फिलिस्तीन के समर्थन में कट्टर दुश्मन ईरान और सऊदी अरब भी आए साथ, इजराइल के खिलाफ लामबंद हो रहे मुस्लिम देश

7 अक्टूबर को इजराइल पर हमले से ठीक 2 सप्ताह पहले सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस का बयान पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर रहा था। अमेरिकी समाचार चैनल फॉक्स को एक इंटरव्यू में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा था कि सऊदी अरब और इजरायल हर दिन करीब आ रहे हैं।

उन्होंने माना था कि सऊदी और इजराइल के बीच संबंध सामान्य होने की दिशा में तेजी से काम हो रहे हैं। लेकिन ठीक 2 सप्ताह के बाद इजराइल पर हमास के हमले और फिर इसके बाद इजराइली सेना की गाजा पट्टी में जवाबी कार्रवाई के बाद अब पश्चिम एशिया की राजनीति में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

Muslim countries are mobilizing against Israel

इजराइल-हमास जंग के बीच ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बुधवार को फोन पर बातचीत की। फरवरी में चीन की तरफ से समझौता कराए जाने के बाद ये पहला मौका था, जब दोनों देशों के नेताओं ने बात की।

ईरान के स्टेट मीडिया के मुताबिक, बातचीत के दौरान राष्ट्रपति रईसी और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच फिलिस्तीन के खिलाफ वॉर क्राइम रोकने पर सहमति बनी। एमबीडी ने 2 दिन पहले कहा था कि सऊदी अरब फिलिस्तीनियों के साथ खड़ा है। उनका मकसद फिलिस्तीन के लोगों को उनके अधिकार दिलवाना है।

जाहिर है कि फिलिस्तीन पर इजराइल के हमले के बाद अब सभी मुस्लिम देश एकजुट होने लगे हैं। इससे पहले बांग्लादेश से लेकर मालदीव और अफगानिस्तान तक अपने-अपने तरीके से फिलिस्तीन को अपना समर्थन दे चुके हैं। बाकी मुस्लिम देशों के सुर में सुर मिलाते हुए तुर्की ने भी रंग बदल दिया है। इजराइल ने गाजा पट्टी में बिजली पानी और भोजन की सुविधाओं की आपूर्ति रोक दी थी। इस पर तुर्की ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि मुस्लिम देशों में फिलिस्तीन के प्रति समर्थन की असल वजह जनता है। धार्मिक वजह ही वो कारण है कि सभी मुस्लिम देशों को किसी न किसी बहाने फिलिस्तीन का समर्थन करना पड़ता है। कोई भी देश अपनी बहुसंख्यक जनता को नाराज नहीं करना चाहता है।

बीते दिनों लीबिया का ह्स्र सबने देखा था। दरअसल इजराइल के साथ पर्दे के पीछे से चल रही बातचीत की खबर सार्वजनिक होने के बाद इस्लामिक देश लीबिया में बवाल शुरू हो गया था। इस दौरान देश भर में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन और हिंसा देखी गई।

लीबिया के कई शहरों में विदेश मंत्री के खिलाफ नारे लगाए गए और पोस्टर जलाए गए। इस दौरान लोगों ने फिलिस्तीन के झंडे भी लहराए। हत्या कर दिए जाने के डर से तत्कालीन विदेश मंत्री नजल अल मंगौश को देश छोड़कर जाना पड़ा था।

अब ऐसे वक्त में जब फिलिस्तीन में इजराइल बेहद आक्रमकता बरत रहा है तो कोई मुस्लिम देश इजराइल के पक्ष में खड़ा दिखने की गलती नहीं करेगा। तुर्की में तो शनिवार के बाद से ही फिलिस्तीन के पक्ष में जनता सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है।

पड़ोसी देश मिस्र में भी इजराइल के खिलाफ बेहद आक्रोश है। रविवार को एक पुलिस ने इजराइली टूरिस्ट पर गोलियां चला दी थीं। मिस्र में 22 देशों के अरब लीग की बुधवार को बैठक भी हुई है। इस बैठक में अरब लीग ने इजराइल के जरिए गाजा पट्टी में मूलभूत सेवाएं रोकने की आलोचना की और इन्हें जल्द से जल्द बहाल करने की अपील की।

इससे पहले सऊदी अरब ने मंगलवार को एक कैबिनेट बैठक की थी। इस मीटिंग में सऊदी किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने जॉर्डन और मिस्र राष्ट्रपति समेत कई इंटरनेशनल नेताओं से बातचीच की थी। इन सब कदमों से लग रहा है कि इजराइल की राह अब आसान होने वाली नहीं है। मुस्लिम देशों का एकजुट होना कहीं न कहीं उसे परेशान कर सकता है।

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