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चीन-पाकिस्तान बनाएगा 600 स्टील्थ फाइटर विमान.. भारत में अभी डिजाइन पर ही काम, रेस में क्यों पिछड़े हम?

China-Pakistan Stealth Fighters Jets: भारत का एडवांस मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट यानि AMCA प्रोजेक्ट, जिसका मकसद इंडियन एयरफोर्स के लिए स्टील्थ फाइटर जेट का निर्माण कर रहा है, वो अपने निर्धारित समय से काफी पीछे चल रही है। लेकिन, अगर तुलना पड़ोसियों से की जाए, तो भारत के दोनों दुश्मन पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान, अपने स्टील्थ प्रोजेक्ट को लेकर काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्री ने हाल ही में अपने घरेलू स्टील्थ फाइटर जेट, KAAN की ऐतिहासिक पहली उड़ान कामयाबी के साथ पूरा कर इतिहास रच दिया है और उसकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने उसके दोस्त पाकिस्तान में खुशियों की लहर भर दी है, क्योंकि तुर्की पहले ही अपने KAAN प्रोजेक्ट में पाकिस्तान को शामिल करने की घोषणा कर चुका है।

China-Pakistan Stealth Fighters Jets

दुनिया भर में मिल रही सराहना के बीच भारत से भी एक दिलचस्प खबर सामने आई है। तुर्की की जीत पर टिकी निगाहों के साथ, कई भारतीय इंटरनेट यूजर्स ने भारत के महत्वाकांक्षी: एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोजेक्ट की स्थिति पर चर्चा करना शुरू कर दिया है।

भारत के स्टील्थ लड़ाकू विमान को तैयार करने के लिए डिजाइन किया गया AMCA कार्यक्रम को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं, कि आखिर इस प्रोजेक्ट का क्या हुआ है?

भारतीय AMCA प्रोजेक्ट का क्या है हाल?

भारतीय AMCA प्रोजेक्ट को लेकर सवाल इसलिए पूछे जा रहे हैं, क्योंकि इसे 10 साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन इसका डेवलपमेंट काफी धीमा है। इस प्रोजेक्ट के तहत फाइटर जेट के डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया है और प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाले सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (सीसीएस) को धन आवंटन के लिए भेज दिया गया है। लेकिन, वहां फाइल अटकी हुई है।

अभी तक मंजूरी नहीं मिलने के पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रोजेक्ट की लागत है। अगर इस प्रोजेक्ट पर डेवलपमेंट शुरू होता है, तो इसके शुरूआती चरण की लागत अनुमानित तौर पर 15 हजार करोड़ रुपये है।

विकास की प्रारंभिक अनुमानित लागत लगभग 15,000 करोड़ रुपये है, जिससे परियोजना को आगे बढ़ाने में दिक्कतें आ रही हैं।

डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी कामत के मुताबिक, अगर सुरक्षा समिति से फंड आवंटित कर दिया जाता है, तो फिर पहले प्रोटोटाइप के बनने में कम से कम 7 सालों का वक्त लगेगा। और पहले प्रोटोटाइप को अगर टेस्ट के बाद मंजूरी मिल जाता है, तो उसके तीन सालों के बाद विमान को इंडियन एयरफोर्स के हवाले कर दिया जाएगा। यानि, अगर 2024 में फंड जारी किए जाते हैं, तो 2034 में एयरफोर्स को विमान मिल पाएगा।

इंडियाटुडे के साथ हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान, पूर्व भारतीय वायु सेना प्रमुख राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने संकेत दिया था, कि AMCA की उद्घाटन उड़ान संभावित रूप से साढ़े चार साल के भीतर हो सकती है, जबकि प्रारंभिक ऑपरेशन को मंजूरी (आईओसी) प्राप्त करने में संभवतः एक दशक का समय लगेगा।

लेकिन, ये जो अनुमान जताए गये हैं, वो डीआरडीओ के 2022 के अनुमानों से काफी आगे के अनुमान हैं। 2022 में डीआरडीओ ने कहा था, कि परियोजना पर मंजूरी मिलने तीन सालों के अंदर प्रोटोटाइप तैयार कर लिया जाएगा और उसके बाद पहली उड़ान में सिर्फ एक साल का वक्त लगेगा।

2022 में डीआरडीओ ने संकेत दिया था, कि AMCA प्रोजेक्ट के तहत बने स्टील्थ फाइटर जेट 2025-26 तक उड़ान भरने में कामयाब हो जाएगा, लेकिन अब इस बात की गारंटी है, कि इतने समय में इस प्रोजेक्ट को पूरा करना संभव नहीं है।

लेकिन, दूसरी चिंता इस बात को लेकर है, कि इस प्रोजेक्ट में इतनी देरी होने से कहीं इसका हाल भी तेजस प्रोजेक्ट जैसा ना हो जाए। सोवियत मूल के मिग-21 बेड़े को बदलने के लिए 1983 में स्वीकृत तेजस प्रोजेक्ट में काफी देरी हुई। इस प्रोजेक्ट के तहत 2015 तक एयरफोर्स को तेजस MK-1 फाइटर जेट मिल जाने चाहिए थे, लेकिन अब जाकर विमान मिलने शुरू हुए हैं। जिसकी वजह से इंडियन एयरफोर्स के पास विमानों की काफी कमी हो गई है।

China-Pakistan Stealth Fighters Jets

चीन और पाकिस्तान का टेंशन, क्या है भारत के पास ऑप्शन?

चीन के पास पहले से ही 150 से ज्यादा J-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर विमान हैं, और PLA वायु सेना की योजना 2027 तक इनमें से 400 विमान और हासिल करने की है। यानि, चीन के पास 500 से ज्यादा फाइटर जेट्स हो जाएंगे।

पाकिस्तान पांचवीं पीढ़ी के जे-31 विमान हासिल करने के लिए पहले ही चीन से संपर्क कर चुका है और 2029 की समय सीमा की बात कर रहा है। भारत के घरेलू पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एएमसीए की पहली उड़ान 2029 के आसपास होने की संभावना है और इसे 2035 की शुरुआत में शामिल किया जा सकता है। स्टील्थ का स्तर अभी भी विकसित होना बाकी है। किसी भी स्थिति में, विकास को दो चरणों में विभाजित किया गया है: Mk1 और Mk2।

अमेरिका अपने F-35 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की पेशकश नहीं कर रहा है। यदि वे ऐसा करते भी हैं, तो अमेरिका फाइटर जेट्स कई शर्तों के साथ साथ आते हैं और भारत किसी शर्त में बंधने के मूड में नहीं है।

लिहाजा, भारतीय वायुसेना अपनी दोनों आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मेक-इन-इंडिया राफेल पर विचार कर सकता है। नई खरीदारी F4 मानक की हो सकती है। F5 मानक में अपग्रेड करने की प्रतिबद्धता के लिए एक कमिटमेंट हो सकती है। फ्रांस एक आजमाया हुआ दोस्त रहा है। वहीं, भारत 1950 के दशक से फ्रांसीसी लड़ाकू विमान उड़ा रहा है। लड़ाकू विमान के विकल्प और लागत जटिल मैट्रिक्स हैं। लिहाजा, इस बात की संभावना बन सकती है, कि भारत राफेल प्लस की तरफ विचार करे।

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