F-15EXl: 29,500 पाउंड हथियारों के साथ इजराइली F-15EX जेट्स तैयार, बस आखिरी इशारे का इंतजार, ईरान में तबाही तय?
Israel Retaliation Against Iran: आज से करीब 75 साल पहले जब यहूदी राष्ट्र इजराइल का जन्म हुआ था, तो तुर्की और ईरान वो पहले दो देश थे, जिन्होंने उसे राज्य के तौर पर मान्यता दिया था। लेकिन, अब ये दोनों देश एक दूसरे के जानी दुश्मन बन चुके हैं।
ईरान ने शनिवार देर रात करीब 5 घंटों तक इजराइल पर हमले किए और करीब 300 मिसाइल और ड्रोनों के साथ यहूदी देश को निशाना बनाया। हालांकि, इजराइल ने दावा किया है, कि इनमें से करीब 90 प्रतिशत मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराया गया।

लेकिन, अब बारी इजराइल की है और इजराइली नेताओं के बयानों से लगता है, कि ईरान के जवाब के खिलाफ इजराइल का भी जवाब होकर रहेगा।
ईरान ने दी थी सबसे पहले इजराइल का मान्यता
दरअसल, शाह के शासनकाल तक, ईरान-इजराइल संबंध सौहार्दपूर्ण थे। लेकिन 1979 में अयातुल्ला खुमैनी के ईरान पर कब्जे ने सब कुछ बदल दिया। ईरान का मानना है, कि इजराइल को अस्तित्व में रहने का कोई अधिकार नहीं है। ईरान और इजराइल के बीच दुश्मनी बढ़ती रही और संयुक्त राज्य अमेरिका के इजराइल के खुले समर्थन ने इस दुश्मनी को और भी बदतर बना दिया।
कुछ दिन पहले दमिश्क में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर इजराइल के हमले ने इस तनाव को काफी भड़का दिया और उसी का जवाब देने के लिए 14 अप्रैल 2024 को देर रात ईरानी ड्रोन और मिसाइलों ने इजरायली ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की। हालांकि, इस हमले में इजराइल में कोई हताहत नहीं हुआ और उसके एक एयरबेस को थोड़ा नुकसान पहुंचा है।
हालांकि, ईरान ने जिन मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया था, उससे यही पता चलता है, कि ईरान का इरादा इजराइल को नुकसान पहुंचाने का नहीं था।
हालांकि, बाइडेन प्रशासन ने इजराइल का पूर्ण समर्थन करने का वादा किया है, लेकिन अमेरिका ने ये भी साफ कर दिया है, कि अगर इजराइल, ईरान पर हमले करता है, तो वो साफ नहीं देगा।
लेकिन, इन सबके बीच ऐसी रिपोर्ट है, कि इजराइल ने अकेले दम पर इस हमले का जवाब देने का मन बना लिया है और इजराइली एयरफोर्स पूरी ताकत के साथ ईरान पर हमला करने के लिए तैयार है। माना जा रहा है, कि इजराइली एयरफोर्स, ईरान के कई ठिकानों पर हमले कर सकती है।
ईरान के खिलाफ इराक जैसा ऑपरेशन?
इससे पहले, 1981 में ऑपरेशन ओपेरा के बाद इजराइल ने बगदाद के बाहरी इलाके में ओसिरक इराकी परमाणु रिएक्टर को नष्ट कर दिया था। उस मिशन को चार एफ-15 के साथ आठ एफ-16 लड़ाकू विमानों ने पूरा किया था। सितंबर 2007 में इजराइल एयरफोर्स (IAF) ने ऑपरेशन ऑर्चर्ड मिशन के तहत सीरियाई परमाणु रिएक्टर को भी भीषण बमबारी में नष्ट कर दिया था।
हालांकि, अभी तक इजराइली वायुसेना ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमला करने की किसी योजना की घोषणा नहीं की है, लेकिन उसने हाल ही में ऐसे हमले करने के लिए बड़े पैमाने पर अभ्यास किया है। इस अभ्यास के दौरान इजराइली F-35 अदिर विमान ने ईरानी एयर डिफेंस को भेदने के लिए जोरदार अभ्यास किया है।
इजराइल के पास क्या-क्या ऑप्शन हैं?
अमेरिका के इनकार के बावजूद, इजराइल रणनीतिक महत्व वाले ईरानी लक्ष्यों पर जवाबी हमला करने के लिए सक्रिय तौर पर विचार कर रहा है। जब से ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता विकसित करने में अच्छी खासी प्रगति की है, इजराइल ने हमेशा फोर्डो और नटानज में प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर हमला करने पर विचार किया है, जो इजराइल का एकमात्र रणनीतिक मूल्य लक्ष्य है।
अगर इजराइल, ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह कर देते है, तो ईरान का परमाणु कार्यक्रम कम से कम 50 साल पीछे चला जाएगा या शायद उसके उसके लिए न्यूक्लियर बम बनाना नामुमकिन हो जाए। ईरान अब करीब एक साल के अंदर परमाणु बम तैयार कर लेगा, ऐसा संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है।
इजरायली वायु सेना ने इराकी और सीरियाई परमाणु सुविधाओं को नष्ट कर इजरायल के संकल्प को सुनिश्चित किया है, कि जो देश इजरायल को एक राष्ट्र-राज्य के रूप में मान्यता नहीं देते हैं, उन्हें परमाणु हथियार विकसित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
तो क्या ईरान भी इजराइल की हिट लिस्ट में है? बिल्कुल। लेकिन, ईरानी के ठिकानों पर हमला करना इजराइल के लिए उतना आसान नहीं है, जिसका इराक और सीरिया में हमला करना था। इसके पीछे कुछ बड़ी वजहें हैं।
1- सबसे पहले, ईरानी परमाणु सुविधाएं कम से कम पांच अलग अलग स्थानों पर बनाए गये हैं, वो भी अलग अलग पहाड़ियों पर। लिहाजा, अगर ईरान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट करना है, तो पांचों ठिकानों पर हमला करना होगा। और ये पांच वो ठिकाने हैं, जो ज्ञात हैं। हो सकता है, कुछ अज्ञात ठिकाने भी हों।
2- इजराइल से ईरान के परमाणु स्थलों तक सीधी उड़ान के लिए भी इजराइली फाइटर जेट्स को हवा में ईंधन भरने या फिर ईंधन भरने के लिए किसी और जगह पर रुकने की जरूरत होगी।
लेकिन, इजराइल के पास एक ऐसा लड़ाकू विमान है, जो इस मिशन को अंजाम दे सकता है और वो है F-15।

इजराइल के लिए मिशन को अंजाम देना कितना मुश्किल?
-हथियार प्लेटफॉर्म
F-15 ईगल लड़ाकू विमान जब तक अमेरिकी वायुसेना का फ्रंट लाइन फाइटर जेट था, तब इसकी कुछ खास चर्चा नहीं हुई थी, जिसका वो हकदार था। F-15 का एक नया 'AVTAR' जिसे F-15EX कहा जाता है, वो एडवांस एवियोनिक्स, ECM/ECCM सुइट और शक्तिशाली AESA रडार के साथ पहले से ही प्रोडक्शन में है।
हालांकि, F-15EX में सबसे आश्चर्यजनक बदलाव इसकी हथियार ले जाने की क्षमता में किया गया विस्तार है। बोइंग के मुताबिक, F-15 EX भारी भरकम 29,500 पाउंड हथियार ले जाने में सक्षम है। यदि दावा सही है, तो यह दुनिया में कहीं भी किसी भी लड़ाकू विमान द्वारा उठाया गया सबसे ज्यादा हथियार होगा।
F-15 लड़ाकू विमान के इस नये वेरिएंट का अब इजराइल इस्तेमाल कर रहा है और वो पहले ही F-15EX और F-35A हासिल कर चुका है। F-15EX के अधिग्रहण ने इजराइल को ईरान के परमाणु रिएक्टर पर हमला करने के काबिल बना दिया है।
इजरायली वायु सेना ने अमेरिका से खरीदे हुए अपने हर हथियार प्लेटफॉर्म को ट्रांसफॉर्म किया है और इसे और भी ज्यादा खतरनाक बना दिया है। जैसे, F-15 स्ट्राइक ईगल को एडवांस कर इजराइल ने F-15I Ra'am (थंडर) कहा जाता है।
इजराइल अपने इस लड़ाकू विमान को रणनीतिक विमान मानता है। हालांकि, ये 30 हजार पाउंड का GBU-57 नहीं ले जा सकता, जो सटीक नेविगेशन वाला सबसे भारी हथियार है।
माना जाता है कि F-15EX लगभग 80,000 पाउंड के अधिकतम भार के साथ उड़ान भरने में सक्षम है। F-15 का खाली वजन लगभग 32,000 पाउंड है, लिहाजा ईंधन और हथियारों के लिए करीब 48,000 पाउंड उपलब्ध है।
क्या अमेरिका करेगा इजराइल की मदद?
अमेरिका ने हमेशा से इजराइल की मदद की है और ऐसे ऐसे हथियार दिए हैं, जो अमेरिका, किसी को नहीं देता है। अमेरिका के पास ऐसे हथियार हैं, जो गहरे पहाड़ों में स्थित ईरान की परमाणु सुविधाओं को प्रभावी ढंग से तबाह कर सकता है। लेकिन, अमेरिका ने इजराइल को संघर्ष न बढ़ाने की सलाह दी है।
GBU-57, जिसे मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) भी कहा जाता है, और जिसे अमेरिका ने साल 2000 की शुरुआत में विकसित किया था, वो इस वक्त दुनिया का सबसे शक्तिशाली बंकर-विस्फोट हथियार है।
अमेरिकी एयरफोर्स के पास बंकरों को उड़ाने वाला एक और हथियार है, जिसे ग्लोबल प्रिसिजन अटैक वेपन (GPAW) कहा जाता है, जिसे यूएसएएफ के भविष्य के बमवर्षक बी-21 के लिए विकसित किया जा रहा है, जो चालू होने से कुछ साल दूर है।
GPAW उसी का एक प्रोडक्ट है, जिसे यूएस एयरफोर्स, नेक्स्ट जेनरेशन पेनेट्रेटर (NGP) कहता है। एनजीपी के आकार और वजन दोनों में बहुत छोटा होने की उम्मीद है (जीबीयू-57 का एक तिहाई), और इसे एफ-35 पर लोड किया जा सकता है।
यदि, अमेरिका ये इजराइल को दे देता है, तो इजराइल के पास GBU-57 को गिराने का एक और विकल्प हो सकता है। इजराइल इसे संशोधित C-130 विमान से ड्रॉप कर सकता है। 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अफगानिस्तान में नंगरहार प्रांत के अचिन जिले में स्थित आईएसआईएस सुरंगों पर हमला करने के लिए इसके इस्तेमाल की इजाजत दी थी।
इस हथियार को अमेरिका ने C-130 के संशोधित विमाम MC-130 से गिराया था, जो करीब 22,000 पाउंड वजन का जीबीयू-43 मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (एमओएबी) ले गया था। लिहाजा, सवाल ये है, कि क्या इजराइल ऐसे हाल में ईरान पर हमला करने का जोखिम उठा पाएगा, वो भी बगैर अमेरिकी मदद के?












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