ईरान के बाद भारत में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन, लगातार 5 साल तक टॉप पर रहने के बाद अब दूसरे नंबर पर...
दुनिया में इंटरनेट शटडाउन करने के मामले में भारत शीर्ष देशों में शामिल है। सर्फशार्क के इंटरनेट शटडाउन ट्रैकर के अनुसार, इस साल जून तक भारत में कुल 9 मामलों में इंटरनेट शटडाउन की घटना सामने आई है।
ट्रैकर के मुताबिक ये आंकड़ा ईरान के बाद सबसे ज्यादा है। ईरान 14 मामलों के साथ पहले नंबर पर है। ट्रैकर द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक बीते साल 2022 में जून तक भारत में ऐसे 10 मामले दर्ज किए गए थे।

2023 की पहली छमाही में इंटरनेट शटडाउन के मामले में पाकिस्तान 3 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है। पाकिस्तान में इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद भड़के दंगों की वजह से इंटरनेट बैन की स्थिति बनी थी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 और 2022 के बीच रिपोर्ट किए गए कुल 127 इंटरनेट शटडाउन में से कम से कम 54 शटडाउन विरोध प्रदर्शनों की प्रतिक्रिया में किए गए थे। एक्सेस नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया में इंटरनेट शटडाउन करने के मामले में लगातार पांचवें साल सबसे आगे रहा है।
साल 2022 में दुनिया में कुल 187 बार इंटरनेट पर बैन लगाया गया था, जिसमें से 84 बार यह बैन भारत में लगा। सबसे अधिक इंटरनेट शटडाउन जम्मू-कश्मीर में किया गया है। 2022 में यहां 49 बार इंटरनेट बंद किया गया।
हालांकि यह नोट किया गया है कि इस बार जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट शटडाउन के मामलों में जबरदस्त गिरावट देखी गई है। 2023 की पहली तिमाही में बस 2 अवसर ऐसे आए हैं जब इंटरनेट शटडाउन की घटना हुई है। जबकि 2022 में इसी अवधि के दौरान चौंकाने वाले 35 मामले दर्ज किए गए थे।
यह रिपोर्ट मणिपुर में 3 मई से जारी इंटरनेट प्रतिबंधों के बीच आई है। इस हफ्ते, सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसने बीरेन सिंह सरकार को सीमित तरीके से इंटरनेट सेवाएं बहाल करने की अनुमति दी थी।
भारत में 2016 से 2022 तक कुल 654 बार इंटरनेट बैन किया गया है। इन 7 सालों में दुनियाभर में कुल 1,120 बार इंटरनेट शटडाउन किया गया। भारत में 2016 में 30, 2017 में 69, 2018 में 134, 2019 में 121, 2020 में 109, 2021 में 107 और 2022 में 84 बार इंटरनेट शटडाउन किया गया।
एक्सेस नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 के बाद से शटडाउन ट्रैकर ऑप्टिमाइज़ेशन प्रोजेक्ट (स्टॉप डेटाबेस) में दर्ज किए गए सभी शटडाउन के मामलों में से 58 फीसदी मामले सिर्फ भारत में दर्ज किए गए।
साइबर सुरक्षा पर हाल ही में हुई जी-20 की बैठक में भारत में बार-बार इंटरनेट शटडाइन को लेकर चर्चा हुई थी। इसमें पैनल की एक सदस्य नीना नवाकैनमा ने कहा था कि भारत को 'किसी भी समय इंटरनेट बंद करने पर रोक लगानी चाहिए।'
नेटलॉस की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में केंद्र और राज्य सरकारें सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट शटडाउन को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती हैं। भारत में सरकारों का ये मानना है कि इंटरनेट पर बैन लगा देने से गलत सूचना का प्रसार रूक जाएगा और क्षेत्र में शांति स्थापित होने में मदद मिलेगी।
भारत में 28 राज्यों में से 18 ने पिछले 3 वर्षों में कम से कम एक बार इंटरनेट बंद किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक वास्तव में ऐसा होता नहीं है। इंटरनेट शटडाउन आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहद विनाशकारी है। साल 2021 में पूरी दुनिया में कुल 30,000 घंटे इंटरनेट बंद हुआ था जिससे 5.45 बिलियन डॉलर यानी करीब 40,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। भारत में साल 2021 में 1,157 घंटे इंटरनेट बंद रहा, जिससे 582.8 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।












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