इटली में धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त बिल तैयार, मस्जिदों के बाहर नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध, विवाद बढ़ा

Italy religious transformation Bill: इटली की सरकार ने देश में धर्म परिवर्तन रोकने के लिए मसौदा तैयार किया है, जिसपर विवाद शुरू हो गया है। इटली की सत्तारूढ़ ब्रदर्स ऑफ़ इटली (FdI) पार्टी ने एक विधेयक तैयार किया है, जिसके तहत देश में होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने की कोशिश की जाएगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस विधेयक में कई बातें ऐसी हैं, जिसपर विवाद हो रहा है। लेकिन, इटली की सरकार ने कहा है, कि धर्म परिवर्तन रोकने के लिए इस विधेयक का देश की संसद में पास होना जरूरी है। इस बिल में, देश के गैराजों, औद्योगिक केन्द्रों, औद्योगिक गोदामों और मस्जिद के बाहर नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।

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जियोर्जिया मेलोनी मानी जाती हैं राष्ट्रवादी

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की विचारधारा राष्ट्रवादी है और उन्होंने अपने चुनावी कैम्पेन के दौरान भी धर्म परिवर्तन समेत देश में मुस्लिम शरणार्थियों को रोकने के लिए कानून बनाने का वादा किया था। बताया जा रहा है, कि इटली का एक बड़ा हिस्सा, मुस्लिम शरणार्थियों और धर्म परिवर्तन की घटनाओं से परेशान है, इसीलिए जियोर्जिया मेलोनी को लोगों ने भारी बहुमत से जिताया और अब वो अपने वादे को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं।

स्थानीय इतालवी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जियोर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी सरकार ने देश के शहरी नियोजन कानून में संशोधन किया है। इस मसौदा का उद्देश्य औद्योगिक गैराजों और गोदामों को धार्मिक प्रार्थना स्थलों या मस्जिदों में बदलने पर रोक लगाना है।

यह बिल इटली में सत्तारूढ़ ब्रदर्स ऑफ इटली (Fratelli d'Italia पार्टी) ने देश की संसद में पेश किया है, जो इटली में वर्तमान गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही है। जैसा कि इतालवी मीडिया द्वारा रिपोर्ट किया गया है, बिल इतालवी बिल्डिंग कोड में संशोधन करने का प्रयास करता है।

इस बिल के तहत इटली के तमाम मस्जिदों की जांच की जाएगी और ये पता लगाने की कोशिश की जाएगी, कि इन्हें फंड कहां से मिलता है। इसके साथ ही, बिल में कहा गया है, कि अगर किसी औद्योगिक गोदओं या गैराजों का इस्तेमाल धार्मिक प्रचार के लिए किया गया, तो आरोपी को सख्त सजा दी जाएगी।

इस बिल पर सबसे पहले गठबंधन समूह के नेता टोमासो फोती ने हस्ताक्षर किए हैं। वहीं, इस बिल के खिलाफ इटली के इस्लामिक समुदाय कडे़ विरोध में उतरने की योजना बना रहे हैं।

बिल का क्या होगा असर?

यदि ये बिल संसद में पारित हो जाता है, तो बिल उन अनगिनत मस्जिजों को बंद कर देगा, जो पहले से ही औद्योगिक स्थलों या गैराजों में बनाए गये हैं। बिल में कहा गया है, कि ऐसे सैकड़ों मस्जिद, जो सरकार की इजाजत के बगैर अवैध तरीके से औद्योगिक परिसरों में बनाए गये हैं, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।

इस बिल के जरिए यह दावा किया जा रहा है, कि बिल इटली के किसी भी संभावित इस्लामीकरण को रोक देगा।

रिपोर्टों के अनुसार, यदि बिल पारित हो जाता है, तो वे सभी सांस्कृतिक और धार्मिक संगठनों, जिन्होंने इतालवी राज्य के साथ समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, उन्हें ऐसे जगहों पर धार्मिक कार्य करने की इजाजत नहीं दी जाएगी, जिन्हें पूजा स्थल नहीं बनाया जा सकता है। सरकार का कहना है, कि एक 'मजहब' के लोग सार्वजनिक जगहों पर धार्मिक कार्य करते हैं, जो अवैध है।

आपको बता दें, कि इटली में इस्लाम की महत्वपूर्ण स्थिति होने के बाद भी इसने सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया है, जबकि बाकी सभी धर्म ने सरकार के साथ समझौता साइन कर रखा है, जिसके तहत धर्म परिवर्तन को लेकर नियम बने हुए हैं।

लिहाजा, इटली सरकार आधिकारिक तौर पर इस्लाम धर्म को राज्य धर्म के तौर पर मान्यता नहीं देती है।

बिल के विरोध में उतरा विपक्ष

मीडिया से बातचीत में रोम में माग्लियाना मस्जिद के इमाम सामी सलेम ने कहा, कि "यह एक ऐसा बिल है जो स्पष्ट रूप से मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है और इटली के संविधान का सम्मान नहीं करता है, जो इटली में रहने वाले सभी नागरिकों की रक्षा करता है।"

वहीं, देश के उत्तरी प्रांत फ्लोरेंस के एक अन्य इमाम इज्जेद्दीन एल्ज़िर ने बिल की वैधता के बारे में चिंता जताई है।

पीडी के मार्को सिमियानी, ग्रीन के एंजेलो बोनेली, डेनिएला रफिनो (एक्शन-IV) और फ्रेंको मैन्स (भाषाई अल्पसंख्यक) सहित विपक्षी नेताओं ने विधेयक की योग्यता और संवैधानिक वैधता को लेकर सवाल उठाया है और विधेयक का जोरदार विरोध किया है।

इन कथित लिबरल विपक्षी राजनेताओं ने इसे इस्लामोफोबिक और 'असंवैधानिक' दोनों करार दिया है।

दरअसल, ग्रीन पार्टी के नेता एंजेलो बोनेली ने चैंबर के स्पीकर लोरेंजो फोंटाना को एक पत्र भेजा है। 200 सीटों वाली संसद में ग्रीन पार्टी के पास चार सीटें हैं। एंजेलो बोनेली ने लिखा है, कि बिल भेदभावपूर्ण है और यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

बिल का बैकग्राउंड जानिए

आपको बता दें, कि पिछले साल जब इटली में चुनाव हो रहे थे, तो प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी ने इमिग्रेशन के खिलाफ जोरदार कैम्पेन चलाया था। इस कैम्पेन में, खासतौर पर यूरोप के बाहर से आने वाले लोगों को देश के लिए खतरा बताया था।

ये एक बड़ा चुनावी वादा था और अब इतालवी चैंबर ऑफ डेप्युटी में पार्टी के नेता, टोमासो फोती ने इस बिल को तैयार किया है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने भी आप्रवासन को कम करने के प्रयास किए हैं। पिछले हफ्ते, वह इटली में अवैध आप्रवासन को रोकने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए ट्यूनीशियाई नेतृत्व से मिलीं थीं।

हालांकि, स्वीकृत भवनों या मस्जिदों के बाहर धार्मिक प्रार्थना पर प्रतिबंध लगाने वाला यह मसौदा कानून अपनी तरह का पहला नहीं है। इससे पहले, इसी तरह के कानून, जिन्हें मस्जिद विरोधी कानून भी कहा जाता था, लोम्बार्डी और अन्य जगहों पर दक्षिणपंथी नियंत्रित क्षेत्रीय परिषदों द्वारा प्रस्तावित किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये कानून हाल ही में मोरक्को, बाल्कन और पाकिस्तान से आप्रवासन को ध्यान में रखते हुए लाए गए हैं। रिपोर्ट में आगे दावा किया गया है, कि इससे इटली में मुसलमानों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

आपको बता दें, कि जहां इटली का संविधान धर्म की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है, वहीं रोमन कैथोलिक धर्म को एक विशेष दर्जा प्राप्त है और यह कैथोलिक चर्च को "स्वतंत्र और संप्रभु" के रूप में मान्यता देता है।

वहीं, इटली की सरकार ने देश में मौजूद दूसरे धर्मों के साथ समझौते साइन किए हुए हैं, जिनमें हिन्दू, बौद्ध, अलग अलग चर्च, यहूदी और अन्य धार्मिक प्रतिनिधि शामिल हैं। लेकिन मुसलमानों ने ये समझौता साइन नहीं किया है।

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