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ISRO ने लिया सरहद की सुरक्षा का मिशन, स्पेस से जल और थल की सुरक्षा, अब चीन नहीं कर पाएगा घुसपैठ

16 अप्रैल को इसरो EOS-3 GISAT सैटेलाइट लॉन्च करेगा, जिससे सरहद पर दुश्मन की किसी भी गतिविधि की जानकारी भारतीय सेना को उसी वक्त मिल सकेगी।

नई दिल्ली: देश के विकास में इसरो लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है और जब बात देश की सुरक्षा की हो तो भला इसरो कैसे पीछे रहने वाला है। 16 अप्रैल को इसरो भारतीय सेना के हाथ में ऐसा हथियार सौंपने जा रहा है, जो भारतीय सैनिकों के लिए गेमचेंजर साबित होने वाली है। अब इसरो ऐसी व्यवस्था करने जा रहा है कि भारतीय सीमा पर दुश्मन क्या साजिश करने वाले हैं, इसकी एक एक जानकारी रीयल टाइम भारतीय सेना को होती रहेगी जिससे भारतीय सेना चीनी और पाकिस्तानी घुसपैठियों को वक्त रहते खत्म कर सकती है। भारतीय सरहद की रक्षा के लिए इसरो जो करने जा रहा है, उसे भारतीय सेना के लिए एक क्रांति से कम नहीं कहा जा सकता है।

सैटेलाइट से सीमा सुरक्षा

सैटेलाइट से सीमा सुरक्षा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो 16 अप्रैल 2021 को भारतीय सीमा की सुरक्षा के लिए सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है। इस सैटेलाइट के लॉन्च होने के बाद सीमा पर क्या क्या गतिविधियां हो रही हैं, उसकी रीयल टाइम जानकारी भारतीय सैनिकों को हो सकेगी। इस सैटेलाइट के जरिए भारतीय सीमा की सुरक्षा करना हमारे वीर जवानों के लिए बेहद आसान हो जाएगा। सीमा पर काफी विपरीत हालात होते हैं। कठोर मौसम की वजह से कई बार दुश्मनों की नापाक हरकत के बारे में पता नहीं चल पाता है और इसी का फायदा दुश्मन मुल्क उठाने की फिराक में रहते हैं लेकिन अब दुश्मनों को भारतीय सेना रीयल टाइम मुंहतोड़ जबाव देने में सक्षम होगी। भारतीय सैनिकों को पहले ही पता चल जाएगा कि सीमा के अंदर कहां से दुश्मन घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा है।

इसरो का ऑब्जरवेशन सैटेलाइट

इसरो का ऑब्जरवेशन सैटेलाइट

इसरो की इस सैटेलाइट का सबसे बड़ा फायदा भारतीय सेना को होने वाला है। आपने देखा होगा कि पिछले साल चीनी घुसपैठिए भारतीय सीमा में दाखिल हो गये थे और बाद में जाकर भारतीय सैनिकों के साथ उनका काफी संघर्ष हुआ था, जिसमें 20 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। चीन और पाकिस्तानी दुश्मन हमेशा भारतीय सीमा में दाखिल होने की कोशिश में लगे रहते हैं। खासकर चीन के बारे में ऐसी रिपोर्ट है कि सर्दी का मौसम शुरू होते ही चीन फिर से घुसपैठ करने की कोशिश करेगा, ऐसे में इसरो का ये सैटेलाइट भारतीय सैनिकों के लिए वरदान साबित होगा। इसरो जिस ऑब्जरवेशन सैटेलाइट को 16 अप्रैल को लॉन्च करने जा रहा है, उससे भारत की जमीन और भारतीय सीमा पर पूरी तरह से निगरानी रखी जा सकती है। इसरो के इस सैटेलाइट का नाम है EOS-3/GISAT सैटेलाइट। यानि, अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट/जियोसिक्रनस सैटेलाइट लॉन्च वैहिकल एफ-10।

इसरो की ‘अप्रैल क्रांति’

इसरो की ‘अप्रैल क्रांति’

ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट की लॉन्चिंग आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से की जाएगी। इस सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए जीएसएलवी-एमके-2 रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा। रॉकेट ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। ये पृथ्वी से 36 हजार किलोमीटर की उंडडाई से धरती का चक्कर लगाता रहेगा और वहां से भारतीय सीमा की रीयल टाइम जानकारी भेजता रहेगा। जीएसएलवी-एमके-2 रॉकेट से पहली बार ओपीएलएफ यानि ओजाइव शेप्ड पेलोड फेयरिंग सैटेलाइट को लॉन्च किया जाएगा। इसका मतलब ये हुआ कि ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट ओपीएलएफ कैटेगरी में आता है यानि ये सैटेलाइट 4 मीटर व्यास के जैसा दिखाई देगा। इसरो सूत्रों के मुताबिक ये सैटेलाइट स्वदेशी है और स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन से लैस रॉकेट की आठवीं लॉन्चिंग होगी।

सैटेलाइट के कैमरे

सैटेलाइट के कैमरे

इसरो द्वारा लॉन्च होने के महज 19 मिनट बाद ही ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट की अपनी निर्धारित कक्षा में तैनाती हो जाएगी। कक्षा में स्थापित होने के साथ ही ये सैटेलाइट काम करना शुरू कर देगा। इस सैटेलाइट की सबसे खास और महत्वपूर्ण बात है, इसमें लगे कैमरे। ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट में तीन बेहद उन्नत किस्म के तीन कैमरे लगे हुए हैं। पहला कैमरा मल्टी स्पेक्ट्रल विजिबल एंड नीयर इंन्फ्रारेट कैमरा है तो दूसरा कैमरा हाइपर स्पेक्ट्रल विजिबल एंड नीयर इंन्फ्रारेड कैमरा है वहीं तीसरा कैमरा हाइपर स्पेक्ट्रल शॉर्ट वेव इंन्फ्रारेड कैमरा है। बात अगर कैमरों के रिजॉल्यूशन की करें तो पहले कैमरे का रिजॉल्यूशन 42 मीटर, दूसरे कैमरे का रिजॉल्यूशन 318 मीटर और तीसरे कैमरे का रिजॉल्यूशन 191 मीटर का है। यानि, इन कैमरों में इस साइज की आकृतियां आसानी से कैद हो जाएंगी। जिससे पता चल पाएगा कि भारतीय सीमा पर क्या हलचल हो रही है।

सैटेलाइट से रात में तस्वीरें

सैटेलाइट से रात में तस्वीरें

इसरो के इस सैटेलाइट से सिर्फ दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी सामान्य तस्वीरें ली जा सकेंगी। यानि, ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट में जो कैमरे लगे हैं, उसमें लगे कैमरे दिन में तो तस्वीरें खींचेगा ही, साथ ही साथ इसमें इन्फ्रारेड कैमरे लगे हैं, लिहाजा ये रात में भी तस्वीरें खींचने में सक्षम है। यानि, रात के वक्त भी अगर सरहद पर दुश्मन किसी भी गतिविधि को अंजाम देने की कोशिश करेंगे तो वो सैटेलाइट की निगाहों से नहीं बच पाएंगे। इसके साथ ही ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट में लगे कैमरे किसी भी मौसम में तस्वीरें लेने में सक्षम है। यानि, मौसम चाहे कितना भी खराब क्यों ना हो, सैटेलाइट में लगे कैमरे तस्वीरें खींचते रहेंगे। इस सैटेलाइट की मदद से सरहदों की रक्षा के साथ साथ आपदा प्रबंधन और किसी भी घटना की निगरानी की जा सकेगी। इसके साथ ही कृषि, मनरेलॉजी, जंगल और आपदा के बारे में भी ये सैटेलाइट पहले सूचना देगा। क्लाउड प्रॉपर्टीज, बर्फ और ग्लेशियर के साथ साथ समुन्द्र के भी निगरानी करने में ये सैटेलाइट पूरी तरह से कारगर हैं। यानि, दुश्मनों की साजिश समुन्द्र में भी नहीं चल सकती है।

इसरो पर गर्व

इसरो पर गर्व

भारत की सुरक्षा के लिए इसरो शुरू से ही काम करता आ रहा है और साल 1979 से लेकर 2020 तक इसरो 37 अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट अंतरिक्ष में लॉन्च कर चुका है। हालांकि, इनमें 2 लॉन्च फेल भी हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक पहले इसरो इस सैटेलाइट को 5 मार्च को लॉन्च करने वाला था, लेकिन कुछ तकनीकी वजहों से इसकी लॉन्चिंग टालकर 28 मार्च कर दी गई थी लेकिन अब इसरो ने इस सैटेलाइट की नई लॉन्चिंग डेट 16 अप्रैल कर दी है। अब अगर सबकुछ ठीक रहा तो सैटेलाइट 16 अप्रैल से काम करना शुरू कर देगा। ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट का वजन 2268 किलोग्राम है और भारत या सबसे ज्यादा वजन वाला अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट होगा। इसरो ने इससे पहले 600 किलो और 800 किलो के सैटालाइट लॉन्च किए थे।

इसरो की आगे की प्लानिंग

इसरो की आगे की प्लानिंग

ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट के बाद इसरो की आगे की प्लानिंग और भी ज्यादा गर्व करने वाला है। ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट की लॉन्चिंग के बाद इसरो दूसरा जियो-इमेजनरी सैटेलाइट ईओएस-2 लॉन्च करेगा। हालांकि, अभी इसकी तारीख तय नहीं की गई है। इसरो द्वारा लॉन्च किया जाने वाला ये सैटेलाइट खास तौर पर देश की सुरक्षा के लिए ही बनाया गया है जिसमें थर्मल इमेजिंग कैमरे लगे होंगे। जिसके जरिए शरीर के टेम्परेचर के जरिए सैटेलाइट ये पता लगाने में सक्षम होगा कि ऑब्जेक्ट इंसान है या जानवर। जिसके बाद देश की सीमाएं और भी ज्यादा सुरक्षित हो जाएंगी। 16 अप्रैल को इसरो जिस सैटेलाइट को लॉन्च करने जा रहा है, वो सैटेलाइट पूरे देश पर एकसाथ नजर रखेगा और सीमा पर खासतौर पर इसकी निगरानी होगी। आपको बता दें कि इससे पहले इसरो ने जो अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट भेजे थे, उन्हीं सैटेलाइट्स की मदद से भारत ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया था।

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