भारत का रूस से तेल का आयात अप्रैल के बाद 50 गुना बढ़ा, रिलायंस और इस कंपनी को बंपर फायदा

इराक मई में भारत का शीर्ष आपूर्तिकर्ता बना रहा और सऊदी अरब अब तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है।

नई दिल्ली, जून 24: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों की घोर आपत्तियों के बाद भी भारत ने रूस से भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात जारी रखा है और एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, रूस से भारत के कच्चे तेल का आयात अप्रैल के बाद से 50 गुना से अधिक बढ़ गया है और अब यह विदेशों से खरीदे गए सभी कच्चे तेल का 10 प्रतिशत है। बिजनेस वर्ल्ड में छपी खबर के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस का सबसे प्रमुख तेल आयातक देश बन गया है।

रूस से 10% तेल खरीद रहा भारत

रूस से 10% तेल खरीद रहा भारत

यूक्रेन युद्ध से पहले भारत द्वारा आयात किए जाने वाले सभी तेल का केवल 0.2 प्रतिशत रूसी तेल था। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, 'रूसी तेल अब अप्रैल में भारत के तेल आयात बास्केट का 10 प्रतिशत बन चुका है और अब रूस भारत का शीर्ष 10 आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है'। रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी तेल का 40 प्रतिशत निजी रिफाइनर, रिलायंस इंडस्ट्रीज और रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी द्वारा खरीदा गया है। पिछले महीने, रूस ने इराक के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनने के लिए सऊदी अरब को पछाड़ दिया था। और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह रूस द्वारा भारत को काफी कम कीमत पर तेल बेचने का ऑफर दिया गया था।

भारत ने कितना तेल खरीदा?

भारत ने कितना तेल खरीदा?

भारतीय रिफाइनर ने मई में करीब 2.5 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीदा। अप्रैल में पहली बार भारत के कुल समुद्री आयात में रूसी मूल के कच्चे तेल की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत थी, जो पूरे 2021 और वित्त वर्ष 2022 के पहले क्वार्टर में सबसे ज्यादा है। भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला और उपभोग करने वाला देश है और भारत की तरफ से लगातार रूसी तेल खरीदने को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों की आपत्तियों का बचाव किया गया है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लगातार कहा है कि, रूस से तेल खरीदकर भारत किसी भी प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं कर रहा है। तेल मंत्रालय ने पिछले महीने कहा था कि "भारत की कुल खपत की तुलना में रूस से ऊर्जा खरीद बहुत कम है'।

तीसरे नंबर पर पहुंचा सऊदी अरब

तीसरे नंबर पर पहुंचा सऊदी अरब

इराक मई में भारत का शीर्ष आपूर्तिकर्ता बना रहा और सऊदी अरब अब तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत ने ऐसे समय में रूस से तेल आयात बढ़ाने के लिए रियायती कीमतों का लाभ उठाया है जब वैश्विक ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं। अमेरिका और चीन के बाद, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है, जिसका 85 प्रतिशत से अधिक आयात किया जाता है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद, रूस के यूराल कच्चे तेल के लिए अब कम खरीदार हैं, कुछ विदेशी सरकारों और कंपनियों ने रूसी ऊर्जा निर्यात से दूर रहने का फैसला किया है, और इसकी कीमत गिर गई है। जिसके बाद भारतीय रिफाइनर ने इसका फायदा उठाया है और रूसी कच्चे तेल को 30 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के उच्च छूट पर खरीदा है।

रूस का तेल निर्यात

रूस का तेल निर्यात

अमेरिका और सऊदी अरब के बाद रूस दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। लेकिन, रूस का तेल निर्यात यूक्रेन युद्ध के बाद बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। रूस से पहले रोजाना करीब 50 लाख बैरल क्रूड ऑयल का निर्यात किया जाता है। निर्यात का 50% से ज्यादा हिस्सा यूरोप को सप्लाई होता यूरोपीय यूनीयन हर दिन तेल के लिए 45 करोड़ डॉलर और गैस के लिए 40 करोड़ डॉलर रूस को देते हैं। 2020 में रूस ने 26 करोड़ टन कच्चे तेल का निर्यात किया था। इसमें से 13.8 करोड़ टन यानी 53 फीसदी यूरोप के देशों द्वारा खरीदा गया था। यूरोप युद्ध शुरू होने के पहले हर दिन 38 लाख बैरल तेल आयात करता था। मौजूदा समय में यूरोप एक दिन में रूस से 25 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रहा है।

मौजूदा स्थिति में किसे फायदा हो रहा है?

मौजूदा स्थिति में किसे फायदा हो रहा है?

रिफाइनर, विशेष रूप से वे जो अन्य देशों को बड़ी मात्रा में ईंधन का निर्यात करते हैं, जैसे कि यूएस रिफाइनर। वैश्विक ईंधन घाटे ने रिफाइनिंग मार्जिन को ऐतिहासिक ऊंचाई पर धकेल दिया है, जो लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल तक फैल गई है। इससे अमेरिका स्थित वैलेरो और भारत स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज को भारी मुनाफा हुआ है। आईईए के अनुसार, भारत जो 5 मिलियन बैरल प्रति दिन से अधिक का तेल रिफाइन करता है, फिलहाल घरेलू उपयोग और निर्यात के लिए सस्ते रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है।

कितनी रिफाइनरियां हुईं बंद?

कितनी रिफाइनरियां हुईं बंद?

रिफाइनिंग उद्योग का अनुमान है कि 2020 की शुरुआत से दुनिया ने कुल 3.3 मिलियन बैरल दैनिक रिफाइनिंग क्षमता खो दी है। इनमें से लगभग एक तिहाई नुकसान संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ, बाकी रूस, चीन और यूरोप में हुआ है। महामारी की शुरुआत में लॉकडाउन और रिमोट वर्क से ईंधन की मांग में काफी कमी आयी। इससे पहले, कम से कम तीन दशकों तक किसी भी वर्ष में रिफाइनिंग क्षमता में इतनी गिरावट नहीं हुई थी। हालांकि आने वाले वक्त में वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता 2022 में 1 मिलियन बीपीडी प्रति दिन और 2023 में 1.6 मिलियन बीपीडी तक बढ़ जाने की उम्मीद जताई जा रही है। बीते अप्रैल में, 78 मिलियन बैरल प्रति दिन रिफाइन किया गया था, जो पूर्व-महामारी औसत 82.1 मिलियन बीपीडी से काफी कम है। आईईए को उम्मीद है कि गर्मियों के दौरान यह रिबाउंड होकर 81.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो जाएगा।

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