भारत में हिजाब के वकीलों देख लो! ईरानी नोबेल प्राइज विनर महिला ने जेल से शुरू किया भूख हड़ताल, जानें कौन हैं?
Narges Mohammadi: एक तरफ भारत में कुछ लोग मौजूद हैं, जो हिजाब की पैरवी करते हैं, जबकि ईरान की महिलाएं हिजाब के खिलाफ आंदोलन में अपनी जान भी दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटती हैं। ऐसी ही एक महिला हैं, नरगेस मोहम्मदी, जिन्होंने ईरान की इस्लामिक सरकार के खिलाफ जेल में भूख हड़ताल शुरू कर दिया है। ईरान जैसे देश में, जहां मानवाधिकारों की कोई हैसियत नहीं है, वहां नरगेस मोहम्मदी का भूख हड़ताल करना उनकी हिम्मत को दर्शाता है।
2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित 51 साल की सामाजिक कार्यकर्ता नरगेस मोहम्मदी ने मेडिकल देखभाल का लाभ नहीं उठा पाने के साथ-साथ देश के सख्त हिजाब नियमों के विरोध में सोमवार को ईरानी जेल में भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नरगेस मोहम्मदी, जो ईरानी जेल में बंद हैं, उनके हिजाब के खिलाफ और महिलाओं के अधिकार के लिए चलाए जा रहे अभियान की वजह से उन्हें जेल में काफी टॉर्चर किया जा रहा है और इसी के खिलाफ उन्होंने जेल से ही भूख हड़ताल शुरू कर दी है। नरगेस मोहम्मदी का मानना है, कि उनके भूख हड़ताल से ईरान की इस्लामिक सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। 51 साल की नरगेस मोहम्मदी, जेल में बंद उन कैदियों में शामिल हैं, जिन्हें जेल में चिकित्सा सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।
नरगेस मोहम्मदी की खराब है तबीयत
फ्री नरगेस मोहम्मदी अभियान चलाने वाले एक संगठन के मुताबिक, एविन जेल में बंद नरगेस मोहम्मदी ने संदेश भेजा है, कि उनके हृदय और फेफड़ों में दिक्कत है और उन्हें डॉक्टर की जरूरत है, लेकिन डॉक्टर की सुविधा नहीं मिलने के बाद उन्होंने भूख हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।
मोहम्मदी के परिवार ने कहा है, कि वह तीन नसों में रुकावट और फेफड़ों के दबाव से पीड़ित है, लेकिन हिजाब पहनने से इनकार करने पर जेल अधिकारियों ने उन्हें अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया।
उनके परिवार ने कहा, कि "नरगेस मोहम्मदी दो चीजों का विरोध कर रही हैं। वो बीमार कैदियों की देखभाल में होने वाली देरी और हिजाब पहनने की अनिवार्यता का विरोध कर रही हैं।" उनके परिवार ने कहा, कि "जेल प्रशासन उन्हें तभी अस्पताल ले जाएगा, जब वो हिबाज पहनकर जाने के लिए तैयार होंगी, लेकिन उन्होंने अस्पताल जाने के लिए हिजाब पहनने से इनकार कर दिया है।"
उनके परिवार ने कहा, कि, उनके सामने 'हिजाब' या 'मौत', किसी एक चीज को चुनने का शर्त रखा गया है।
नरगेस मोहम्मदी के परिवार ने जो बयान जारी किया है, उसमें कहा गया है, कि वो सिर्फ पानी, चीनी और नमक का सेवन कर रही हैं और उन्होंने दवा लेने से मना कर दिया है। परिवार ने कहा है, कि अगर मोहम्मदी के साथ कुछ भी भयावह हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक जिम्मेदार होगा।
इस बीच रिपोर्ट है, कि एक और महिला कार्यकर्ता नसरीन सोतौदेह, जिन्हें अर्मिता गेरावंड के अंतिम संस्कार में शामिल होने पर गिरफ्तार किया गया था, उनकी भी जेल में तबीयत काफी खराब है और उन्हें भी चिकित्स देखभाल की सख्त जरूरत है, लेकिन उन्हें भी डॉक्टरी सुविधा उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है। आपको बता दें, कि अर्मिता गेरावंड 17 साल की लड़की थीं, जिसे तेहरान में सही से हिजाब नहीं पहनने पर ईरान की मोरल पुलिस ने मारपीट की थी, उनके सिर को मेट्रो स्टेशन की दिवारों पर मारा गया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
नोबेल कमेटी ने क्या कहा?
नॉर्वेजियन नोबेल समिति, जिसने मोहम्मदी को शांति पुरस्कार से सम्मानित किया है, उसने कहा, कि वह उनके स्वास्थ्य के बारे में "गहराई से चिंतित" है।
बयान में कहा गया है, "नरगेस मोहम्मदी द्वारा भूख हड़ताल शुरू करना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने ईरानी अधिकारियों से नरगेस मोहम्मदी और अन्य महिला कैदियों को, जिन्हें भी चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है, उन्हें प्रदान करने का आग्रह किया है।"
आपको बता दें, कि ईरान की इस्लामिक सरकार ने हिजाब पहनना अनिवार्य कर रखा है, जिसके खिलाफ सैकड़ों महिला कार्यकर्ता आवाज उठा रही हैं, जिन्हें जेल में बंद रखा गया है।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने इस मामले में किसी भी सवाल का उत्तर नहीं दिया है।
नरगेस मोहम्मदी को साल 2023 में ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ लड़ने और सभी के लिए मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मोहम्मदी को पिछले साल नवंबर में उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब वह 2019 में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मारी गईं एक पीड़ित के सम्मान में बनाए गये स्मारक कार्यक्रम में शामिल हुई थीं।
2003 में मानवाधिकार कार्यकर्ता शिरीन इबादी के बाद नरगेस मोहम्मदी, नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली दूसरी ईरानी महिला और कुल मिलाकर 19वीं महिला बनीं। वह इबादी द्वारा स्थापित ईरान में प्रतिबंधित डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर की उपाध्यक्ष थीं।
ईरान का सख्त हिजाब कानून
ईरान में काफी सख्त हिजाब कानून है और हिजाब कानून का पालन करवाने के लिए ईरान में मोरल पुलिस का निर्माण किया गया है, जो हिजाब नहीं पहनने पर महिलाओं और लड़कियों को गिरफ्तार करती है।
पिछले साल सितंबर में ईरान में 23 साल की कुर्द लड़की महसा अमीनी को भी सही तरीके से हिजाब नहीं पहनने की वजह से गिरफ्तार किया गया था और पुलिस हिरासत में उनकी जमकर पिटाई की गई थी, जिसकी वजह से अस्पताल में उनकी मौत हो गई। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में प्रदर्शन शुरू हो गया और विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से प्रदर्शनों में कम से कम 529 लोग मारे गए हैं।
पिछले साल सितंबर से अभी तक 19,700 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
हालांकि, भारी विरोध प्रदर्शन के बाद भी ईरानी अधिकारियों ने किसी भी कानून में बदलाव नहीं किया और देश में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने के लिए पश्चिम पर आरोप लगाया। ईरानी सरकार ने सितंबर में एक 'हिजाब विधेयक' पारित किया था, जिसमें हिजाब नियमों का उल्लंघन करने वाली महिलाओं पर 10 साल की जेल के साथ साथ काफी कठोर दंड लगाया गया।












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