भारतीय हथियार से लहूलुहान हो रहा भारत का जिगरी दोस्त, 'गलत हाथों' में कैसे पहुंचा भारतीय गोला-बारूद?

Indian Weapons in Ukraine: भारत का डिफेंस इंडस्ट्री काफी तेजी से बढ़ रहा है और भारत का लक्ष्य साल 2025 तक एयरोस्पेस और सैन्य हार्डवेयर सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की है। भारत अभी अभूतपूर्व रफ्तार से बंदूकें, टैंक और गोला-बारूद का निर्माण कर रहा है, लेकिन भारतीय हथियार 'गलत हाथों' में भी जा रहे हैं।

लिहाजा, भारत सरकार इन घातक हथियारों को 'गलत हाथों' में जाने से रोकने के लिए अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। 28 मई को इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि रक्षा मंत्रालय, भारत में निर्मित सैन्य उपकरणों की निगरानी को सख्त कर रहा है।

Indian Weapons in Ukraine

'गलत हाथों' में जा रहा है भारतीय हथियार

रक्षा मंत्रालय ने अलार्म बजाते हुए निजी निर्माताओं को हथियाप निर्यात के लिए एंड यूज सर्टिफिकेशन(EUC) नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है, क्योंकि कई रिपोर्ट्स में दावे किए गये हैं, कि भारत में निर्मित हथियार "गलत हाथों" में चले गए हैं।

जब सरकार ने भारतीय हथियारों के 'गलत हाथों' में जाने का जिक्र किया है, तो इसका मतलब ये है, कि भारतीय हथियार उन देशों में पहुंच गये हैं, जो भारतीय हथियार खरीदने के लिए अनाधिकृत हैं। और ऐसा माना जा रहा है, कि भारत, जहां हथियारों का उत्पादन हुआ है, उसकी इजाजत के बगैर ये हथियार संघर्ष वाले क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं।

यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में कर्नल अभय बालकृष्ण पटवर्धन (सेवानिवृत्त) ने कहा, कि "निर्यात पर नियंत्रण सख्त करने का प्राथमिक उद्देश्य, भारत निर्मित हथियारों को इंटरपोल और भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों या भारत सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं, किसी अन्य संस्था के हाथों में पड़ने से रोकना है।"

इस साल की शुरुआत में कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था, कि यूक्रेन, भारत में निर्मित 155 मिमी के तोप के गोले का इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि, भारत ने इन दावों का खंडन किया और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया, कि "नई दिल्ली ने यूक्रेन को न तो कोई तोपखाना भेजा है और न ही निर्यात किया है।"

मई में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी। सोशल मीडिया अकाउंट 'यूक्रेनी फ्रंट' ने तस्वीरें पोस्ट करते हुए कैप्शन दिया था, कि "यूक्रेन के पास भारतीय प्रोडक्शन के 125-मिमी उच्च विस्फोटक गोले (शेल 125-मिमी एचई) की पहली दर्ज उपस्थिति।"

इससे यह सवाल उठता है, कि अगर भारत, यूक्रेन में हथियारों का निर्यात नहीं कर रहा है, तो फिर भारतीय हथियार कैसे यूक्रेन पहुंच रहे हैं?

भारत में हथियारों को कैसे किया जाता है कंट्रोल?

इससे पहले, सरकारी स्वामित्व वाली आयुध फैक्ट्रियां, हथियारों और गोला-बारूद के नियंत्रित निर्माण के लिए जिम्मेदार थीं। लेकिन निजी क्षेत्र को हथियार और गोला-बारूद निर्यात करने की अनुमति दिए जाने के बाद, गोला बारूद किन हाथों में जा रहा है, उसपर कंट्रोल कुछ हद तक कम हो गया।

कर्नल अभय बालकृष्ण पटवर्धन (सेवानिवृत्त) के मुताबिक, "इसीलिए इन हथियारों और गोला-बारूद के गलत हाथों में पड़ जाने का खतरा है।"

इसके अलावा, जो गोला-बारूद पुराने हो जाते हैं, या फिर चलन से बाहर हो जाते हैं, उन्हें खपाने के लिए भी एक प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

जैसे, करीब 8,000- 10,000 राइफलें हर साल अप्रचलित हो जाती हैं। और ऐसे में इस बात की आशंका बन जाती है, कि ग्रे मार्केट के जरिए ये हथियार अनाधिकृत देशों तक पहुंच सकता है, नतीजतन, कर्नल पटवर्धन ने कहा, "इन हथियारों की रिवर्स इंजीनियरिंग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।"

भारतीय रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य 2025 तक एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण में 1.75 ट्रिलियन यानि 22 अरब डॉलर का कारोबार हासिल करना है, जिसमें निर्यात में 35,000 करोड़ रुपये यानि 4.3 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करने का लक्ष्य रखा हया है। पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में निर्यात 21,083 करोड़ रुपये (2.5 अरब डॉलर) तक पहुंच गया, जिसमें निजी क्षेत्र का मुख्य योगदान रहा है।

वहीं, भारतीय कंपनियों को यूक्रेन, तुर्की, चीन और पाकिस्तान को हथियार निर्यात करने से रोक दिया गया है। और सख्ती बररते हुए हाल के उपायों में हथियारों के अनधिकृत उपयोग को रोकने के लिए निर्यात के लिए 'एंड यूज सर्टिफिकेशन' नियमों को मजबूत करना शामिल है।

एंड यूज सर्टिफिकेशन तय करता है, कि हथियार बनाने वाले मूल देश की इजाजत के बगैर हथियार किसी अनाधिृत हाथों में ना पहुंचे।

इसके अलावा, निर्यात नियंत्रण के अलावा, रक्षा मंत्रालय हथियारों के आयात की निगरानी को भी कड़ा कर रहा है।

चूंकी भारतीय हथियारों के यूक्रेन पहुंचने की रिपोर्ट है, लिहाजा इससे भारत का सबसे जिगरी दोस्त रूस के खिलाफ ही इस्तेमाल हो रहा है, लिहाजा अगर इसपर कंट्रोल नहीं हुआ, तो ये भारत और रूस की दोस्ती के लिए भी खराब स्थिति बनाएगा।

लिहाजा, भारत ने सक्षम भारत पहल शुरू की है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है, कि पहले आयात किए जाने वाले पुर्जे या हथियार अब घरेलू स्तर पर निर्मित किए जाएं। सरकार ने निजी खिलाड़ियों और स्टार्ट-अप को इन हथियारों और गोला-बारूद के उत्पादन के लिए आवश्यक मशीनरी और कच्चे माल के आयात की अनुमति दी है। परिणामस्वरूप, कारखाने स्थापित किए गए हैं, और उत्पादन के लिए आवश्यक सामग्रियों के आयात के लिए आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं। हालांकि, निर्यात पर कठोर नियंत्रण होने के बावजूद, हथियार बनाने के लिए उपकरणों के आयात प्रक्रिया पर कंट्रोल कम है।

और इसे रेगुलेट करने के लिए रक्षा मंत्रालय अब रक्षा कंपनियों द्वारा आयात के पैटर्न की निगरानी के लिए एक आंतरिक पोर्टल स्थापित करने की योजना बना रहा है, जिसमें हथियार और गोला-बारूद उत्पादन के लिए आवश्यक विस्फोटक और प्राइमर जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

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