India US Trade Deal: पुतिन को सन्न कर गई मोदी-ट्रंप की ये सीक्रेट डील! तेल पर ब्रेक से दोस्ती में आएगी दरार?
India US Trade Deal: वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक ऐसा 'मास्टरस्ट्रोक' खेला गया है, जिसने पूरी दुनिया के व्यापारिक समीकरणों को बदलकर रख दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई एक 'गेम-चेंजर' बातचीत के बाद, व्हाइट हाउस ने भारत के साथ एक महा-व्यापार समझौते (Mega Trade Deal) की घोषणा की है।
इस समझौते के तहत भारत ने न केवल रूसी तेल को 'अलविदा' कहने का संकल्प लिया है, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 500 बिलियन (करीब 42 लाख करोड़ रुपये) के निवेश का भारी-भरकम वादा भी किया है।

व्हाइट हाउस का ऐलान: 'दोस्ती और व्यापार का नया युग'
मंगलवार (3 फरवरी, 2026) को प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस डील की पुष्टि करते हुए इसे अमेरिकी कामगारों की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच गहरे सम्मान का रिश्ता है। भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा, बल्कि इसकी भरपाई अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल खरीदकर की जाएगी। यह सीधे तौर पर अमेरिकी जनता के लिए फायदेमंद होगा।'
समझौते की मुख्य बातें: एक नजर में
- रूसी तेल पर पूर्ण विराम: भारत ने आधिकारिक तौर पर रूस से तेल आयात बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र की ओर रुख करने की प्रतिबद्धता जताई है।
- 500 बिलियन का निवेश: पीएम मोदी ने अमेरिकी परिवहन, एनर्जी और कृषि क्षेत्रों में आधा ट्रिलियन डॉलर के निवेश और खरीद का वादा किया है।
- टैरिफ का नया गणित: अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है, जबकि इसके बदले में भारत अमेरिकी निर्यातों पर लगने वाले टैरिफ और बाधाओं को 0% (Zero) पर ले आएगा।
- 'बाय अमेरिकन' का संकल्प: पीएम मोदी ने 'मेड इन इंडिया' उत्पादों के लिए बाजार सुनिश्चित करने के साथ-साथ 'बाय अमेरिकन' अभियान को भी बड़े स्तर पर समर्थन देने का आश्वासन दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस डील का जश्न मनाते हुए लिखा कि मोदी और वे ऐसे लोग हैं जो 'चीजों को अंजाम देना जानते हैं (Get Things Done)।' उन्होंने इसे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक आवश्यक कदम बताया।
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को अपना 'प्रिय मित्र' बताते हुए इस फैसले का स्वागत किया। मोदी ने कहा कि जब दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हाथ मिलाते हैं, तो अवसर असीमित हो जाते हैं। 140 करोड़ भारतीयों की ओर से उन्होंने टैरिफ कटौती के लिए ट्रंप का आभार व्यक्त किया।
तेल पर ब्रेक से दोस्ती में आएगी दरार?
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और रूस के बीच 68.7 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का एक बड़ा हिस्सा (52.73 अरब डॉलर) केवल कच्चे तेल पर टिका है, जिसे बंद करने पर आपसी व्यापार गिरकर 20 अरब डॉलर से भी कम रह जाएगा। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के मुताबिक, रूस से तेल की आपूर्ति पहले ही 1.8 मिलियन बैरल से घटकर 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप इस कटौती का श्रेय अपने दबाव को दे रहे हैं, लेकिन पुरी इसे 'बाजार-आधारित परिस्थितियों' का परिणाम बता रहे हैं।
दूसरी ओर, ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने बीबीसी को बताया कि, भारत-रूस संबंधों को केवल व्यापारिक तराजू में नहीं तौला जाना चाहिए। उनका तर्क है कि यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर में मिलने वाली प्रति बैरल 15 डॉलर की भारी छूट अब लगभग समाप्त हो चुकी है, जिससे रूस से तेल खरीदना अब आर्थिक रूप से उतना फायदेमंद नहीं रहा। तनेजा के अनुसार, भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए बाध्य नहीं है और उसने अभी तक आधिकारिक तौर पर रूसी तेल को पूरी तरह बंद करने का ऐलान खुद नहीं किया है।












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