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Diplomacy: भारत को तेल बेचने के लिए बेताब ईरान, रूस का दिया हवाला, ट्रंप युग में मोदी सरकार लेगी बड़ा फैसला?

India-Iran Trade: ईरान और भारत के बीच सदियों से कारोबारी संबंध रहे हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के पिछले कार्यकाल में ये संबंध तब रूक गये, जब अमेरिका ने एकतरफा परमाणु समझौते से हटने के बाद ईरान के खिलाफ कई प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया।

लेकिन अब ईरान, भारत के साथ तेल की बिक्री फिर से शुरू करने और गैर-ऊर्जा क्षेत्रों में व्यापार को बढ़ावा देने के तरीकों की तलाश कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान साल 2018 में ईरान पर प्रतिबंध लगाए गये थे और उसके बाद भारत को मजबूरन, ईरान से तेल आयात रोकना पड़ा था।

India-Iran Trade

क्या भारत और ईरान में फिर शुरू हो पाएगा कारोबार? (Will India resume Trade with Iran?)

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर गुरुवार को कहा, कि "2018 में प्रतिबंध लगाए जाने से पहले भारत के साथ हमारे अच्छे आर्थिक संबंध थे। हमें लगता है, कि प्रतिबंधों का सम्मान करते हुए भी व्यापार के अवसर हैं... हमारा तेल निर्यात प्रतिबंधों के अधीन है, इसलिए हमें (भारत के साथ) इस समस्या को सुलझाने की जरूरत है।"

अधिकारी ने कहा, "हम भारत के साथ व्यापार को बढ़ावा देना चाहते हैं। चाबहार बंदरगाह ने भारत और ईरान को करीब ला दिया है। यह भारत को मध्य एशिया और रूस तक पहुंच प्रदान करता है। हम अपने भारतीय सहयोगियों के साथ इस मुद्दे को उठाएंगे।"

अगस्त 2018 से ईरान से भारत का आयात तब काफी कम हो गया है, जब ट्रंप ने संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) से वापस ले लिया था। ये ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए कई पश्चिमी देशों के साथ उसका एक समझौता था, जिससे ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अमेरिका अचानक हट गया था और ट्रंप ने ईरान पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे।

अगस्त 2018 से लेकर 2021 में ट्रंप के कार्यकाल के अंत तक, अमेरिका ने ईरान पर करीब 1500 प्रतिबंध लगा दिए।

India-Iran Trade

भारत और ईरान के बीच कारोबारी संबंध कैसा था? (How were the trade relations between India and Iran?)

भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, 2018-2019 में भारत ने ईरान से 13 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया था, जिसमें से अकेले तेल और उसके डेरिवेटिव का हिस्सा 12.37 बिलियन डॉलर था। हालांकि, डेटा से पता चलता है, कि 2019-2020 के बाद से भारत का ईरान से आयात सालाना 1 बिलियन डॉलर से कम रहा है और अप्रैल से अक्टूबर 2024 के बीच तेहरान से भारत का आयात 216 मिलियन डॉलर रहा, जो अमेरिका के जेसीपीओए से बाहर निकलने के बाद से व्यापार प्रतिबंधों के प्रभाव का संकेत है।

ईरानी अधिकारी ने कहा, "तेल और उसके डेरिवेटिव भारत और ईरान के बीच व्यापार को जोड़ने वाली वस्तुओं में से एक थे। यह दुख की बात है, कि भारतीय रिफाइनरियां, जो ईरानी कच्चे तेल का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें अब वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है।"

भारत ने जब ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया, उसके बाद चीन उसका सहारा बन गया।

अमेरिका की रिपोर्टों से संकेत मिलता है, कि ईरान का लगभग सारा पेट्रोलियम निर्यात चीन में छोटे स्वतंत्र तेल रिफाइनरियों को जा रहा है, जिससे 2023 में तेहरान को लगभग 70 बिलियन डॉलर का लाभ होगा। मार्च 2023 में, बीजिंग ने तेहरान और रियाद के बीच सुलह की मध्यस्थता की। तब तक दोनों पश्चिम एशियाई देश लगभग एक दशक से यमन में छद्म संघर्ष में थे। दोनों देशों को एक साथ लाने में चीन की भूमिका के लिए ईरान की सराहना पर प्रकाश डालते हुए, अधिकारी ने कहा कि, आगे चलकर तीनों देशों के बीच और अधिक त्रिपक्षीय सहयोग की उम्मीद की जानी चाहिए।

क्या भारत फिर से शुरू कर पाएगा कारोबार?

फिलहाल यह देखना अभी बाकी है, कि ट्रंप अपने दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान ईरान के साथ किस तरह से पेश आएंगे, और क्या वाशिंगटन, ईरानी अर्थव्यवस्था पर और ज्यादा प्रतिबंध लगा सकता है। डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले हैं। हालांकि, नई दिल्ली ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी प्रतिबंधों का सम्मान किया है, लेकिन यूक्रेन के साथ युद्ध को लेकर मॉस्को के साथ संबंधों को खत्म करने के वैश्विक दबाव के बावजूद, भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखा है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, रूस से भारत का आयात 2019-2020 में लगभग 7 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2023-2024 में 61.1 बिलियन डॉलर हो गया है, जिसमें लगभग 54 बिलियन डॉलर का तेल शामिल है।

अब ईरान भी भारत से ऐसी ही रियायतों की उम्मीद कर रहा है। वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा, "भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान हम तेल बिक्री के मुद्दे पर बातचीत करेंगे, लेकिन हम किसी भी फैसले पर तभी पहुंचेंगे, जब भारत को कोई नुकसान ना हो।" उन्होंने यह भी कहा, कि भारत और ईरान को पर्यटन सहित ऊर्जा से असंबंधित अन्य क्षेत्रों में संबंधों को गहरा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अधिकारी ने कहा, "भारत को ईरानियों को वीजा जारी करने में और ज्यादा आगे आने की जरूरत है और इसी तरह हम चाहते हैं, कि अधिक से अधिक भारतीय ईरान की यात्रा करें।"

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