भारतीय कंपनियों पर अमेरिका के प्रतिबंधों पर भड़का ईरान, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का लगाया आरोप

अमेरिका द्वारा 6 भारतीय कंपनियों पर ईरान के साथ तेल व्यापार को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद, भारत में ईरानी दूतावास ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। दूतावास (Iranian Embassy) ने गुरुवार, 31 जुलाई को संयुक्त राज्य अमेरिका की 'अर्थव्यवस्था को हथियार बनाने' और ईरान और भारत जैसे स्वतंत्र देशों पर प्रतिबंध लगाने की आलोचना की।

दूतावास के अनुसार, ये 'जबरदस्ती भेदभावपूर्ण कार्रवाइयां' अंतर्राष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन करती हैं और आर्थिक साम्राज्यवाद का एक रूप हैं।

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ईरान ने अपने आधिकारिक हैंडल पर एक पोस्ट में कहा कि, संयुक्त राज्य अमेरिका अर्थव्यवस्था को हथियार बनाना जारी रखे हुए है और ईरान तथा भारत जैसे स्वतंत्र राष्ट्रों पर अपनी इच्छा थोपने तथा उनके विकास में बाधा डालने के लिए प्रतिबंधों का इस्तेमाल कर रहा है।'

भेदभावपूर्ण कार्यवाहियां अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
पोस्ट में आगे लिखा कि, 'ये बलपूर्वक भेदभावपूर्ण कार्यवाहियां अंतर्राष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं और आर्थिक साम्राज्यवाद के आधुनिक रूप का प्रतिनिधित्व करती हैं। ऐसी नीतियों का विरोध करना एक ऐसे नए, गैर-पश्चिमी नेतृत्व वाले बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था और एक सशक्त ग्लोबल साउथ के समर्थन में खड़ा होना है।'

दरअसल, नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास की यह प्रतिक्रिया अमेरिका द्वारा ईरान के साथ तेल व्यापार को लेकर छह भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए जाने के एक दिन बाद आई है।

बुधवार को अमेरिकी विदेश विभाग ने प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए कहा कि भारतीय संस्थाओं ने जानबूझकर ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद और मार्केटिंग के लिए 'महत्वपूर्ण लेनदेन' किए हैं, जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि, 'ईरानी शासन अपनी अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों के लिए मध्य पूर्व में संघर्ष को बढ़ावा दे रहा है। आज, संयुक्त राज्य अमेरिका उस राजस्व के प्रवाह को रोकने के लिए कार्रवाई कर रहा है जिसका उपयोग ईरानी शासन विदेशों में आतंकवाद को समर्थन देने और अपने ही लोगों पर अत्याचार करने के लिए करता है।'

अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को ईरान के साथ व्यापार करने के लिए भारत की छह कंपनियों सहित 20 संस्थाओं पर प्रतिबंधों की घोषणा की।

अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित 6 भारतीय कंपनिया

  • अलकेमिकल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (अलकेमिकल सॉल्यूशंस)
  • ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड (ग्लोबल इंडस्ट्रियल)
  • जुपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड (जुपिटर डाई केम)
  • रमणिकलाल एस गोसालिया एंड कंपनी (रमणिकलाल)
  • पर्सिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड
  • कंचन पॉलिमर्स

क्यों लगे हैं प्रतिबंध
अमेरिका ने कुछ भारतीय कंपनियों पर इसलिए कार्रवाई की है क्योंकि उन्होंने ईरान से पेट्रोकेमिकल (chemical products made from oil and gas) खरीदने, बेचने, ट्रांसपोर्ट करने या मार्केटिंग जैसे कामों में 'जानबूझकर' हिस्सा लिया। यह कार्रवाई अमेरिका के एक कानून (Executive Order 13846) की धारा 3(ए)(iii) के तहत की गई है।

अब आगे क्या होगा: प्रतिबंधों का असर
इन प्रतिबंधों के बाद:

  • इन भारतीय कंपनियों की अमेरिका में मौजूद सारी संपत्तियां और किसी भी तरह के आर्थिक हित फ्रीज कर दिए जाएंगे यानी उन्हें इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
  • अगर कोई और कंपनी या संस्था 50% या उससे ज्यादा हिस्सेदारी के साथ इन प्रतिबंधित कंपनियों से जुड़ी है, तो वो भी ऑटोमैटिक बैन में आ जाएगी।
  • कोई भी अमेरिकी नागरिक या अमेरिका के अंदर मौजूद संस्था इन कंपनियों से कोई लेन-देन नहीं कर सकेगी - चाहे वो पैसों का लेन-देन हो, सामान देना हो या सेवा।
  • यह तब तक लागू रहेगा जब तक अमेरिका का OFAC (Office of Foreign Assets Control) कोई स्पेशल परमिशन या छूट (license) नहीं दे देता।

अमेरिका की सफाई
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि इन प्रतिबंधों का मकसद किसी को "सजा देना" नहीं है, बल्कि यह कोशिश है कि कंपनियों का व्यवहार बदले और वे भविष्य में ऐसे कामों से बचें।

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