों देश नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास करते हैं, अंतरराष्ट्रीय जल में नेविगेशन की स्वतंत्रता में, विकास कनेक्टिविटी और सभी की सुरक्षा को बढ़ावा देने में विश्वास करते हैं और दोनों देश यह सुरक्षित करते हैं, कि इन मुद्दों पर देशों के पास संप्रभु फैसले लेने का कितना अधिकार है।" उन्होंने कहा कि, अगले साल भारत जी20 की अध्यक्षता कर रहा है, लिहाजा भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया के विचार और हित बहुत महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित स्थलों को सजाकर भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने में भारत के साथ जुड़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया का आभार व्यक्त किया।

संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर
भारतीय विदेश मंत्री ने ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया कि, हमारी बातचीत यह देखने के लिए थी, कि भारत और ऑस्ट्रेलिया एक बेहतर क्षेत्र को कैसे आकार दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि, "हमने बहुत सारे मुद्दों पर बात की, जिनमें व्यापार, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और हमारे बीच हुए कई समझौते शामिल थे। हमने इस बात पर भी चर्चा की, कि एक दूसरे के देश में राजनयिक पदचिह्न का विस्तार करना हमारे पारस्परिक हित में है।" माना जा रहा है, कि भारत बहुत जल्द ऑस्ट्रेलिया में अपना वाणिज्य दूतावास खोलने जा रहा है। वहीं, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी बातचीत चल रही है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इस बात पर प्रकाश डाला, कि भारत और ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदार हैं। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि, भारत और ऑस्ट्रेलिया मानते हैं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को नया आकार दिया जा रहा है और यह दोनों देशों के हित में है कि वे इसे एक साथ नेविगेट करें।












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