भारत ने जी20 की अध्यक्षता के बीच संस्कृति और रचनात्मकता को सही अर्थों में इसका सार बनाया है: ब्रिटिश मंत्री
यूनाइटेड किंगडम की संस्कृति मंत्री लुसी फ्रेजर ने भारत और यूके के बीच रचनात्मक उद्योगों को लेकर आपसी सहयोग को बुलंदियों पर ले जाने के प्रति प्रतिबद्धता जताई है।
वह लंदन में क्रिएटिव इंडस्ट्रीज एंड कल्चरल इकोनॉमी समिट को संबोधित कर रही थीं। यह शिखर सम्मेलन इंडिया ग्लोबल फोरम ने नेहरू सेंटर और ब्रिटिश काउंसिल की पार्टनरशिप में आयोजित किया।

लंदन स्थित नेहरू सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा, 'ये एक ऐसा संबंध है, जो हमारे आर्थिक और ऐतिहासिक रिश्तों से कहीं आगे तक जाता है। इसे आप हमारी संस्कृति, हमारे संगीत, हमारे थिएटर, हमारी डिजाइन और भी बहुत कुछ में देख सकते हैं। जैसा कि आज यहां मौजूद सभी लोग बता पाएंगे कि हमारे दोनों देश रचनात्मक महाशक्तियां हैं। भारत ने इस साल जी20 की अध्यक्षता के बीच संस्कृति और रचनात्मक उद्योगों को सही अर्थों में प्राथमिकता पर रखा है; और इस क्षेत्र में और भी अधिक सहयोग के लिए मेरा विभाग भारत के संस्कृति मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है।'
इस शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण के माध्यम से दोनों देशों के बीच कूटनीति, आर्थिक विकास और आपसी समझ को बढ़ावा देने में संस्कृति की परिवर्तनकारी शक्ति को उभारने के लिए कला, संस्कृति, फैशन और सिनेमा की दुनिया के अगुवा लोगों को एकजुट किया गया।
इस मौके पर बॉलीवुड की अपनी यात्रा को याद करते हुए अभिनेत्री सोनम कपूर ने कहा, 'धीरे-धीरे ही, लेकिन परिवर्तन हुए हैं। मेरे लिए और भी भूमिकाएं थीं। महिला के केंद्र में होने वाली भूमिकाएं उतनी नहीं थीं...ऐसा इसलिए भी, क्योंकि दर्शक बदल चुके हैं। लेकिन, यह पर्याप्त रूप से तेज नहीं है। जेंडर पे गैप बहुत बड़ा है और दुर्भाग्य से मुझे नहीं लगता कि यह निकट भविष्य में कम होगा। लेकिन, मुझे लगता है कि रोल ज्यादा विचारपूर्ण होते जा रहे हैं।'
उन्होंने कहा, 'विविधता सांकेतिक शब्द बन गया है। हमारे पास अलग-अलग तरह के कलाकार हैं, लेकिन आपका लीड कौन है? मुझे कुछ समय के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व का मौका मिला है, और मुझे पता है, आपको हमेशा एक फिल्म में एक विदेशी वस्तु की तरह भारतीय लड़की के रूप में लिया जाता है। मुझे नहीं लगता कि इसमें ज्यादा परिवर्तन नहीं आया है। बदलाव की कोशिशें हुई हैं, लेकिन पर्याप्त रूप से नहीं। बहुत सी चीजें हैं, जो और किया जा सकता है। विविधता एक सांकेतिक शब्द है, जिसे और अधिक खोजने और ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत है।'
फैशन डिजाइनर अनिता डोंगरे ने ग्रामीण महिला कलाकारों को सशक्त करने की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'भारत का विकास इसकी महिलाएं हैं। भारत में महिलाओं को सशक्त करने की जरूरत है। 40 साल बाद भी खासकर गांवों में, हमें बहुत सारे बदलाव लाने की जरूरत है। महिलाओं को आप सिर्फ एक तरीके से सशक्त कर सकते हैं, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर।' उनके मुताबिक गांव में एक महिला को सशक्त बनाने से पूरा गांव सशक्त होगा।
इंडिया ग्लोबल फोरम के फाउंडर और चेयरमैन मनोज लाडवा ने कहा, 'ऐसा कोई अन्य द्विपक्षीय संबंध नहीं है, जिसका इतिहास, व्यापकता, गहराई और आपसी आकांक्षा हमारे दो महान देशों की तरह हों। चाहे वह व्यापार और निवेश, विज्ञान और नई खोज, शिक्षा और रक्षा हो...और निश्चित रूप से इनमें सबसे समृद्ध हमारी सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के रिश्तों की असाधारण टेपेस्ट्री हो।'
नेहरू सेंटर लंदन के डायरेक्टर अमीश त्रिपाठी ने कहा, 'रचनात्मक और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था एक ऐसा क्षेत्र है, जहां यूके-भारत का सहयोग विश्व को हरा सकता है। हम यूके और भारत के बीच जितनी अधिक रचनात्मक साझेदारियां बनाएंगे, यह वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था के लिए भी उतनी बेहतर होगी।'
इस शिखर सम्मेलन में रचनात्मक उद्योग और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को लेकर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने को लेकर व्यापक चर्चा हुई। इसमें द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ ही स्थानीय शिल्प को वैश्विक बाजार में प्रमोट करने के साथ ही, इन उद्योगों को डिजिटल ग्रोथ से जोड़ने और प्रतिभा के साथ-साथ कौशल के विकास पर विचार रखे गए।
इस अवसर पर ब्रिटिश काउंसिल की डायरेक्टर इंडिया एलिसन बैरेट एमबीई ने भी कहा कि शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और बहुलता के नजरिए से इस तरह की चर्चाओं से काफी मदद मिलती है।
इस सम्मेलन में ये प्रतिभागी भी शामिल हुए:
- सैंडस्टोन ग्लोबल के डायरेक्टर और इतिहासकार-लेखक- बेट्टनी ह्यूजेस
- ब्रिटिश काउंसिल की क्रिएटिव इकोनॉमी, डायरेक्टर- रेहाना मुगल
- डायरेक्टर, लिटरेचर अक्रॉस फ्रंटियर्स- अलेक्जेंडर बुचलर
- Builder.ai के फाउंडर- सचिन देव दुग्गल
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