क्या अफ्रीकी महाद्वीप दो हिस्सों में बंट रहा है, अभी की स्थिति कैसी है? जानिए
एक विशाल दरार की वजह से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महादेश अफ्रीका अलग हो रहा है। इसकी वजह से बनते गड्ढे को ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट के तौर पर जाना जाता है। लेकिन, सवाल है कि क्या वाकई में इसकी वजह से ऐसा दिन आएगा कि अफ्रीका महाद्वीप पूरी तरह से दो या अधिक हिस्सों में अलग हो जाएगा।
लाइव साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन के अनुसार यह विशाल दरार धीरे-धीरे अफ्रीका को अलग कर रहा है। ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट 3,500 किलोमीटर में फैला घाटियों का नेटवर्क है।

टेक्टोनिक प्लेट की गतिविधियों की वजह ऐसा हो रहा है
यह नेटवर्क लाल सागर से लेकर मोजाम्बिक तक फैला हुआ है। सवाल यही है कि अगर दरार की वजह से अफ्रीकी महाद्वीप में दरार बढ़ रही है तो क्या इसके चलते अफ्रीका पूरी तरह से बंट जाएगा? और अगर ऐसा होता है तो इसमें कितना वक्त लगेगा? दरअसल, इस तरह की भूगर्भीय घटनाएं पृथ्वी के टेक्टोनिक प्लेट की गतिविधियों की वजह से होती हैं।
टेक्टोनिक प्लेट की गतिविधियों के चलते पहाड़ और घाटियां बनती हैं
जब धरती के अंदर टेक्टोनिक प्लेट आपस में टकराते हैं तो उससे पहाड़ों का भी निर्माण होता है और जब एक-दूसरे से दूर होते हैं तो विशाल घाटियां भी बनती हैं। भारत में हिमालय पर्वत पहले वाली स्थिति का सबसे युवा उदाहरण है। युवा इसलिए क्योंकि हिमालय के नीचे अभी भी भूगर्भीय घटनाएं जारी हैं।
अफ्रीका में दो टेक्टोनिक प्लेट एक-दूसरे से दूर हो रहे हैं
नासा की अर्थ ऑब्जर्वेटरी के मुताबिक अफ्रीका में जो कुछ हो रहा है, वह दूसरी वाली स्थिति की वजह से है। पूर्वी अफ्रीका में सोमालियाई टेक्टोनिक प्लेट महाद्वीप के विशाल और प्राचीन न्युबियन टेक्टोनिक प्लेट से खिंचकर पूरब की ओर छिटक रहा है। न्युबियन टेक्टोनिक प्लेट को कई बार अफ्रीकी प्लेट भी कहते हैं।
न्युबियन प्लेट उत्तर में अरेबियन प्लेट से भी अलग हो रही है
लेकिन, सोमालियाई और न्युबियन प्लेट उत्तर में अरेबियन प्लेट से भी अलग हो रहे हैं। जियोलॉजिकल सोसाइट ऑफ लंदन के मुताबिक इसकी वजह से इथियोपिया के दूरस्थ क्षेत्र में वाई आकार की दरार विकसित हो रही है।
3.5 करोड़ वर्ष पहले शुरू हुई थी दरार
न्यू ऑरलियन्स में तुलाने यूनिवर्सिटी के जियोलॉजी विभाग की चेयर और अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट में ब्यूरो ऑफ अफ्रीकन अफेयर्स की साइंस एडवाइजर सिंथिया एबिंगर ने बताया है कि अफ्रीकी महाद्वीप के पूरबी हिस्से में अरब और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के बीच दरार की शुरुआत करीब 3.5 करोड़ वर्ष पहले ही हो गई थी। यह दरार चौड़ी होती हुई 2.5 करोड़ साल पहले उत्तरी केन्या तक पहुंच गई।
लंदन जियोलॉजिकल सोसाइटी के अनुसार इसकी वजह से पृथ्वी की ऊपरी परत का समानांतर सेट तैयार हुआ है। पूरबी दरार इथियोपिया और केन्या से होकर गुजरी है और पश्चिमी दरार युगांडा से मलावी तक एक आर्क बनाती है। नासा की अर्थ ऑब्जर्वेटरी के अनुसार पूरबी हिस्सा बंजर है, जबकि पश्चमी कांगो के वर्षा वनों की सीमा पर है।
इस समय दरार पड़ने की रफ्तार बहुत ही कम है-वैज्ञानिक
हालांकि, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में पृथ्वी विज्ञान के प्रोफेसर एमेरिटस केन मैकडॉनल्ड के अनुसार 'इस समय दरार पड़ने की रफ्तार बहुत ही कम है......' वैज्ञानिकों के मुताबिक ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट की मुख्य वजह केन्या और इथियोपिया में अत्यधिक गर्मी है। इसकी वजह से पृथ्वी की ऊपरी सतह फैल और उठ रही है। इसकी वजह से इन क्षेत्रों में ज्वालामुखी भी सक्रिय होती रही हैं।
कितने हिस्सों में बंट सकता है अफ्रीका?
अफ्रीका की सबसे ऊंची पर्वत माउंट किलिमंजारो का निर्माण भी इसी वजह से हुआ है। अगर अफ्रीका में धरती के अंदर चल रही गतिविधियों की वजह से यह विभाजित होता है तो यह कितने हिस्सों में होगा, इसको लेकर स्पष्टता नहीं है।
'जरूरी नहीं कि यह दो हिस्सों में ही बंटे'
वैसे एक राय यह है कि यह जरूरी नहीं कि यह दो हिस्सों में ही बंटे। क्योंकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट का पूरबी हिस्सा अब निष्क्रिय हो चुका है। जबकि, पश्चिमी हिस्सा अभी भी सक्रिय है। एबिंगर कहती हैं कि 'निष्क्रिय दरारें दुनिया भर में महाद्वीपीय भूमि को चिन्हित करती हैं।'
मैकडॉनल्ड कहते हैं, 'हमें यह नहीं पता कि क्या यह दरार अपनी मौजूदा गति से जारी रहेगी और आखिरकार लाल सागर की तरह एक महासागर बेसिन में और फिर उसके बाद अटलांटिक महासागर के एक छोटे स्वरूप की तरह कुछ और बड़े में परिवर्तित हो जाएगी।' 'या फिर इसकी गति बढ़ जाएगी और यह सब बहुत जल्द हो जाएगा? या फिर पूरी तरह से ठप ही हो जाए?'
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