Iran Vs America: फिर पाकिस्तान के दौरे पर ईरान के विदेश मंत्री अराघची, 48 घंटे में दूसरा दौरा, अमेरिका परेशान

Iran Vs America: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की कूटनीतिक दौड़-भाग ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। पिछले दो दिनों में उनका दूसरा पाकिस्तान दौरा इस बात का पुख्ता संकेत है कि मध्य पूर्व के तनाव को कम करने के लिए पर्दे के पीछे कोई बड़ी रणनीति तैयार हो रही है। ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका से सीधे बातचीत करने से इनकार कर दिया है और पाकिस्तान को एक भरोसेमंद 'मध्यस्थ' के रूप में आगे किया है।

ओमान के सुल्तान के साथ शांति बहाली पर गहन चर्चा करने के तुरंत बाद अराघची का दोबारा इस्लामाबाद पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण है। यह दौरा न केवल ईरान और अमेरिका के बीच संदेशों के आदान-प्रदान का जरिया है, बल्कि क्षेत्र में युद्ध की आहट के बीच शांति की एक नई उम्मीद भी जगाता है।

abbas Araghchi Pakistan visit

Abbas Araghchi Pakistan Visit: दो दिन में दूसरा दौरा

अब्बास अराघची का दो दिनों के भीतर दोबारा पाकिस्तान जाना सामान्य बात नहीं है। शनिवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर से मिलने के बाद वे ओमान चले गए थे। अब दोबारा इस्लामाबाद पहुंचकर वहां के नेताओं से चर्चा करने के बाद वे सीधे रूस के लिए उड़ान भरेंगे। यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि ईरान अपनी सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लेकर रूस और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ मिलकर एक मजबूत घेरा तैयार करने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान बना ईरान-अमेरिका का 'मैसेंजर'

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही कड़वाहट अब एक नए मोड़ पर है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तें और अमेरिका की मांगों पर अपनी आपत्तियां सीधे वॉशिंगटन को नहीं भेजेगा। इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान को चुना है। शनिवार की मीटिंग में अराघची ने पाकिस्तान को एक दस्तावेज सौंपा था जिसमें ईरान की शर्तें लिखी हैं। पाकिस्तान अब ईरान और अमेरिका के बीच एक पुल का काम कर रहा है, जो क्षेत्र में युद्ध के खतरे को टालने में मदद कर सकता है।

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ओमान में शांति बहाली पर बड़ी चर्चा

पाकिस्तान से निकलने के बाद अराघची ने ओमान के सुल्तान तारिक बिन हैथम से मुलाकात की। ओमान हमेशा से ही खाड़ी देशों और पश्चिम के बीच एक सुलह कराने वाले देश की भूमिका निभाता रहा है। इस बैठक में मुख्य मुद्दा जंग को रोकना और मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करना था। अराघची ने संकेत दिए हैं कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन वह अपनी शर्तों से समझौता नहीं करेगा। ओमान के साथ हुई इस चर्चा का फीडबैक लेकर ही वे दोबारा पाकिस्तान लौटे हैं।

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अराघची ने बताया पाकिस्तान दौरा उपयोगी

ईरानी विदेश मंत्री ने अपने पाकिस्तान दौरे को बेहद सफल और उपयोगी करार दिया है। उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान की शांति कोशिशों की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की सेना और सरकार दोनों के साथ ईरान के बढ़ते संपर्क इस बात का सबूत हैं कि ईरान इस समय अलग-थलग नहीं पड़ना चाहता। अराघची के अनुसार, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए पाकिस्तान की भूमिका निर्णायक है। अब सबकी नजरें उनके रूस दौरे पर टिकी हैं, जहां इस कूटनीति का अगला चरण तय होगा।

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