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फिलिस्तीन को लेकर मुश्किल में इजरायल, PM नेतन्याहू ने 'अपने दोस्त' भारत से मांगी मदद

Israel Asks Support From India: तेल अवीव। भारत का दोस्त देश इजरायल इस समय मुश्किल में फंस गया है। ये मुश्किल आई है इंटरनेशनल क्रिमिलन कोर्ट के एक फैसले के चलते जिसमें कोर्ट ने फिलिस्तीन को भी अपने अधिकार क्षेत्र में माना है। अतरराष्ट्रीय अदालत के इस फैसले का मतलब हुआ कि अब फिलिस्तीन के इलाके में इजरायल के ऊपर लगने वाले युद्ध अपराध के आरोपों की जांच की जा सकेगी। यही वजह है कि इजरायल ने अब अपने 'करीबी दोस्त' भारत से मदद की मांग की है।

भारत ने अभी तक नहीं दिया है जवाब

भारत ने अभी तक नहीं दिया है जवाब

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इजरायल चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत उसकी मदद करे। इस मामले में इजरायल ने भारत से अपील की है। खबर के मुताबिक अभी तक भारत ने इस बारे में कोई भी जवाब नहीं दिया है।

खबर के मुताबिक इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इजरायल ने फैसले को न्याय और सहज बुद्धि पर हमला बताते हुए भारत से फैसले के खिलाफ बोलने और आईसीसी को स्पष्ट संदेश देने की मांग की गई है।

भारत के पास ये पत्र अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले के दो दिन बाद 7 फरवरी को आया था लेकिन अभी तक भारत सरकार ने इसे लेकर कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि कूटनीतिक चैनलों के जरिए ये संदेश जरूर पहुंचा दिया गया है कि भारत इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की फाउंडिंग ट्रीटी 'रोम स्टेच्यू' का सदस्य नहीं है। इसलिए वह कोर्ट के फैसले को लेकर किसी का पक्ष नहीं ले सकता है और न ही किसी तरह की प्रतिक्रिया दे सकता है।

इजरायल ने ICC को कहा राजनीतिक संस्था

इजरायल ने ICC को कहा राजनीतिक संस्था

इजरायल खुद भी रोम स्टेच्यू का सदस्य नहीं है, उसने कोर्ट के फैसले को अपमानजनक बताते हुए इसकी निंदा की है। इजरायल ने कहा कि इस फैसले ने दिखा दिया है कि ये कोर्ट एक राजनीतिक संस्था है। इजरायल ने कहा कि आईसीसी के पास इस तरह का फैसला देने का कोई अधिकार नहीं है जबकि इजरायल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को नहीं मानता है और फिलिस्तीन प्राधिकरण कोई स्वतंत्र राष्ट्र नहीं है। नेतन्याहू ने इस फैसले को एंटीसेमिटिज्म की भावना से दिया बताया है।

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने 5 फरवरी को 2-1 से दिए अपने एक फैसले में फिलिस्तीन को कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में माना था। इसके लिए 2012 में संयुक्त राष्ट्र के गैर सदस्य पर्यवेक्षक राज्य के रूप में शामिल होने और 2015 में रोम स्टेच्यू के परिग्रहण को आधार बनाया था। कोर्ट ने हालांकि स्पष्ट किया है कि इस फैसले का फिलिस्तीन राज्य निर्धारण से कोई संबंध नहीं है। 14 महीने पहले आईसीसी प्रॉसीक्यूटर ने कहा था कि फिलिस्तीन क्षेत्र में गंभीर युद्ध अपराधों के सबूत मिले हैं।

भारत से क्यों है उम्मीद ?

भारत से क्यों है उम्मीद ?

इजरायल को उम्मीद है कि इंटरनेशनल क्रिमिलन कोर्ट के फैसले के खिलाफ उसे भारत से मदद मिल सकती है। इजरायल का सोचना है कि अगर इस तरह के फैसलों का विरोध नहीं किया जाता है तो कल को इस तरह का फैसला कश्मीर के मुद्दे पर भी आ सकता है जिससे भारत को परेशानी होगी। इजरायल का कहना है कि फैसले की तरफ से आंखे मूंद लेने से समस्या खत्म नहीं हो जाएगी।

वहीं भारत जो कि आईसीसी की स्थापना के समय से ही उसमें प्रमुख रोल निभाता रहा है अभी तक रोम स्टैच्यू संधि में शामिल नहीं हुआ है। भारत को आशंका है कि अगर वह इसमें शामिल होता है तो आईसीसी आगे चलकर कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट के मामलों को अपने अधिकार क्षेत्र में बता सकता है जिसे भारत अपना आंतरिक मामला बताता रहा है।

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