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बांग्लादेश के रास्ते त्रिपुरा तक तेल भेजने की तैयारी, रेल नेटवर्क ठप होने के बाद इंडियन ऑयल का फैसला

आईओसी ने कहा कि, कंपनी के नॉर्थ ईस्ट डिवीजन इंडियनऑयल-एओडी ने 2016 में बांग्लादेश के रास्ते त्रिपुरा में कुछ खेप भेजी थी, जब असम में बराक घाटी में दयनीय सड़क की स्थिति के कारण आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी।

नई दिल्ली, जून 01: सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने रविवार को कहा कि, वह बांग्लादेश के रास्ते त्रिपुरा तक ईंधन पहुंचाने पर विचार कर रही है, क्योंकि असम में भारी भूस्खलन के कारण रेल नेटवर्क पूरी तरह से ठप हो गया है। असम के दीमा हसाओ जिले और बराक घाटी, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र रेल लिंक इस महीने की शुरुआत में लैंडस्लाइड की वजह से बह गया था, जिससे कई क्षेत्रों के साथ रेल लाइन संपर्क टूट गया है।

बांग्लादेश के रास्ते तेल भेजने की तैयारी

बांग्लादेश के रास्ते तेल भेजने की तैयारी

इंडियन ऑयल ने हालांकि, मेघालय के रास्ते सड़क मार्ग से अपनी सभी आपूर्ति शुरू कर दी, लेकिन सड़क रास्ते तेल भेजने से तेल की लागत दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक (इंडियनऑयल-एओडी) जी रमेश ने कहा कि, "दीमा हसाओ भूस्खलन के बाद, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और दक्षिणी असम तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता मेघालय के रास्ते सड़क संपर्क था। यह मार्ग भी भूस्खलन संभावित है।" उन्होंने कहा कि, इस वजह से आईओसी, राज्य सरकार और केंद्र सरकार को पूर्वोत्तर के दक्षिणी क्षेत्र में ईंधन की आपूर्ति के वैकल्पिक तरीकों की तलाश करने के लिए मजबूर किया है।

पहले भी बांग्लादेशी रास्ता का हुआ है इस्तेमाल

पहले भी बांग्लादेशी रास्ता का हुआ है इस्तेमाल

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक जी रमेश ने कहा कि, कंपनी के नॉर्थ ईस्ट डिवीजन इंडियनऑयल-एओडी ने 2016 में बांग्लादेश के रास्ते त्रिपुरा में कुछ खेप भेजी थी, जब असम में बराक घाटी में दयनीय सड़क की स्थिति के कारण आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी। उन्होंने कहा, "हम वैकल्पिक मार्ग के रूप में छह साल पुराने नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान में, हम केंद्र सरकार के माध्यम से बांग्लादेश सरकार से बात कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि जल्द ही सकारात्मक खबर आएगी।" कंपनी अपने ईंधन के काफिले को मेघालय के दावकी से बांग्लादेश भेजने की योजना बना रही है। इसके बाद यह त्रिपुरा के कैलाशहर में भारत में फिर से प्रवेश करेगा। एक बार चर्चा को अंतिम रूप देने और एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, इंडियनऑयल-एओडी अपने उत्पादों को मुख्य रूप से गुवाहाटी में बेटकुची डिपो से बांग्लादेश के माध्यम से त्रिपुरा के धर्मनगर डिपो में ट्रांसफर करेगा।

बढ़ जाएगी परिवहन लागत

बढ़ जाएगी परिवहन लागत

नाम जाहिर न करने की शर्त पर कंपनी के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, आईओसी शुरू में बांग्लादेश के रास्ते 1,400 किलोलीटर ईंधन की ढुलाई की योजना बना रही थी, जिसकी कुल परिवहन लागत 57.78 लाख रुपये थी, जबकि रेल मार्ग पर 34.22 लाख रुपये ही लागत आती। आईओसी के बेटकुची डिपो से बांग्लादेश होते हुए धर्मनगर डिपो तक विभिन्न प्रकार के ईंधन के परिवहन की दूरी 376 किमी होगी, जिसमें पड़ोसी देश के अंदर 137 किमी होगी। वहीं, मेघालय-बराक घाटी के माध्यम से सामान्य मार्ग में 579 किमी की दूरी पड़ती है, जो बांग्लादेश रूट के मुकाबले ज्यादा है, इसीलिए ओआईसी ने बांग्लादेश के वैकल्पिक रास्ते पर विचार किया है। आपको बता दें कि, इसस पहले 9 सितंबर 2016 को आईओसी ने असम में जीर्ण-शीर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग से बचने के लिए पहली बार अपने गुवाहाटी डिपो से बांग्लादेश के रास्ते त्रिपुरा के लिए 84,000 लीटर केरोसिन और डीजल ले जाने वाले सात टैंकरों को हरी झंडी दिखाई थी।

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