Israel-Hamas war: ना झुकेगा हमास, ना रूकेगा इजराइल... कहां जाएगी गाजा की ये लड़ाई, जानें क्या हो सकता है?
Israel-Hamas war: शनिवार (28 अक्टूबर) को इजरायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया, कि इजराइली सेना ने गाजा में जमीनी सेना भेजकर, जमीन, हवा और समुद्र से हमले तेज करके युद्ध का "दूसरा चरण" शुरू कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के आह्वान और नागरिकों की मौतों की बढ़ती संख्या के बावजूद, युद्धविराम कहीं नज़र नहीं आ रहा है।
इजराइल को आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग करने के नाम पर, समर्थन देने का वादा करते हुए, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तेल अवीव से अपने गुस्से को कंट्रोल में रखने का आह्वान किया था। पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इजराइल की यात्रा की थी, जहां उन्होंने 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजराइल पर किए गये हमास के आतंकी हमले की तुलना, अमेरिका में अलकायदा के 9/11 के हमलों से की थी।

हमास के हमले में इजराइल के करीब 1400 लोग मारे गये हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजराइल से कहा, कि अमेरिका पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ी, लेकिन इस लड़ाई में अमेरिका ने कई गलतियां भी कीं।
लिहाजा, जिस बैकग्राउंड में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यह बयान दिया, उसके तात्कालिक तौर पर दो संदर्भ हो सकता है। पहला ये, कि उस वक्त तक इजराइल ने 10 दिनों तक गाजा पट्टी की पूरी तरह से घेराबंदी कर रखी थी और गाजा पट्टी में कोई भी राहत सामग्री नहीं जा पा रही थी, जिसमें पानी के साथ साथ दवाइयां भी शामिल थीं। जो बाइडेन चाहते थे, कि इजराइल घेराबंदी को खत्म करे, ताकि मानवीय सहायता गाजा पट्टी में पहुंच सके।
बाइडेन जानते थे, कि स्थिति भयावह होने पर क्षेत्रीय संघर्ष फैलन का खतरा है और अमेरिका इस वक्त दो-दो युद्ध में शामिल होने का जोखिम नहीं ले सकता है। यूक्रेन युद्ध की वजह से पहले ही उसका शस्त्रागार काफी कम हो चुका है।
वहीं, दूसरा बैकग्राउंड ये, कि इजराइल को "संघर्ष के बाद के चरण" से निपटने के बारे में कैसे जागरूक होना चाहिए। बाइडेन का मतलब इराक और अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी थी, जिसको लेकर अमेरिका को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा।

लेकिन, मौजूदा तनाव के बीच जिस सवाल का जवाब अभी भी सबसे महत्वपूर्ण है, वह यह है, कि अगर इजराइल अपनी बात पर अमल करता है और हमास को खत्म कर देता है, तो गाजा में क्या होगा? यह कट्टरपंथी इस्लामी संगठन एक लोकप्रिय जनादेश जीतने के बाद गाजा में सत्ता में आया था और इसे प्रतिद्वंद्वी फतह पार्टी (फिलिस्तीनी राजनीति में अन्य प्रमुख राजनीतिक शक्ति जो कि कुछ हिस्सों का प्रशासन प्रभारी है) की तुलना में फिलिस्तीनी-प्रशासित परिक्षेत्रों के भीतर कहीं अधिक वैधता दिखाई देती है।
क्या गाजा में हमास के बाद के के हालात पर विचार किया गया है? जाहिर है, नहीं!
अगस्त 2005 में इजराइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री एरियल शेरोन ने डिसइंगेजमेंट प्लान इम्प्लिमेंटेशन लॉ पास किया था और गाजा पट्टी से इजराइली सेना वापस आ गई थी। जिसके बाद गाजा पट्टी में चुनाव हुए और हमास ने जीत हासिल की।
लिहाजा, विश्लेषकों का कहना है, कि मौजूदा संघर्ष समाप्त होने के बाद इस बात की बहुत कम संभावना है, कि तेल अवीव उस प्रांत में प्रशासनिक भूमिका में वापस आना चाहेगा, जहां 7 अक्टूबर की लड़ाई शुरू होने से पहले 2.2 मिलियन फिलिस्तीनियों को 360 वर्ग किमी के इलाके में पैक किया गया था।
यानि, इजराइल फिर से गाजा पट्टी को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश नहीं करेगा, क्योंकि इसके लिए इजराइल ना ही आर्थिक तौर पर और ना सैन्य तौर पर तैयार है। गाजा पट्टी पर नियंत्रण कर शासन चलाने का मतलब है, बेहिसाब लोगों का दमन और बेहिसाब खर्च, जिसके लिए इजराइल तैयार होना नहीं चाहेगा।

मौजूदा संघर्ष समाप्त होने पर क्या हो सकता है?
जनरल डेविड पेट्रियस, पूर्व सीआईए निदेशक और इराक और अफगानिस्तान दोनों में शीर्ष अमेरिकी जनरल, से जब बाइडेन के बयान के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्वीकार किया, कि अमेरिका ने 9/11 के हमले के मद्देनजर संघर्ष के बाद के चरण की योजना बनाने में गलतियां कीं और उन्होंने कहा, कि इजराइल संभावित रूप से गाजा में इसी तरह की गलतियां कर रहा है।
'कॉन्फ्लिक्ट: द इवोल्यूशन ऑफ वारफेयर फ्रॉम 1945 टू यूक्रेन' के सह-लेखक पेट्रियस ने कहा, कि संघर्ष के बाद की रणनीति पर ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इजरायल हमास आतंकवादी समूह को नष्ट करने के अपने "बहुत चुनौतीपूर्ण मिशन" पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, कि "इसके लिए एक दृष्टिकोण होना चाहिए। मुझे लगता है, कि प्रधान मंत्री नेतन्याहू को सलाह दी जाएगी, कि वे न केवल यह कहें, कि वे हमास के साथ क्या करने की कोशिश करने जा रहे हैं, बल्कि वास्तविक रूप से... गाजा के भविष्य के बारे में भी बात करें, यहां तक कि संघर्ष के बाद फिलिस्तीनी लोगों के लिए एक दृष्टिकोण के बारे में भी बात करें।"
पेट्रियस ने कहा, कि "निश्चित तौर पर यह योजना बनाना महत्वपूर्ण है, संघर्ष के बाद क्या होगा... गाजा में और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के लिए हमास के खत्म होने का मतलब कैसा होगा, इसकी भी पहले से घोषणा की जानी चाहिए।" उन्होंने कहा, हमास और उनके आतंकवादी सहयोगियों, इस्लामिक जिहाद के विनाश के बाद कैसी स्थिति बनेगी, इजराइल को इसके बारे में भी बात करनी चाहिए।
गाजा के लिए संघर्ष के बाद की योजना के अलावा, मौजूदा सैन्य संघर्ष के परिणाम इस क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिए गंभीर आर्थिक परिणाम ला सकते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी होगा असर
इजराइल और हमास के बीच का संघर्ष अगर फैलता है, या लंबे समय तक जारी रहता है, तो निश्चित पर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इससे बुरा कुछ और नहीं हो सकता है। दुनिया पहले से ही कोविड महामारी और यूक्रेन युद्ध के झटके में फंसा हुआ है।
कोविड महामारीा और महंगाई ने अभी भी दुनिया को परेशान कर रखा है और इस आग में इजराइल-हमास युद्ध पेट्रोल डालने का काम करेगा।
ऐसे समय में, जब भारत सहित दुनिया भर के केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति कम करने की रणनीतियों से जूझ रहे हैं, तेल की ऊंची कीमतों की संभावना नीति निर्माताओं के लिए विकास-मुद्रास्फीति की गतिशीलता को पूरी तरह से उलट सकती है।
हालांकि, विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है, कि हमास-इजराइल संघर्ष में वृद्धि का प्रभाव पिछले अरब-इज़राइल युद्ध और उसके बाद के तेल प्रतिबंध जितना गंभीर नहीं होगा, क्योंकि इस समय अरब दुनिया साफ तौर पर विभाजित है और अमेरिका के पास तेल क्षमता वाले देशों में काफी प्रभाव है।
लेकिन, अगर युद्ध लंबा चला और फिलिस्तीनी पक्ष पर मानवीय संकट बढ़ गया, तो स्थिति खराब हो सकती है। 1973 में, एक तरफ इजराइल और दूसरी तरफ मिस्र और सीरिया के बीच योम किप्पुर युद्ध के दौरान, अरब राज्य पश्चिम में तेल की आपूर्ति को रोकने के अपने संकल्प में एकजुट हो गये थे, और यहां तक, कि भारत सहित पश्चिमी ब्लॉक के बाहर के देशों ने भी तेल की कीमतों में उछाल को लेकर संघर्ष किया था।
तो इस संभावना से इस बार भी इनकार नहीं किया जा सकता है, कि अगर युद्ध फैलता है, तो अरब देश एकजुट हो सकते हैं, लिहाजा इजराइल समेत दुनिया को इसके परिणाम के लिए तैयार रहना होगा।












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