India Vs Turkiye: एर्दोगन की बेटी की कंपनी पर भारत में हुई कार्रवाई! कंपनी में सुमेेये एर्दोगन की भागीदार
India Vs Turkiye: भारत सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी का हवाला देते: हुए तुर्किए की एक ग्राउंड हैंडलिंग फर्म की एविएशन सिक्योरिटी की मंजूरी रद्द कर दी है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कंपनी का संबंध तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की बेटी सुमेये एर्दोगन से है। यह फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बाद लिया गया है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद। इस कंपनी का नाम सेलेबी ग्राउंड हैंडलिंग है।
कौन हैं सुमेये एर्दोगन?
40 साल की सुमेये एर्दोगन राष्ट्रपति रेचेप तैयब एर्दोगन की सबसे छोटी बेटी हैं। उन्होंने अमेरिका के इंडियाना विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र और राजनीति की पढ़ाई की है और बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर डिग्री पूरी की। 2013 में, जब उनके पिता तुर्किए के प्रधानमंत्री थे, तब वे अचानक से राजनीतिक सलाहकार बन गईं। एक साल बाद, उन्होंने डेमोक्रेसी नामक एक संगठन की स्थापना की और इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

कंपनी ने आरोपों से किया इनकार
भारतीय एजेंसियों और कंपनी के बीच खटास के बाद सेलेबी ग्राउंड हैंडलिंग ने स्पष्ट किया है कि वह तुर्किए सरकार से किसी भी तरह से जुड़ी नहीं है। कंपनी ने कहा कि सुमेये एर्दोगन नाम की किसी भी महिला की उनकी कंपनी में कोई हिस्सेदारी नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनका स्वामित्व पूरी तरह से सेब ग्लू परिवार के पास है, जिसका कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं है। इन दावों के बावजूद, भारत ने फर्म से संबंधित सभी सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी है।
कौन है एर्दोगन का दामाद बेकर?
2010 में, सुमेये एर्दोगन ने अपने भाई बिलाल के साथ मिलकर डोरक नामक एक खाद्य उद्यम पर काम किया। सुमेये ने 2016 में सेलचुक बेराकटर से शादी की, जो एक सैन्य ड्रोन निर्माता कंपनी बेकर डिफेंस कंपनी के सीईओ हैं। हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेकर के 300-400 ड्रोन का इस्तेमाल किया था। राष्ट्रपति एर्दोगन ने इस दौरान पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया और भारत की कार्रवाइयों की आलोचना भी की थी। जिसके बाद भारत में तुर्किए का लगातार विरोध हो रहा है।
एर्दोगन परिवार का व्यापारिक साम्राज्य
सुमेये एर्दोगन की तमाम कंपनियों में भागीदारी तुर्किए के भीतर व्यापार और राजनीति दोनों में उनकी सक्रिय भूमिका की तरफ इशारा करती है। अपनी शादी के बाद सुमेये ने डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी अपने कदम जमाए। जिनका असर तुर्किए की अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और जियो पॉलिटिक्स पर भी दिखता है।
क्या हैं मौजूदा हालात?
फिलहाल भारत और तुर्किए के संबंध नाजुक हैं। तुर्किए के पाकिस्तान के समर्थन के बाद और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से तुर्किए निर्मित डिफेंस सामग्री के इस्तेमाल से दोनों देश कॉल्ड वॉर जैसी स्थिति में हैं। तुर्किए का इस तरह से आतंकवाद का सीधा समर्थन उसकी NATO में भूमिका पर भी सवाल उठाता है। क्योंकि यदि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देश NATO में होंगे तो उस पर भी सवाल उठना लाजमी हैं। जैसे-जैसे घटनाएँ सामने आती हैं, हितधारक आगे चलकर शामिल देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित प्रभावों के लिए ऐसी स्थितियों की बारीकी से निगरानी करना जारी रखेंगे।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कॉमेंट में जरूर बताएं।
ये भी पढ़ें:












Click it and Unblock the Notifications