रूसी समुद्र में भारतीय स्टील्थ युद्धपोत का सीक्रेट ट्रायल, किस मिशन पर Indian Navy? सामने आया VIDEO
Tushil Begins Sea Trials In Russia: इंडियन नेवी अपने जिस एडवांस स्टील्थ फ्रिगेट (युद्धपोत) की बेसब्री से इंतजार कर रही थी, उसने रूस के समुद्र में सीक्रेट ट्रायल शुरू कर दिए हैं, जिससे तय हो गया है, कि यूक्रेन युद्ध का भारत-रूस की दोस्ती पर कोई असर नहीं पड़ा है।
भारतीय नौसेना के लिए कलिनिनग्राद के यंतर शिपयार्ड में बनाए गये दो अतिरिक्त क्रिवाक/तलवार श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट में से पहला, तुशिल ने 5 मार्च को समुद्री परीक्षण शुरू कर दिया है, जो भारतीय नौसेना के ऑपरेशंस कि दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

तुशिल का वीडियो आया सामने
इंडियन नेवी के इस एडवांस स्टील्थ फ्रिगेट की समुद्री ट्रायल का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा जा रहा है, कि तुशिल, बाल्टिस्क नौसेना बेस से समुद्र में उतर रहा है।
इस वीडियो को सबसे पहले, टेलीग्राम चैनल बाल्टिस्क लाइफ पर शेयर किया गया है, जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई डिफेंस एक्सपर्ट्स ने भारी कौतुहल के साथ इस वीडियो को शेयर किया, और दावा किया, कि ये सीक्रेट ट्रायल इंडियन नेवी की नई शक्ति को दर्शाता है।
तुशिल का समुद्री परीक्षण काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है और इससे समुद्री दुनिया की स्थितियों में जहाज के प्रदर्शन, क्षमताओं और प्रणालियों का कठोर परीक्षण शामिल होने की उम्मीद है। ये परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, कि युद्धपोत भारतीय नौसेना की कठोर ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करता है या नहीं।
भारतीय नौसेना के लिए मील का पत्थर
तुशिल का परीक्षण, भारतीय नौसेना के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है और इसका परीक्षण करीब दो सालों के बाद किया जा रहा है, जब जहाज को रूस में तत्कालीन भारतीय दूत डी. बाला वेंकटेश वर्मा और अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में कलिनिनग्राद के यंतर शिपयार्ड से रूस में पानी में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया था।
तुशिल, जिसका संस्कृत में अर्थ है "रक्षक ढाल", उसके लिए भारत ने रूस के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया था, जिसके तहत चार ऐसे जहाजों का निर्माण हो रहा है, जिनमें दो (आईएनएस तुशिल और आईएनएस तमाला) का निर्माण रूस कर रहा है, जबकि बाकी दो का निर्माण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए भारत में किया जा रहा है।
हालांकि, रूस जिन दो जहाजों का निर्माण कर रहा है, यूक्रेन युद्ध और कोविड-19 की वजह से उसके प्रोडक्शन में काफी देरी हुई है। कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक अगस्त 2022 तक इन दोनों जहाजों को रूस को सौंपना था, लेकिन अब जाकर इसका ट्रायल ही शुरू हुआ है। देरी के बाद नवंबर 2023 और अप्रैल 2024 की अनुमानित डिलीवरी तिथियों को छह महीने आगे बढ़ाकर मई और अक्टूबर 2024 कर दिया गया था।
अगस्त 2023 में, यूनाइटेड शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ रशिया के महानिदेशक एलेक्सी राखमनोव ने बताया था, कि देरी कुछ उपकरणों की आपूर्ति के कारण हुई, जिन्हें रूस तक पहुंचने के लिए व्यापक यात्राओं से गुजरना पड़ा।
राखमनोव ने ये भी कहा था, कि ग्लोबल स्विफ्ट इंटरबैंक प्रणाली से रूस को बाहर किए जाने का असर भी प्रोडक्शन पर पड़ा, क्योंकि इसकी वजह से रूस को भुगतान नहीं मिल पा रहा था।

तलवार क्लास स्टील्थ फ्रिगेट है तुशिल
भारतीय नौसेना इस वक्त 6 तलवार क्लास के फ्रिगेट्स (युद्धपोत) का संचालन करती है, जिन्हें 1997 और 2006 में तीन-तीन के दो बैचों में हासिल किया गया था।
इन युद्धपोतों की कमीशनिंग कई सालों में हुई और शुरुआती बैच के पहले युद्धपोत आईएनएस तलवार को जून 2003 में कमीशन किया गया था और दूसरे बैच के अंतिम युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद को जून 2013 में इंडियन नेवी में कमीशन किया गया था।
अक्टूबर 2016 में, भारत और रूस ने चार अतिरिक्त स्टील्थ फ्रिगेट की खरीद के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते की घोषणा की थी, जिसके बाद सीधी खरीद के लिए 1 अरब डॉलर के सौदे को अंतिम रूप दिया गया था। इस व्यवस्था में दो युद्धपोतों का ऑफ-द-शेल्फ अधिग्रहण निर्धारित किया गया था, जबकि बाकी दो के निर्माण का काम गोवा शिपयार्ड लिमिटेड को सौंपा गया।
ये एडवांस तलवार श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट, रूसी क्रिवाक-III/IV श्रेणी के फ्रिगेट या प्रोजेक्ट 11356 पर आधारित हैं, जिन्हें रूसी नौसेना सेवा में 'एडमिरल ग्रिगोरोविच' क्लास के रूप में जाना जाता है।
भारत में बनाए जा रहे दो युद्धपोतों के लिए, नवंबर 2018 में एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट उस वक्त हुआ, जब गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) ने रूस के रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 500 मिलियन डॉलर का समझौता किया।
इस सौदे का मकसद भारत में दो युद्धपोतों का निर्माण करना था, ताकि भारत को फ्रिगेट को निर्माण को लेकर टेक्नोलॉजी, डिजाइन हासिल हो। इसके बाद जनवरी 2019 में भारत के रक्षा मंत्रालय और जीएसएल के बीच औपचारिक रूप से अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। भारत में इन युद्धपोतों का निर्माण जनवरी 2021 में शुरू हुआ और भारतीय नौसेना के प्लान के मुताबिक, पहले जीएसएल फ्रिगेट की डिलीवरी 2026 तक होने की उम्मीद है।












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