भारत ने सैन फ्रांसिस्को वाणिज्य दूतावास पर हमले के मामले में अमेरिका से मांगा सबूत, भेजा अनुरोध
San Francisco Consulate Case: खालिस्तानी समर्थकों ने अमेरिका में 2 जुलाई की रात को सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास को आग लगा दी थी। इस मामले में केंद्र सरकार ने कानूनी सहायता संधि (एमएलएटी) के तहत सैन फ्रांसिस्को वाणिज्य दूतावास के उक्त मामले में सबूत मांगे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए द्वारा अब तक की गई जांच के आधार पर केंद्र ने अमेरिकी अधिकारियों को अनुरोध भेजा है। सूत्रों के अनसुार क्राउन-सोर्सिंग के जरिए इस मामले में कुल 45 लोगों अब तक पहचान की जा चुकी है।

बता दें कानूनी सहायता संधि (एमएलएटी) आपराधिक मामलों में जानकारी और सबूत इकट्ठा करने और आदान-प्रदान करने के उद्देश्य से दो या दो से अधिक देशों के बीच एक समझौता होता है।
बता दें 2 जुलाई को खालिस्तानी चरमपंथियों के एक समूह ने सैन फ्रांसिस्को में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में आग लगा दी थी। हालांकि आग तेजी से पकड़ते ही फायर बिग्रेड ने उसे कंट्रोल कर लिया था।
सैन फ्रांसिस्को की स्थानीय पुलिस विभाग, विशेष राजनयिक सुरक्षा कर्मियों और राज्य और संघीय अधिकारियों को रिपोर्ट दर्ज की गई जिसके बाद उन्होंने उसके बाद जुलाई की घटना की जांच शुरू की। इस घटना की अमेरिका ने कड़ी निंदा की थी और इसे "आपराधिक अपराध" बताया था।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट पर लिखा था, जिसमें उन्होंने लिखा था
अमेरिका को सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास के खिलाफ कथित बर्बरता और आगजनी के प्रयास की कड़ी निंदा करता है। अमेरिका में राजनयिक सुविधाओं या विदेशी राजनयिकों के खिलाफ बर्बरता या हिंसा एक आपराधिक अपराध है।
बता दें ये पहली घटना नहीं थी इससे पहले सैन फ्रांसिस्को में स्थित सै भारतीय वाणिज्य दूतावास में खालिस्तान समर्थकों ने हमला किया था। इस हमले के दौरान खालिस्तानी समर्थक नारे लगाए गए थे थे और प्रर्दशनकारियों ने सुरक्षा बैरियर्स को तक तोड़ दिया था और वाणिज्य दूतावास परिसर में खालिस्तानी झंडे लगा दिए थे। इस घटना के पहले लंदन में स्थित भारतीय दूतावास पर भी खालिस्तानी सपोर्टस ने हमला किया था।












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