मॉरीशस में बनकर तैयार हुआ भारत का सैन्य अड्डा, हिंद महासागर में चीन की हरकतों पर अब 24 घंटे नजर
India built in Military base in Mauritius: हिंद महासागरर में चीन के खिलाफ रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए भारत, मॉरीशस के एक द्वीप पर जिस सैन्य अड्डे का निर्माण कर रहा है, वो अब बनकर तैयार होने वाला है। भारत का ये मिलिट्री बेस, हवाई और नौसैनिक संपत्तियों की दीर्घकालिक तैनाती के लिए लगभग तैयार हो चुका है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली अब पूर्वी अफ्रीकी देश मॉरीशस के साथ पोर्ट लुइस द्वीप को लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है। भारतीय नौसेना का एक युद्धपोत, आईएनएस शारदा भी मंगलवार को पोर्ट लुइस में पहुंच गया है। इंडियन नेवी के जहाज के मंगलवार तक पोर्ट लुइस में रहने के दौरान, भारतीय नौसेना और मॉरीशस के राष्ट्रीय तट रक्षक के सैनिक अगले तीन दिनों तक स्पेशल इकोनॉमिक जोन में सैन्य अभ्यास करेंगे।

मॉरीशस में भारत का सैन्य अड्डा
मॉरीशस के अगालेगा द्वीप में बनाया गया सैन्य अड्डा हिंद महासागर में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता और चीन के लिए ये सैन्य अड्डा बहुत बड़ी मुसीबक बनने वाला है, क्योंकि अब इस सैन्य अड्डा से भारतीय सेना, हर एक सेकंड हिंद महासागर में चीन की हरकतों पर नजर रख सकती है।
वहीं, इंडियन नेवी के आईएनएस शारदा की पोर्ट लुइस की यात्रा और मॉरीशस के साथ स्पेस सेक्टर में एमओयू, भारत के लिए बहुत बड़ा रक्षा समझौता माना जा रहा है और यह कदम बताता है, कि हिंद महासागर से चीन को खदेड़ने के लिए भारत कितनी तैयारी कर रहा है। पूर्वी अफ्रीका के इस क्षेत्र में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना लगातार आक्रामक हो रही है, जिसे अब भारत मॉरीशस के अपने सैन्य अड्डे से नकेल कस सकता है।

मॉरीशस के साथ सैटेलाइट डील
भारत के विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन, भारत से मॉरीशस में गिरमिटिया मजदूरों के आगमन की 189वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बुधवार से गुरुवार तक, पोर्ट लुइस की आधिकारिक यात्रा करेंगे।
भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, वह हिंद महासागर में स्थिति द्वीप राष्ट्र मॉरीशस की पृथ्वी की ऑब्जर्वेशन पॉवर बढ़ाने में मदद करने के लिए एक ज्वाइंट स्पेस सैटेलाइट के विकास और प्रक्षेपण के लिए समझौता करेंगे।
पोर्ट लुइस में भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्वीटर) पर मॉरीशस द्वीप के मुख्य बंदरगाह पर आईएनएस शारदा के आगमन की घोषणा की। इसमें कहा गया, कि भारत से गिरमिटिया मजदूरों के मॉरीशस आगमन की स्मृति में भारतीय नौसेना का युद्धपोत भी पोर्ट लुइस पहुंचा है।
हालांकि, पोर्ट लुइस में भारतीय विदेश मंत्रालय के राजनयिक मिशन ने मॉरीशस के अगालेगा द्वीप में सैन्य आधार विकसित करने में भारत की भूमिका पर कोई टिप्पणी करने से परहेज किया है।
हालांकि, एक सूत्र ने कहा, कि अगालेगा द्वीप में विमानों को समायोजित करने के लिए जेटी, रनवे और हैंगर का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। मॉरीशस की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए, भारत अपने कुछ बोइंग पोसीडॉन 8आई समुद्री गश्ती और टोही विमानों को नवनिर्मित सुविधा में तैनात करने पर विचार कर सकता है, जाहिर तौर पर हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी पीएलए नौसेना के जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए भारत का ये बहुत बड़ा कदम होगा।
भारत ने मार्च 2015 में अगालेगा द्वीप में "समुद्र और हवाई परिवहन सुविधाओं में सुधार के लिए" मॉरीशस के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के बाद सुविधा का निर्माण शुरू किया था।
हालांकि, नई दिल्ली आधिकारिक तौर पर कहती है, कि इस सुविधा (सैन्य बेस) का मकसद मॉरीशस को अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करना है।
हालांकि, इस परियोजना का मॉरीशस में विपक्षी दलों के साथ स्थानीय लोगों के एक वर्ग ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था, और अनिरुद्ध जुगनौत और प्रविंद जुगनथ के नेतृत्व वाली क्रमिक सरकारों पर नई दिल्ली को अगालेगा में एक सैन्य अड्डा बनाने की अनुमति देकर देश की संप्रभुता को कमजोर करने का आरोप लगाया था।
लेकिन, जुलाई 2022 में प्रविंद जुगनौथ ने इस बात से इनकार किया, कि द्वीप को सैन्य अड्डे में बदल दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने संसद में विपक्ष को यह भी बताया, कि भारत और मॉरीशस के बीच 2015 के एमओयू में एक गोपनीयता खंड में यह शर्त लगाई गई थी, कि द्विपक्षीय सौदे का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications