गाजा पट्टी की लड़ाई में रूस की नकल कर रहा इजराइल, पुतिन की रणनीति से होगा हमास का सफाया?

Israel-Hamas War: इजराइली घातक मर्कवा युद्ध टैंकों को गाजा के आसपास डिप्लॉयमेंट प्वाइंट्स पर मेटल के बने पिंजरों के साथ देखा गया है और ये तरीका ठीक उसी तरह का है, जैसे रूसी टैंकों ने यूक्रेन में लड़ाई के दौरान अपने टैंकों को अमेरिकी हथियारों से बचाने के लिए उतारा था।

छतों पर टैकों की तैनाती से उनपर ड्रोन हमले होने या फिर विस्फोटक और हथगोलों से होने वाले हमले की आशंका काफी कम हो जाती है और हैच लगने की वजह से ज्यादातर वक्त विस्फोटक टैंक के पास नहीं गिरते हैं।

7 अक्टूबर को हमास ने हमले के दौरान इजराइल के एक मर्कवा-4 टैंक को नष्ट कर दिया गया था और वीडियो फूटेज में देखा गया था, कि हमास के आतंकी दो विस्फोटों से इजराइली टैंक को नष्ट कर रहे हैं।

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लिहाजा, अपने टैंकों को बचाने के लिए इजराइल ने रूस की रणनीति को कॉपी किया है।

टैंकों की तैनाती से पता चलता है, कि गाजा में इजराइली ग्राउंड अटैक काफी जल्द होने वाला है और ऐसे में टैंकों की जरूरत काफी ज्यादा बढ़ जाएगी। हालांकि, गाजा पट्टी में ग्राउंड ऑपरेशन चलाना इजराइल के लिए काफी ज्यादा महंगा सौदा माना जा रहा है। वहीं, हमास ने चेतावनी दी है, कि ग्राउंड ऑपरेशन के खिलाफ वो गंभीर प्रतिक्रिया देगा, लेकिन उससे पहले इजराइली एयरफोर्स गाजा पट्टी पर लगातार बमबारी कर रही है।

गाजा में ग्राउंड ऑपरेशन के दौरान आशंका है, कि इजराइली डिफेंस फोर्स को काफी तगड़ा नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, माना जा रहा है कि ग्राउंड ऑपरेशन के दौरान कई और इस्लामिक आतंकी संगठनों का साथ हमास को मिल सकता है, जिसमें ईरान समर्थित हिजबुल्लाह प्रमुख है। लिहाजा, ऐसी स्थिति में ये युद्ध क्षेत्रीय युद्ध बन सकता है। लेकिन, अगर हमास को पूरी तरह से "नष्ट" करने के अपने लक्ष्य को हासिल करना है, तो यह इज़राइल के पास एकमात्र विकल्प युद्ध लड़ना ही है।

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पिंजरे में इजराइली टैंक

गेटी इमेजेज द्वारा जारी की गई तस्वीरों में स्टेजिंग जोन में मर्कवा-4 टैंक, 'नामेर' ट्रैक्ड इन्फैंट्री फाइटिंग व्हीकल्स (आईएफवी) और टैंक रिकवरी वाहनों के साथ एक बड़ा बख्तरबंद समूह दिखाया गया है। 6 मर्कवा-4 को बुर्ज हैच के ऊपर मेटल पिंजरों के साथ देखा जा सकता है। ये पिंजरे बुर्ज से पतली धातु की छड़ों द्वारा निर्मित हैं।

हालांकि, ऑनलाइन टिप्पणीकारों ने बताया है, कि हमास यूएवी ड्रोन से गिराए गए पीजी-7वीआर रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) राउंड का इस्तेमाल करता है। ये रूसी मूल के गोले विस्फोटक प्रतिक्रियाशील कवच (ईआरए) का मुकाबला करने के लिए समर्पित उच्च विस्फोटक एंटी-टैंक (हीट) रॉकेट हैं।

ईआरए में चौकोर या आयताकार आकार के विस्फोटक से भरे पैनल शामिल होते हैं, जो टैंक के बुर्ज और चेसिस के कमजोर हिस्सों को कवर करते हैं। लिहाजा, रॉकेट या बंदूक के गोले का वारहेड टैंक के मुख्य स्टील बॉडी से टकराने से पहले, समय से पहले फट जाता है।

लेकिन हमास, PG-7VR एक 'टेंडेम वॉरहेड' डिज़ाइन का उपयोग करता है, जहां रॉकेट छोटे चार्ज के साथ लंबा होता है, जिसके पीछे विस्फोटक लगा होता है। छोटा वारहेड ईआरए पैनल से टकराता है, जिससे यह निष्क्रिय हो जाता है, और उसके बाद रॉकेट के पीछे हिस्से में मौजूद विस्फोटक टैंक के अंदरूनी हिस्से से टकराता और टैंक तबाह हो जाता है। हमास ने एक इजराइली टैंक को ऐसे ही तबाह किया। साधारण शब्दों में समझें, तो हमास जिस रॉकेट को इस्तेमाल टैंकों के खिलाफ करता है, उसमें दो बार विस्फोट होता है।

वहीं, ईरान डिफेंस की पोस्ट से पता चलता है, कि पीजी-7वीआर को हमास ड्रोन से लंबवत गिराए जाने पर भी ठीक उसी तरह काम करना चाहिए। हमास के पास नियमित एटीजीएम की एक बड़ी लिस्ट भी है, लेकिन मर्कवा की ट्रॉफी एक्टिव-प्रोटेक्शन सिस्टम (एपीएस) से उनसे निपटने की उम्मीद की जा सकती है।

इसके अलावा, हमास के पास अन्य एटीजीएम भी हैं, जैसे रूसी निर्मित कोंकर, कोर्नर और उत्तर कोरियाई बुल्सए-2। लेकिन इनमें से किसी में भी 'टॉप-अटैक' मोड नहीं है, जहां मिसाइल लॉन्चर से निकलने के बाद ऊपर चढ़ती है और बुर्ज के सबसे कमजोर हिस्से, टैंक से टकराते हुए नीचे गोता लगाती है।

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इजराइली ग्राउंड ऑपरेशन से पहले हमास की तैयारी

हमास ने अपने लड़ाकों के लिए एक पैम्फलेट गाइडबुक प्रसारित की है, जो अलॉक्स और ट्रॉफी एपीएस का मुकाबला करने के लिए, उन्हें पराजित करने के लिए 45 मीटर से कई आरपीजी राउंड फायर करने की सलाह देती है। हालांकि, यह सफल होगा या नहीं यह तब देखा जाना बाकी है, क्योंकि हमास इसका इस्तेमाल तब शुरू करेगा, जब आईडीएफ अपना जमीनी अभियान शुरू करेगा।

यह कहा जा सकता है, कि दोनों पक्ष इस तरह के युद्ध की तैयारी कर रहे हैं, हमास ने शहरी वातावरण में लड़ाई करने के लिए भूमिगत सुरंगों का अपना रहस्यमयी नेटवर्क विकसित किया हुआ है। वहीं, IDF को भी हमास से लड़ने के लिए ही डिजाइन किया गया है, जिसमें शहरी लड़ाई पर काफी ज्यादा फोकस है।

लिहाजा, इजराइली डिफेंस फोर्स के लिए सबसे ज्यादा जरूरी हमास के सूरंगों को ध्वस्त करना है। इसके लिए इजराइल भी दो बार विस्फोट करने वाले मिसाइल का इस्तेमाल कर रहा है। इस मिसाइल का पहला विस्फोट नूकीला होता है, जिससे सूरंग में छेद हो जाता है और फिर दूसरे विस्फोट के लिए सूरंग तक पहुंचन का रास्ता साफ हो जाता है और फिर सूरंग के अंदर दूसरा विस्फोट होता है, जिससे जमीन के अंदर करीब 25 फीट तक का क्षेत्र ध्वस्त हो जाता है।

रूस ने अपनाया था ये तरकीब

अमेरिका निर्मित जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) को टैंक के शीर्ष भाग से टकराने से बचाने के लिए रूस ने पिंजरों का इस्तेमाल शुरू किया था, ताकि यह पिंजरे के संपर्क में आने पर फट जाए और टैंक को कम से कम नुकसान हो।

रूस ने पिंजरों का इस्तेमाल कर अपने कई टैंकों को ध्वस्त होने से बचाया है। हालांकि, उसके बाद भी ये पिंजरा तरीका उतना कामयाब नहीं हुआ, लेकिन ये प्रथा व्यापक हो गई है। यहां तक कि यूक्रेनी टैंक और सेल्फ-प्रोपेल्ड गन (एसपीजी) ने भी पिंजरा लगाना शुरू कर दिया, जो कुछ हद तक सफलता का संकेत देता है।

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