भूखे मरो या सरेंडर करो! हमास को हराने के लिए किसी भी हद तक जाएगा इजराइल? नेतन्याहू के जनरलों का ऐलान

Israel siege north Gaza: एक साल से ज्यादा समय से चल रही लड़ाई के बाद, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास गाजा पट्टी में युद्ध को खत्म करने का एक नया विचार आया है और विचार यह है, कि दबाव इतना बढ़ाया जाए, कि हमास फिर से बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हो जाए और इजरायल मजबूत स्थिति के साथ बातचीत की टेबल पर पहुंचे

इस विचार को लागू करने की रणनीति, गाजा और लेबनान में हाल ही में युद्ध के मैदान में मिली सफलताओं पर आधारित है और ऐसा लगता है कि मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जियोरा आइलैंड के नेतृत्व में रिटायर्ड इजराइली सैन्य अधिकारियों के एक समूह द्वारा बनाई गई योजना पर आधारित है।

Israel siege north Gaza

भले ही इजराइल, हमास को इस हद तक परास्त करने में सफल हो जाए, कि वह बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हो जाए, फिर भी इजराइल को हमास के साथ राजनीतिक रूप से जुड़ना होगा, क्योंकि सैन्य कार्रवाई केवल राजनीतिक समाधान तक पहुचने का एक माध्यम है - अपने आप में समाधान नहीं। अब तक, नेतन्याहू ने गाजा के लिए किसी भी योजना के साथ आने से इनकार कर दिया है, सिवाय अस्पष्ट बयानों के, कि हमास को गाजा पर शासन जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

गाजा के लिए इजराइली जनरलों की योजना क्या है?

इजराइली जनरलों की योजना का मुख्य विचार यह है, कि लक्षित क्षेत्र, जो गाजा में एक शहर या कई शहर हो सकते हैं, वहां से नागरिकों को निकाला जाएगा और फिर भोजन और पानी की सप्लाई लाइन काट दी जाएगी। योजना के अनुसार, एक बार नागरिकों को निकाल दिए जाने के बाद, वहां बचे हुए सभी लोगों को लड़ाकू माना जाएगा और वे एक इजराइल के निशाने पर होंगे।

यह योजना 'आत्मसमर्पण या भूख से मरने' के प्लान पर आधारित है, जहां घेरे गए हमास के लोग या तो भूखे मरेंगे या आत्मसमर्पण करने के लिए बाहर आएंगे या अंतिम लड़ाई लड़ेंगे।

रिटायर्ड जनरल एलैंड ने कहा है, कि हमास को तोड़ने का यही एकमात्र तरीका है, और रिपोर्टों ने कहा है, कि इसे कम से कम आंशिक रूप से गाजा में लागू किया जा रहा है, जबकि ऑब्जर्वर्स के बीच इस बात पर लगभग सर्वसम्मति है, कि यह योजना विनाशकारी है।

एसोसिएटेड प्रेस ने बताया है, कि बहुत कम नागरिक उन जगहों से चले गए हैं, जहां इस योजना को लागू किया जाना है। हालाँकि, एलैंड ने इस पर कोई खेद नहीं जताया है। उन्होंने कहा है, कि सभी नागरिकों को निकाला जाएगा और अगर वे नहीं जाते हैं, तो उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।

एलैंड ने एपी को बताया, "उन्हें या तो आत्मसमर्पण करना होगा या भूख से मरना होगा। इसका मतलब यह नहीं है, कि हम हर व्यक्ति को मार देंगे। यह जरूरी नहीं होगा। लोग वहां (उत्तरी गाजा) रह नहीं रह पाएगे। पानी सूख जाएगा।"

एलैंड ने बीबीसी को बताया, कि एक बार आपूर्ति बंद हो जाने के बाद, नागरिकों सहित बचे हुए लोगों के पास दो विकल्प होंगे, आत्मसमर्पण करना या भूख से मरना।

एलैंड ने चेतावनी देते हुए कहा, कि "चूंकि हमने पिछले नौ या 10 महीनों में गाजा के उत्तरी हिस्से को घेर लिया है, इसलिए हमें जो करना चाहिए, वह यह है कि गाजा के उत्तरी हिस्से में रहने वाले सभी 3 लाख निवासियों को यह बताना चाहिए, कि उन्हें यह क्षेत्र छोड़ना होगा और उन्हें इजराइल द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले सुरक्षित गलियारों से निकलने के लिए 10 दिन का समय दिया जाना चाहिए। और उस समय के बाद, यह पूरा क्षेत्र एक सैन्य क्षेत्र बन जाएगा। और हमास के सभी लोग, चाहे उनमें से कुछ लड़ाके हों, या उनमें से कुछ नागरिक हों... उनके पास दो विकल्प होंगे या तो आत्मसमर्पण करना या भूख से मरना।"

गाजा में फिलिस्तीनियों के पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है

इजराइली जनरलों की योजना में सबसे बड़ी खामी यह बुनियादी धारणा है, कि सभी नागरिक चले जाएंगे या जाना चाहेंगे या उन्हें जाने की इजाजत दी जाएगी, भले ही वे जब जाना चाहें।

गाजावासियों के पास जाने के लिए कोई जगह नहीं बची है, क्योंकि लगभग हर शहर पर साल भर चले युद्ध में हमला किया गया है और यहां तक ​​कि तथाकथित सुरक्षित क्षेत्रों पर भी बमबारी की गई है और सुरक्षा की कोई भावना नहीं है। उन्हें यह भी डर है, कि अगर वे चले गए, तो वे कभी वापस नहीं लौट पाएंगे - ठीक वैसे ही जैसे 1948 के इजराइल-अरब युद्ध के दौरान हुआ था, जिसे अरब लोग 'नकबा' के नाम से याद करते हैं।

ऐसी आशंकाएं जायज हैं।

योजना का मसौदा तैयार करने में शामिल मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) गेर्शोन हाकोहेन ने सीएनएन से कहा, कि जनरलों की योजना में गाजा से निकाले गए लोगों को उत्तरी गाजा में उनके घरों में वापस भेजने की बात नहीं कही गई है।

भले ही जनरलों की योजना को संशोधित कर दिया जाए ताकि भविष्य में गाजा के लोग अपने घरों को लौट सकें, लेकिन यह योजना अभी भी कारगर नहीं है, क्योंकि अंतरिम अवधि में भी उनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस) में इजराइल और पश्चिम एशियाई मामलों के जानकार मोहयम्मद मुदस्सिर कमर कहते हैं, "भले ही आप आतंकवादियों को भूखा रखकर या नागरिकों को जाने देने के बाद उन पर बमबारी करके हमास को बाहर निकालना चाहें, लेकिन गाजा के भीतर उनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है। बाहरी तौर पर, मिस्र उन्हें नहीं लेगा और इजराइल के पास उन्हें लेने का कोई मतलब नहीं है। इसलिए, भौगोलिक रूप से, फिलिस्तीनी नागरिकों के पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है।"

वहीं, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में रणनीतिक अध्ययन कार्यक्रम के उप निदेशक कबीर तनेजा का कहना है, कि "भले ही इस तरह की निकासी सफल हो और बफर जोन वास्तव में बनाए जाएं और वापस लौटने पर कोई औपचारिक बाधा न हो, लेकिन पूरी संभावना है कि हमले के बाद शहर पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे, वो निर्जन बन जाएंगे, जैसा कि सीरिया में हुआ है।"

तनेजा कहते हैं, कि "सीरिया में युद्ध से तबाह हुए शहर अब भी मुश्किल से ही आबाद हैं, जो दर्शाता है कि ऐसे बफर जोन बनाने से आबादी स्थायी रूप से या कम से कम लंबे समय के लिए विस्थापित हो सकती है।"

तनेजा कहते हैं, "अभी जिस रणनीति का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसमें ऐसे बफर जोन बनाना शामिल है, जहां कोई आबादी नहीं है। या तो आप उन्हें जाने का आदेश देते हैं या फिर आप उस जगह पर इतनी बमबारी करते हैं, कि आबादी मजबूरन वहां से चली जाती है। हमने सीरिया में पहले भी ऐसा देखा है, जहां संघर्ष खत्म होने के बाद लोगों के पास लौटने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा था। अलेप्पो जैसे शहर अभी भी तबाह हैं और वहां मुश्किल से ही कोई आबादी बची है।"

तनेजा कहते हैं कि सीरियाई लोगों की तुलना में घेराबंदी का सामना कर रहे फिलिस्तीनियों की हालत बदतर है।

उन्होंने फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट में कहा है, कि "सीरिया में जो विस्थापन हुआ वह बहुत तीव्र था, लेकिन निश्चित रूप से सीरियाई लोगों के पास भौगोलिक गहराई थी, जहां लोग भाग सकते थे। फिलिस्तीनियों के पास गाजा या पड़ोस में कहीं भी जाने के लिए कोई जगह नहीं है। मिस्र के लोग उनमें से किसी को भी अपने यहां नहीं रखना चाहते हैं। वे अन्य स्थानों से घिरे हुए हैं, जहा वे नहीं जा सकते। इसलिए, उनके लिए यह लगभग मौत के लिए नियत होने जैसा है। मुझे अब विशेष रूप से यकीन नहीं है, कि इजराइल की दीर्घकालिक रणनीति क्या है।"

Israel siege north Gaza

गाजा पट्टी को हमेशा के लिए तबाह कर देगा इजराइल?

सभी रिपोर्टों के मुताबिक, ऐसा मालूम होता है कि इजराइल, पहले से ही जनरलों की योजना को आंशिक रूप से लागू कर रहा है। हालांकि, नए सिरे से निकासी के आदेश दिए जाने के बावजूद, इस बात की बहुत कम पुष्टि है, कि योजना के सबसे विवादास्पद हिस्सों को लागू किया जा रहा है, जैसे कि उत्तरी गाजा से फिलिस्तीनियों का स्थायी निष्कासन या पूरी तरह से घेराबंदी और बचे हुए सभी लोगों से एकसमान लड़ाकों जैसा व्यवहार।

इजरायल और मध्य पूर्वी मामलों के एक अमेरिकी-आधारित विश्लेषक, शाएल बेन-एप्रैम ने फर्स्टपोस्ट को बताया, कि आइलैंड योजना का एक संक्षिप्त संस्करण वास्तव में एक व्यावहारिक रणनीति हो सकती है - अगर सही राजनीतिक कदमों के साथ मेल खाता है।

उन्होंने कहा, कि "पहली बार है, जब नेतन्याहू के पास युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी तरह की रणनीति है। एक बार नागरिक चले जाएं, तो सेना गाजा के उन प्रमुख शहरों की घेराबंदी करेगी, जहां हमास ने खुद को फिर से बसाया है। घेराबंदी को लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ अभियान के साथ समन्वित किया जाएगा। घेराबंदी तीन सप्ताह तक चलने की उम्मीद है। विचार यह है, कि हमास को बंधक सौदे के लिए बातचीत की मेज पर लाया जाए, ताकि इजराइल को कुछ लाभ मिल सके। घेराबंदी में किसी भी सैन्य सफलता को किसी भी वास्तविक लाभ को प्राप्त करने के लिए उचित राजनीतिक कदमों से मेल खाना होगा।"

हालांकि, नेतन्याहू ने अब तक संघर्ष में ज्यादातर क्रूर बल पर भरोसा किया है और बातचीत को मुश्किल से ही मौका दिया है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर इजराइल इस प्लान के साथ आगे बढ़ा, तो गाजा से लोगों का जिंदा निकलना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

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