चीन में फैले रहस्यमयी निमोनिया से कितना खतरा? आपात स्थिति के लिए तैयार भारत सरकार
चीन में रहस्यमयी निमोनिया का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। देश के कई शहरों के अस्पतालों में भर्ती बच्चों की संख्या में तेजी से इजाफा हो राह है। संक्रमण तेजी से बढ़ता देखकर स्वास्थ्य अधिकारियों में चिंता पैदा हो गई है।
इस बीच भारत सरकार स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का कहना है कि चीन में एच9एन2 के मामलों और बच्चों में तेजी से फैल रही सांस की बीमारी पर वे बारीकी से नजर रख रहे हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि चीन में सामने आ रहे एवियन इन्फ्लूएंजा मामले के साथ-साथ श्वसन संबंधी बीमारी के समूहों से भारत को खतरे का संभावना कम है। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये भी कहा कि भारत इसकी वजह से पैदा होने वाली किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार है।
चीन में अक्टूबर 2023 में H9N2 (एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस) के एक मामले आने के बाद इसकी तैयारी को लेकर डीजीएचएस की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसकी रिपोर्ट डब्ल्यूएचओ (WHO) को दी गई थी।
भारत किसी भी प्रकार की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति के लिए तैयार है। भारत ऐसे सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दों के समाधान के लिए वन हेल्थ दृष्टिकोण पर काम कर रहा है। कोरोना महामारी के बाद भारत के स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढ़ांचे में मजबूती आई है।
WHO ने चीन से मांगी रिपोर्ट
WHO ने बच्चों में सांस लेने संबंधी बीमारियों और निमोनिया के ग्रुप में बढ़ोतरी पर चीन से विस्तृत जानकारी देने का अनुरोध किया है। WHO ने कहा कि अक्तूबर के मध्य से उत्तरी चीन में पिछले तीन सालों की इसी अवधि की तुलना में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी में वृद्धि दर्ज की गई है।
चीन में इन्फ्लूएंजा, इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों, आरएसवी और SARS-CoV-2 को लेकर जानकारी देने जुटाने के लिए और ग्लोबल इन्फ्लुएंजा निगरानी रिपोर्ट करने के लिए डब्ल्यूएचओ का सिस्टम मौजूद है।
प्रोमेड ने जारी किया अलर्ट
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय रोग निगरानी मंच प्रोमेड ने मंगलवार को बच्चों को प्रभावित करने वाले अज्ञात निमोनिया पर अलर्ट जारी किया। इस बीमारी की शुरुआत को लेकर अभी कुछ बताया नहीं गया है। प्रोमेड ने कहा कि इतने सारे बच्चों का इतनी जल्दी प्रभावित होना सामान्य बात नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया कि यह अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि क्या यह एक और महामारी हो सकती है, लेकिन हमें अभी से सावधानी बरतनी चाहिए। इसमें ये भी नहीं कहा गया है कि ये व्यस्कों को प्रभावित कर सकती है या नहीं।
हालांकि बच्चों के बीच तेजी से फैलने से स्कूल के वातावरण के साथ संभावित संबंध का पता चलता है। इस बीमारी के प्रकोप की तीव्रता के बावजूद, अब तक किसी की मौत की सूचना नहीं मिली है जो कि दुनिया के लिए राहत की बात है।
WHO ने बचाव का तरीका बताया
WHO ने इस बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए कुछ उपाय बताए हैं. जिसमें टीकाकरण, बीमार लोगों से दूरी बनाए रखना, बीमार होने पर घर रहना, मास्क का इस्तेमाल करना, नियमित रूप से हाथ धोना जैसे उपाय शामिल हैं।
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