ISRO ने फिर रचा इतिहास.. तेज हवालों के बीच ‘पुष्पक विमान’ की तीसरी बार सटीक लैडिंग, जानें कैसे किया कमाल?
ISRO RLV LEX-3 News: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर से इतिहास रच दिया है और दिखा दिया है, कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता में कितनी ताकत है और इसरो क्या क्या कर सकता है। इसरो ने आज घोषणा की है, कि उसने काफी ज्यादा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में RLV पुष्पक विमान की सफल लैंडिंग कर दी है।
इसरो ने कहा है, कि उसने रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल यानि RLV का कामयाब परीक्षण किया है और लगातार तीसरी बार कामयाब परीक्षण करके इसरो ने नया इतिहास बना दिया है। इसरो ने इससे 22 मार्च को दूसरी बार RLV का कामयाब परीक्षण किया गया था।

इसरो की ऐतिहासिक कामयाबी
इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा है, कि "पुष्पक ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एडवांस ऑटोनॉमस क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए सटीक क्षैतिज लैंडिंग की है। आरएलवी लेक्स के उद्देश्यों को पूरा करने के साथ, इसरो ने ऑर्बिटल रीयूजेबल व्हीकल आरएलवी-ओआरवी में प्रवेश किया।"
ISRO ने कहा है, कि ये लैंडिंग काफी तेज हवालों के बीच करवाई गई है और लैडिंग से पहले मुश्किल वातावरण का निर्माण किया गया था, ताकि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इस क्षमता का परीक्षण किया जा सके।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है, कि इस मिशन ने अंतरिक्ष से लौटने वाले वाहन के लिए दृष्टिकोण और लैंडिंग इंटरफेस और हाई स्पीड वाली लैंडिंग स्थितियों को फॉलो किया है, जिससे रीयूजेबल प्रक्षेपण यान के विकास के लिए आवश्यक सबसे महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी को हासिल करने में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की विशेषज्ञता की पुष्टि हुई है।
इसरो की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है, कि RLV LEX-03 ने काफी चुनौतीपूर्ण रिलीज स्थितियों और तेज गंभीर हवा की स्थिति के तहत आरएलवी की स्वायत्त लैंडिंग क्षमता का फिर से प्रदर्शन किया है।
'पुष्पक विमान' की कामयाब लैडिंग
इसरो ने अपने बयान में कहा है, कि 'पुष्पक' नामक पंख वाले वाहन को भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर से 4.5 किमी की ऊंचाई पर "रनवे से 4.5 किमी दूर एक रिलीज पॉइंट से छोड़ा गया था। पुष्पक ने स्वायत्त रूप से क्रॉस-रेंज सुधार युद्धाभ्यास किया, रनवे के पास पहुंचा और रनवे सेंटरलाइन पर एक सटीक क्षैतिज लैंडिंग की।"
बयान में आगे कहा गया है, कि इस मिशन ने अंतरिक्ष से लौटने वाले वाहन के लिए दृष्टिकोण और लैंडिंग इंटरफेस और उच्च गति वाली लैंडिंग स्थितियों का अनुकरण किया, जिससे रीयूजेबल प्रक्षेपण यान (आरएलवी) के विकास के लिए आवश्यक सबसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को प्राप्त करने में इसरो की विशेषज्ञता की पुष्टि हुई है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है, कि "कम लिफ्ट टू ड्रैग के अनुपात की वजह से लैंडिंग की स्पीड 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ज्यादा थी।" इसकी कामयाबी का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि जब एक कॉमर्शियल विमान की जमीन पर लैंडिंग होती है, तो उसकी रफ्तार 260 किलोमीटर प्रतिघंटे के आसपास होती है, लेकिन जब एक फाइटर जेट की लैडिंग होती है, उस वक्त उसकी रफ्तार 280 किलोमीटर प्रतिघंटे की होती है, लेकिन इसरो ने इसकी लैडिंग 320 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से की है।"

भारत के लिए कितनी बड़ी कामयाबी?
आरएलवी LEX-1 और LEX-2 मिशनों की सफलता के बाद ISRO के लिए आरएलवी LEX-3 मिशन काफी ज्यादा महत्वपूर्ण था। RLV LEX-2 के लिए 150 मीटर की क्रॉस रेंज रखी गई थी, जबकि RLV LEX-3 के लिए क्रॉस रेंज 500 मीटर की थी।
इस मिशन का सबसे बड़ा मकसद ये है, कि भारत अपना स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी कर रहा है और भारत का मकसद एक ऐसे रॉकेट का निर्माण करना है, जिसे बार अंतरिक्ष में भेजा जा सके। वहीं, जब अंतरिक्ष में भारत के अंतरिक्ष यात्री मौजूद होंगे, तो उनकी जरूरतों को लगातार पूरा करने के लिए ऐसे रॉकेट की जरूरत होगी, जिसका इस्तेमाल बार बार किया जा सके, ताकि वैज्ञानिक मिशनों को अंदाम देन में खर्च काफी कम आए।
भारत अब रीयूजेबल रॉकेट के निर्माण के काफी करीब पहुंच चुका है और एक बार जैसे ही रीयूजेबल रॉकेट का निर्माण होता है, भारत, जो पहले से ही काफी कम खर्च में स्पेस मिशनों को अंजाम देने के लिए जाना जाता रहा है, वो और भी कम खर्च में स्पेस मिशनों को अंजाम दे पाएगा, जिससे इसरो के लिए कॉमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च करना काफी आसान हो जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications