नागोर्नो-काराबाख में भारतीय और पाकिस्तानी हथियारों का आमना-सामना? क्या अजरबैजान पर पिनाका दागेगा आर्मेनिया?
Armenia Azerbaijan Conflict: आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच एक बार फिर से काफी ज्यादा तनाव पसर गया है और नागोर्नो-काराबाख के बीच नए सिरे से लड़ाई में भारत-पाकिस्तान प्रतिद्वंद्विता सामने आ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अज़रबैजान ने पाकिस्तान में बने KRL-122 ग़ज़ब 122 मिमी मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (MRLS) को तैनात किया है। वहीं, दूसरी तरफ, भारत ने आर्मेनिया को पिनाका मल्टीपल बैरल रॉकेट लॉन्चर (एमबीआरएल) की आपूर्ति की है और माना जा रहा है, कि आर्मेनिया पिनाका को तैनात कर सकता है।
लिहाजा, अब आर्मेनिया और अजरबैजान की लड़ाई के बीच भारत और पाकिस्तान के हथियारों का आमना- सामना हो सकता है।

भारत बनाम पाकिस्तान के हथियारों का मुकाबला
KRL-122 MLRS के एक्टिव होने के वीडियो सामने आए हैं। पाकिस्तान की कहुटा रिसर्च लेबोरेटरीज द्वारा विकसित, रॉकेट लॉन्चर उत्तर कोरियाई बीएम-11 के समान है। KRL 122 मूल रूप से उत्तर कोरिया के इसुज़ु ट्रक के आधार पर बना है, लेकिन बाद के मॉडलों में Reo M35 ट्रक का उपयोग किया गया।
मूल सोवियत रॉकेटों के अलावा, ये सिस्टम पाकिस्तान आयुध कारखानों द्वारा विकसित "यारमुक" रॉकेट को लॉन्च कर सकता है। वहीं, अपग्रेड होने के बाद केआरएल 122 की अधिकतम सीमा 40 किमी से ज्यादा हो गई है।
दो दक्षिण कोकेशियान देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जातीय और क्षेत्रीय संघर्ष में लड़ाई का नवीनतम दौर 1 सितंबर को शुरू हुआ है। और इस बार भी संघर्ष के केंद्र में नागोर्नो-काराबाख का क्षेत्र है।
इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अज़रबैजान के हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन इसकी भूमि का एक बड़ा हिस्सा अर्मेनियाई प्रशासन के अधीन है और दुनिया में सबसे लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों में से एक है।
नागोर्नो-काराबाख में अर्मेनियाई आबादी बहुसंख्यक है और उसने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी है।
क्या है आर्मेनिया-अजरबैजान विवाद?
दोनों देशों के बीच 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में लड़ाई लड़ी जा चुकी है। वहीं, 2020 में संघर्ष तब और बढ़ गया, जब छह सप्ताह की लड़ाई में हजारों लोग मारे गए। जिसके बाद रूसी शांति सैनिकों द्वारा युद्धविराम लागू किया गया था। लेकिन रूस के यूक्रेन में व्यस्त होने के कारण सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो गई है।
अजरबैजान इसे आतंकवाद विरोधी आक्रामण बता रहा है और स्थायी शांति के लिए नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र से अर्मेनियाई बलों की "पूर्ण वापसी" की मांग कर रहा है।
वहीं, अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, कि "क्षेत्र में शांति और स्थिरता हासिल करने का एकमात्र तरीका अजरबैजान के कराबाख क्षेत्र से अर्मेनियाई सशस्त्र बलों की बिना शर्त और पूर्ण वापसी और तथाकथित (अर्मेनियाई अलगाववादी) शासन का विघटन है।"
जबकि, अर्मेनियाई प्रधान मंत्री निकोल पशिनियन ने 3 सितंबर को प्रकाशित इतालवी समाचार पत्र ला रिपब्लिका को दिए एक इंटरव्यू में रूस पर अजरबैजान की आक्रामकता के सामने आर्मेनिया की सहायता करने में नाराम रहने का आरोप लगाया गया।
आपको बता दें, कि मॉस्को का आर्मेनिया के साथ रक्षा समझौता है और देश में उसका एक सैन्य अड्डा भी है।
पशिनियन ने कहा, कि "आज हम देख रहे हैं, कि रूस को खुद (यूक्रेन में युद्ध के लिए) हथियारों, और गोला-बारूद की जरूरत है, और इस स्थिति में, यह समझ में आता है, कि अगर वह ऐसा चाहे तो भी रूसी संघ आर्मेनिया की सुरक्षा जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता है।"
उन्होंने कहा, कि "इस उदाहरण से हमें यह प्रदर्शित होना चाहिए कि सुरक्षा मामलों में सिर्फ एक भागीदार पर निर्भरता एक रणनीतिक गलती है।"

भारत भरेगा हथियारों का गैप
वहीं, नई दिल्ली ने रूस द्वारा छोड़े गए शून्य को भरने के लिए कदम बढ़ाया है। इसने आर्मेनिया के साथ हथियारों की आपूर्ति के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं। जिसके तहत दोनों देशों के बीच 2000 करोड़ ($250M) का सौदा किया गया है।
इस सौदे के तहत भारत आर्मेनिया को गोला-बारूद, मिसाइल और रॉकेट की सप्लाई करेगा। इसके अलावा, युद्धग्रस्त देश ने सतह से हवा में मार करने वाली भारतीय आकाश मिसाइलों में भी रुचि दिखाई है।
आर्मेनिया ने अपनी शूट और स्कूटर क्षमता बढ़ाने के लिए पिनाका एमबीआरएल को चुना है, जिसे अमेरिकी एचआईएमएआर के बराबर माना जाता है। आर्मेनिया इसके जरिए अजरबैजान के आत्मघाती ड्रोन का मुकाबला करने के साथ साथ उसे गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
इंडियन आर्मी ने पिनाका एमबीआरएल की चार रेजिमेंट शामिल की हैं और अगले कुछ वर्षों में छह और प्राप्त होंगी। अगस्त 2020 में, भारत सरकार ने भारतीय सेना को पिनाका एमके I एमबीआरएल सिस्टम की छह रेजिमेंट की आपूर्ति के लिए टाटा पावर कंपनी, लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) और भारत अर्थ मूवर्स के साथ 25.8 अरब रुपये (यूएस $ 353.5 मिलियन) के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। जिसकी 2024 तक डिलीवरी होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, आर्मेनिया को भारत से गोला-बारूद और एंटी टैंक रॉकेट भी मिलेंगे। भारत पहले भी आर्मेनिया को हथियार प्रणालियां निर्यात कर चुका है। 2020 में, आर्मेनिया ने भारत से रडार खरीदने के लिए समझौता किया था। यह सौदा महत्वपूर्ण था, क्योंकि रूसी और पोलिश विक्रेता भी आर्मेनिया को रडार बेचने की दौड़ में थे, लेकिन आखिरी समझौता भारत के साथ हुआ था।












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