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Iran US Tension: अमेरिकी डर या सोची-समझी चाल? वो 5 कारण, ईरानी राष्ट्रपति ने क्यों कहा- हमें परमाणु नहीं चाहिए

Iran US Tension: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का हालिया बयान अंतरराष्ट्रीय गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने बड़े ही सीधे और कुछ हद तक हताश लहजे में दुनिया से पूछा, हम किस भाषा में कहें कि हमें परमाणु बम नहीं चाहिए? यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब मध्य-पूर्व में बारूद की गंध तेज़ हो गई है।

पिछले 24 घंटों में अमेरिका ने क्षेत्र में 50 से ज़्यादा आधुनिक फाइटर जेट्स और एयर रिफ्यूलिंग टैंकर्स तैनात कर दिए हैं, जो एक लंबी जंग की तैयारी का साफ संकेत देते हैं। एक तरफ जिनेवा में परमाणु कार्यक्रम को लेकर 'सकारात्मक' बातचीत का दावा किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ आसमान में गरजते युद्धक विमान ईरान पर दबाव बनाने की 'कैरेट एंड स्टिक' नीति का हिस्सा हैं।

Iran US Tension

World News Hindi: ईरान के राष्ट्रपति ने क्या कहा?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने जिनेवा में अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत के बीच एक बहुत ही भावुक और सीधा बयान दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शंकाओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा, 'हम किस भाषा में कहें कि हमें परमाणु हथियार नहीं चाहिए, और हम कभी इन्हें नहीं चाहेंगे? अगर दुनिया वास्तव में यह चाहती है कि ईरान के पास न्यूक्लियर वेपन न हों, तो हम उनके किसी भी तरह के 'वेरिफिकेशन' (जांच) के लिए पूरी तरह तैयार हैं।'

पेज़ेशकियन ने स्पष्ट किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों (चिकित्सा और तकनीक) के लिए है। उन्होंने इसे एक "राजनीतिक प्रोपेगेंडा" करार दिया कि ईरान बम बनाना चाहता है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को अपने परमाणु केंद्रों की जांच करने की अनुमति देने में कोई संकोच नहीं करेंगे, ताकि दुनिया को उनकी ईमानदारी पर भरोसा हो सके।

ये भी पढ़ें: US Iran Tension: मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट? अमेरिका ने रातों-रात भेजे 50 फाइटर जेट्स, ईरान में खलबली

राष्ट्रपति पेज़ेशकियन के बयान के 5 प्रमुख कारण

आर्थिक प्रतिबंधों से मुक्ति की छटपटाहट: ईरान की अर्थव्यवस्था पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण वेंटिलेटर पर है। मुद्रास्फीति और बेरोजगारी ने जनता में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। पेज़ेशकियन जानते हैं कि जब तक परमाणु मुद्दे पर दुनिया को भरोसा नहीं दिलाया जाता, तब तक तेल के व्यापार पर लगी पाबंदियां नहीं हटेंगी। यह बयान आर्थिक संकट से उबरने की एक ज़ोरदार कोशिश है।

अमेरिका की सैन्य तैनाती का दबाव: पिछले 24 घंटों में अमेरिका द्वारा 50 आधुनिक फाइटर जेट्स की तैनाती ने ईरान को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। यह भारी सैन्य जमावड़ा संकेत है कि बातचीत फेल होने पर युद्ध का विकल्प खुला है। पेज़ेशकियन का 'वेरिफिकेशन' के लिए तैयार होना दरअसल युद्ध को टालने और कूटनीति को मौका देने का एक तरीका है।

वेनेजुएला जैसे हश्र का डर: ईरानी नेतृत्व के लिए वेनेजुएला और इराक का उदाहरण किसी बुरे सपने जैसा है। 3 जनवरी 2026 को अमेरिका द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी ने तेहरान में खतरे की घंटी बजा दी है। पेज़ेशकियन को डर है कि परमाणु ज़िद और पश्चिमी देशों से सीधा टकराव ईरान को भी उसी कंगाली और सत्ता परिवर्तन के रास्ते पर ले जाएगा। इसीलिए "किस भाषा में कहें" जैसा हताश बयान देकर वे कूटनीतिक कवच तैयार कर रहे हैं, ताकि अपनी सत्ता और देश को विनाशकारी अंत से बचा सकें।

अन्तरराष्ट्रीय मंच पर छवि सुधारना: ईरान पर लगातार 'आतंकवाद के पोषक' और 'अस्थिरता पैदा करने वाले' देश का ठप्पा लगाया जाता है। पेज़ेशकियन खुद को एक सुधारवादी नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं। सीधा संवाद और पारदर्शी जांच की पेशकश करके वे दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि ईरान एक जिम्मेदार राष्ट्र है, न कि कोई परमाणु खतरा।

ओमान वार्ता में अपना पलड़ा भारी करना: ओमान की मध्यस्थता में चल रही गुप्त वार्ता में ईरान पर दबाव बहुत अधिक है। ऐसे में यह सार्वजनिक बयान देकर पेज़ेशकियन ने गेंद अमेरिका के पाले में डाल दी है। वे यह दिखाना चाहते हैं कि "हम तो सब कुछ दिखाने को तैयार हैं, अब अमेरिका को अपनी जिद छोड़कर समझौता करना चाहिए।"

ये भी पढे़ं: Iran US Tension: 'हमला हुआ तो राख कर देंगे सारे सैन्य ठिकाने', ईरान ने अमेरिका को दी खुली धमकी

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