Analysis: बंधकों की हत्या के बाद इजराइल में उबाल, प्रधानमंत्री की माफी, नेतन्याहू की सरकार क्यों गिर सकती है?
Israel Protest: गाजा में आतंकवादी संगठन हमास की कैद में 6 इजराइली बंधकों की हत्या ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को मुश्किल में डाल दिया है और अब इजराइल एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहां व्यापक विरोध प्रदर्शन और मजदूरों की हड़ताल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।
पिछले कई महीनों से अशांति बढ़ती जा रही है, जो गाजा से बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने में नेतन्याहू की नाकामी से असंतोष की वजह से उपजी है। इस स्थिति का फायदा हमास नेता याह्या सिनवार उठा रहा है, और उसका मकसद इजराइल को एक विद्रोह में झोंककर राजनीतिक तौर पर उसे कमजोर करना है।

इजराइली सरकार के अंदर गहरे हुए मतभेद
इजराइल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू की वार्ता रणनीतियों की खुलेआम आलोचना की है, जिससे सरकार के भीतर मतभेद और गहरा गए हैं। नेतन्याहू के गठबंधन मंत्रिमंडल में अति-दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी शामिल हैं, जो धमकी देते हैं, कि अगर उन्होंने हमास के प्रति कोई नरमी दिखाई, तो वे सरकार को गिरा देंगे। ये राष्ट्रवादी चल रहे विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों को दबाने की कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन इससे प्रदर्शन की आग और धधकती जा रही है।
नेतन्याहू के प्रशासन में आंतरिक कलह भी खुलकर बाहर आ गई है, क्योंकि रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने उनकी रणनीति की निंदा की है। यह आलोचना सरकार में बढ़ती दरार को उजागर करती है, जिससे हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के साथ कई संघर्षों के बीच नेतन्याहू के लिए देश पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो गया है और यही वजह है, उन्होंने बंधकों की हत्या के बाद माफी मांगकर देश के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश की है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू स्थिति को अच्छी तरह से समझ रहे हैं, लेकिन उनके पास विकल्प सीमित हैं।
उथल-पुथल के बावजूद, कई इजराइली इस बात को लेकर संशय में हैं, कि विरोध प्रदर्शन नेतन्याहू के रुख को प्रभावित करेगा या नहीं। और इस बात को लेकर संदेह बना हुआ है, कि क्या इन कार्रवाइयों से नेतन्याहू की नीतियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।

इजराइल में सरकार के खिलाफ गुस्से की आग
कई महीनों से हमास के कैद में बंधक और धीरे धीरे उनकी मौतों ने राष्ट्र का दिल का दर्द, हताशा और गुस्सा नेतन्याहू की सरकार की तरफ कर दिया है। वो तो बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक कौशल है, जिसने उन्हें अब तक सत्ता में बनाए रखा है, लेकिन असंतोष की यह लहर उनकी सत्ता को उखाड़ फेंक सकता है।
नेतन्याहू को न केवल उदारवादी गुटों से बल्कि याह्या सिनवार से भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हमास ने फिर से एक बार धमकी दी है, कि अगर इजराइल पीछे नहीं हटता है, तो सभी बधकों के शव इजराइल जाएंगे। और इस आंतरिक और बाहरी विरोधियों के दोहरा दबाव ने नेतन्याहू की स्थिति को और जटिल बना देता है।

इजरायल के लिए स्थिति खराब होती दिख रही है, क्योंकि बंधकों के मुद्दे पर बातचीत में सफलता की उम्मीदें नेतन्याहू की राजनीतिक संभावनाओं के साथ कम होती जा रही हैं। प्रदर्शनकारियों और श्रमिक संघों के बीच एकता से ऐसी आशंका ब रही है, कि बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार गिर सकती है।
संक्षेप में समझें, तो इजरायल एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है, जहां बढ़ते विरोध प्रदर्शन और हमले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं, जबकि सरकार में आंतरिक कलह और हमास से बाहरी खतरे हैं। देश का भविष्य उसके नागरिकों की बहादुरी और प्रतिकूल परिस्थितियों के खिलाफ एकजुट होने की उनकी क्षमता पर टिका है।












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