इंटरनेट सर्चिंग डेटा से भी हो सकती है कोरोना हॉटस्पॉट की पहचान, शोध में सामने आई बात
नई दिल्ली: मोबाइल और इंटरनेट सेवा से आज हर इंसान जुड़ गया है। इसी मोबाइल की मदद से कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट्स का भी पता लगाया जा सकता है, ये बात अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल की ओर से की गई एक शोध में निकलकर सामने आई है। ये शोध क्लीनिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपाटोलॉजी नाम के मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसके अलावा इसमें कोरोना के कुछ नए लक्षणों के बारे में भी बताया गया है।

शोध के मुताबिक जिन जगहों पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षणों की ज्यादा खोज की गई, वो बाद में कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट बन गए। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल पेट और छोटी आंत से संबंधित समस्या है। जिसमें दस्त, भूख ना लगना, पेट दर्द जैसी समस्या होती हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक अमेरिका के जिन राज्यों में मामले तेजी से बढ़े हैं, यहां पर लोगों ने इंटरनेट पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से जुड़े लक्षणों और इलाज के बारे में सर्च किया था। इसके लिए शोधकर्ताओं ने गूगल ट्रेंड के डेटा की मदद ली।
शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने अल्फाबेट इंक के गूगल ट्रेंड्स नाम के टूल का इस्तेमाल किया। इसमें उन्होंने देखा कि 20 जनवरी से 20 अप्रैल के बीच 15 राज्यों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से जुड़ी चीजें ज्यादा सर्च की गईं। इसी बीच इन राज्यों में मामले तेजी से बढ़े थे, जिसमें न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी, कैलिफोर्निया, मैसाचुसेट्स और इलिनोइस भी शामिल हैं। इसमें सबसे ज्यादा कॉमन 'भूख ना लगना' और 'दस्त' था। उनके मुताबिक अगर अन्य जगहों पर भी ऐसे ही इंटरनेट सर्चिंग के आंकड़ों की निगरानी की जाए, तो हॉटस्पॉट वाले इलाकों की पहचान जल्द हो सकती है।












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