UNSC में ‘दोस्त’ रूस के साथ खड़ा हुआ भारत! यूक्रेन में अमेरिका के खिलाफ जांच की मांग, बढ़ेगा तनाव?

रूस ने आरोप लगाए, कि अमेरिका यूक्रेन में यूक्रेन सरकार के साथ मिलकर कम से कम 30 प्रयोगशालाएं चला रहा है, जिनमें जैविक हथियारों का निर्माण किया जा रहा है।

न्यूयॉर्क, मार्च 13: रूस और यूक्रेन की बीच चल रही भीषण लड़ाई में पहली बार भारत ने यूएनएससी में खुलकर रूस का पक्ष ले लिया है या फिर ऐसा कहें, कि रूस ने ऐसा कदम उठाया, कि भारत को मजबूर होकर रूस का साथ देना पड़ा है। जिसके बाद अब बहुत संभावना है, कि आने वाले वक्त में भारत और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ जाए और पश्चिमी देशों से भी भारत के संबंधों में कड़वाहट आए। अब तक भारत ने यूक्रेन युद्ध पर 'तटस्थ' रूख अपनाया था, लेकिन यूक्रेन में क्या अमेरिका जैविक हथियार बना रहा या नहीं बना रहा है, इसको लेकर भारत को रूस के साथ आना पड़ा है।

यूएनएससी में पहुंचा था रूस

यूएनएससी में पहुंचा था रूस

दरअसल, रूस ने आरोप लगाए, कि अमेरिका यूक्रेन में यूक्रेन सरकार के साथ मिलकर कम से कम 30 प्रयोगशालाएं चला रहा है, जिनमें जैविक हथियारों का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि, पहले तो रूस के आरोपों को किसी ने सीरियसली नहीं लिया, लेकिन जब रूस ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में इसपर चर्चा की मांग की, तो फिर भारत के लिए इस मुद्दे पर तटस्थ रहना संभव नहीं रह गया। यहां पर भारत के पास सिर्फ दो ऑप्शन थे। पहला ऑप्शन या तो रूस के आरोपों को खारिज कर देना था, यानि अमेरिका के पाले में खड़ा होना था, बगैर जांच की मांग किए... और दूसरा ऑप्शन था, जांच की मांग करना, यानि रूस जो मांग कर रहा है, उसका समर्थन करना। यहां भारत के लिए बीच का रास्ता नहीं था और भारत ने काफी सोच-विचारकर 'जैविक हथियारों पर चिंता जताते हुए' जांच की मांग का समर्थन कर दिया है।

रूस ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाए थे?

रूस ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाए थे?

दरअसल, रूस ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि, यूक्रेन में जैविक हथियार निर्माण के लिए अमेरिका 30 प्रयोगशालाएं चला रहा था और यूक्रेन रासायनिक हथियारों के निर्माण में अमेरिका की मदद कर रहा था। वहीं, अमेरिका ने आशंका जताते हुए कहा है कि, यूक्रेन युद्ध में अभी तक रूस को जीत नहीं मिली है, लिहाजा अब रूस रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। लिहाजा, रूस के दावों पर चर्चा के लिए शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बैठक बुलाई गई थी। जिसमें भारत ने यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर से अपना पक्ष रखा है और भारत ने एक बार फिर से दोहराया है कि, यूक्रेन संकट का समाधान कूटनीति और बातचीत के जरिए ही किया जा सकता है और शांति समझौते के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। वहीं, भारत ने एक बार फिर से संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

भारत ने की जांच की मांग

भारत ने की जांच की मांग

यूएनएससी में भारतीय राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि, भारत ने "राज्यों के हालिया बयानों और यूक्रेन से संबंधित जैविक गतिविधियों के बारे में व्यापक जानकारी" पर ध्यान दिया है।' उन्होंने कहा कि, ''भारत एक प्रमुख वैश्विक और गैर-भेदभावपूर्ण निरस्त्रीकरण सम्मेलन के रूप में 'जैविक और विषाक्त हथियार सम्मेलन' (बीटीडब्ल्यूसी) से जुड़े महत्व को रेखांकित करना चाहता है, जो सामूहिक विनाश के हथियारों की एक पूरी श्रेणी को प्रतिबंधित करता है। तिरुमूर्ति ने कहा कि, बीटीडब्ल्यूसी का अक्षरश: पूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। यानि, भारत ने साफ कर दिया, कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के हिसाब से यूक्रेन में जांच की जाए, यानि भारत ने सीधे तौर पर अमेरिका के खिलाफ यूक्रेन में जांच की मांग का रूस के आरोपों का समर्थन कर दिया है।

जैविक हथियार पर रूस के साथ भारत?

जैविक हथियार पर रूस के साथ भारत?

जैविक हथियारों को लेकर यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल पर यह बैठक रूस के अनुरोध पर बुलाई गई थी, जिसमें अमेरिका पर जैविक हथियार निर्माण करने का आरोप लगाया गया था। भारत ने बैठक के दौरान कहा कि, 'भारत का मानना है कि, जैविक हथियारों को लेकर जो भी आरोप हों, उनका निष्कर्ष बीटीडब्ल्यूसी को नियमों के आधार पर उसका फैसला करना चाहिए, जिसमें दोनों पार्टियों के बीच परामर्श और सहयोग के जरिए मुद्दे को संबोधित किया जाना चाहिए।' इसके साथ ही भारत ने कहा कि, 'भारत को उम्मीद है कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रही शत्रुता सीधी बातचीत के जरिए खत्म हो जाएगी और कूटनीति और बातचीत के अलावा कोई और विकल्प बचा नहीं है।' इसके साथ ही भारत ने कहा कि, 'गंभीर मानवीय परिस्थितियों पर फौरन ध्यान दिए जाने की जरूरत है।'

क्या भारत पर दवाब बनाएगा अमेरिका?

क्या भारत पर दवाब बनाएगा अमेरिका?

यूक्रेन युद्ध की शुरूआत से ही भारत के खिलाफ अमेरिका और पश्चिमी देश लगातार साथ देने के लिए प्रेशर बना रहे हैं और अमेरिका की तरफ से भारत को जो एक केबल भेजा गया था, जिसका खुलासा एक अमेरिकी अखबार ने किया था, उसमें लिखा गया था कि, 'यूक्रेन युद्ध में या तो आप हमारे साथ हैं या खिलाफ हैं'। हालांकि, अमेरिका ने फौरन उस केबल को वापस ले लिया था, लेकिन इसे अमेरिका का भारत पर दवाब बनाने की ही एक कोशिश मानी गई। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री से कई बार बात भी की है, लेकिन असली मुसीबत अभी भी बाकी है। अमेरिका ने आरोप लगाए हैं, कि रूस यूक्रेन में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है और अगर रूस ऐसा करता है, तो फिर भारत के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी और फिर भारत के पास 'रूस के खिलाफ' जाने के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं बचेगा, लिहाजा एक्सपर्ट्स का मानना है, कि भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी यही दुआ कर रहे होंगे, कि रूस रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल नहीं करे।

चीन ने की जांच की मांग

चीन ने की जांच की मांग

वहीं, चीन ने सीधे तौर पर कहा, कि अमेरिका यूक्रेन में जैविक हथियारों का निर्माण कर रहा है। यानि, चीन कोरोना वायरस में अमेरिका द्वारा लगाए गये आरोपों का 'बदला' ले रहा है और रूस के साथ खड़ा है। यानि, दूसरे शब्दों में कहें, तो यूएनएससी के तीन प्रमुख सदस्य देश... भारत, चीन और रूस ने यूक्रेन में अमेरिका की जांच की मांग का समर्थन कर दिया है। लेकिन, क्या यूक्रेन में जांच टीम भेजी जाएगी? एक्सपर्ट्स का मानना है कि, रूस के दावों में ज्यादा दम नहीं है, क्योंकि खुद रूस कह रहा है, कि यूक्रेन जैविक प्रयोगशालाओं को नष्ट कर रहा है, तो फिर जब तक जांच टीम यूक्रेन पहुंचेगी, तो इसकी क्या गारंटी है, कि उसे सबूत मिल जाए? तो फिर ये रूस का 'युद्ध प्रोपेगेंडा' भी हो सकता है। लेकिन, इतना तय है, कि यूक्रेन युद्ध के बीच भारत और पश्चिमी देशों के बीच जो मजबूत संबंध स्थापित हुए थे, उनमें कुछ दरारें जरूर आ गई हैं।

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