रूस से भारी डिस्काउंट पर तेल खरीद सकता है भारत, पुतिन के ऊपर पीएम मोदी का अहसान! अमेरिका का चढ़ेगा पारा?
निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते कहा था कि, "पिछले दो-तीन दिनों में रूस द्वारा तेल खरीदने को लेकर किसी तरह की रियायत देने की पेशकश की गई थी, लेकिन हम नहीं जानते कि यह कैसे प्रभावी हो सकता है।
नई दिल्ली/मॉस्को, मार्च 15: विदेशी मीडिया 'डेली मेल' ने भारत सरकार के उच्च अधिकारियों के हवाले से दावा किया है, कि भारत सरकार रूस से भारी डिस्काउंट पर कच्चे तेल का आयात कर सकती है। डेली नेल ने दावा किया है कि, भारत सरकार रूस से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल खरीदने के लिए तैयार है और अगर भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता है, तो इस वक्त, जब रूस पर तमाम पश्चिमी देशों ने कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, उस वक्त रूस के लिए ये सबसे बड़ी राहत की बात होगी।

रूस से तेल खरीद सकता है भारत
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, जो अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत तेल आयात करता है, आमतौर पर रूस से लगभग 1 प्रतिशत ही खरीदता है। लेकिन इस साल भारत में तेल की कीमतों में अभी तक 40 प्रतिशत तक का इजाफा हो चुका है और भारत सरकार के लिए तेल की कीमतों पर कमी करना एक बड़ी चुनौती है, लिहाजा भारत सरकार भारी छूट पर रूस से कच्चे तेल का आयात करने पर विचार कर रही है और भारत सरकार की कोशिश रूस से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल खरीदकर तेल की घरेलू कीमतों में कमी लाने की कोशिश होगी। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि, 'रूस हमें भारी छूट पर तेल और अन्य वस्तुओं की पेशकश कर रहा है और हमें इसे लेने में खुशी होगी।' हालांकि, भारतीय अधिकारी ने यह नहीं बताया कि, भारत सरकार रूस से कितनी मात्रा में तेल खरीदेगी।

भारतीय अधिकारी ने क्या कहा?
भारत सरकार के अधिकारी ने कहा है कि, ''इस तरह के व्यापार के लिए कई तरह की अलग अलग जरूरतें हैं, जैसे व्यापार के लिए परिवहन, बीमा कवर, और कच्चे तेल का सही मिश्रण प्राप्त करने के लिए प्रारंभिक कार्य की आवश्यकता होती है, लेकिन एक बार जब इन समस्याओं पर काम कर लिया जाएगा, तो फिर भारत सरकार रूस के पास अपने प्रस्वाव को रखेगी। डेली मेल ने भारत सरकार के एक अधिकारी के हवाले से रूस से तेल खरीदने का दावा किया है, जिसकी हम पुष्टि नहीं कर रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के समय विदेशी मीडिया में कई प्रोपेगेंडा फैलाने वाली खबरें चल रही हैं, लिहाजा हर खबर की पुष्टि करना संभव नहीं है। लेकिन, पिछले हफ्ते भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नई दिल्ली में कहा था, रूस से तेल खरीदने पर कई कारक हैं, जो जिम्मेदार हो सकते हैं और रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव तेल की कीमतों और भारत के तेल खरीदने के कारक को प्रभावित करेगा।

निर्मला सीतारमण ने क्या कहा था?
भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते कहा था कि, "पिछले दो-तीन दिनों में रूस द्वारा तेल खरीदने को लेकर किसी तरह की रियायत देने की पेशकश की गई थी, लेकिन हम नहीं जानते कि यह कैसे प्रभावी हो सकता है, क्योंकि बहुत सारे कारकों को तौलना होगा। हमें रूस से तेल खरीदने के लिए किसी बंदरगाह की जरूरत होगी, जहां से हम तेल मंगवा सकते हैं और देखना होगा, कि क्या तेल मंगवाने का ये तरीका व्यावहारिक होगा और क्या इसमें बीमा कवर उपलब्ध है?'' भारतीय वित्त मंत्री ने कहा कि, कई सारे फैक्टर हैं, जो इसके पीछे काम कर रहे हैं। आपको बता दें कि, बिजनेस स्टैंडर्ड ने दावा किया है कि, रूस की प्रमुख तेल कंपनी ने भारत को 25-27% पर तेल बेचने का ऑफर दिया है।

पुतिन के ‘दर्द’ की दवा बनेंगे पीएम मोदी?
2021 में इराक भारत के लिए शीर्ष कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता था, जो देश के कुल कच्चे तेल के आयात का 25 प्रतिशत था। वहीं, भारत के लिए सऊदी अरब (16 फीसदी), यूएई (11 फीसदी), नाइजीरिया (8 फीसदी) और अमेरिका (7 फीसदी) अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता थे। वहीं, अगर भारत सरकार रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर हरी झंडी दिखाती है, तो फिर चीन के बाद भारत दूसरा देश होगा, जो युद्ध प्रतिबंधों में फंसे रूस के लिए संकटमोचक बनेगा। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद चीन ने रूसी गेहूं खरीदने पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था। वहीं, ना तो चीन ने और ना ही भारत ने अभी तक यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा की है और दोनों ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में रूस के खिलाफ वोट डालने से परहेज किया है। वहीं, दोनों सरकारें रूस के साथ अपने महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंधों को बनाए रखने के लिए कूटनीतिक कदम सावाधानी से आगे बढ़ा रही है। इस बीच ब्रिटेन ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बजट वर्ष 2021-22 में 55.3 मिलियन पाउंड की सहायता देने की घोषणा की है, जो 2020-21 में 41.5 मिलियन पाउंड था।

अमेरिका ने दी है भारत को चेतावनी?
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने हाल के हफ्तों में कहा है, कि वे चाहते हैं कि भारत जितना संभव हो सके रूस से दूरी बनाए, जबकि हथियारों और गोला-बारूद से लेकर मिसाइलों और लड़ाकू विमानों तक, भारत अपने डिफेंस सेक्टर की मजबूती के लिए काफी हद तक रूस पर निर्भर है। वहीं, भारतीय डिफेंस सेक्टर के एक 'व्यक्ति' ने कहा है कि, ''पश्चिमी देश भारत की स्थिति को समझ रहे हैं। पश्चिमी देश समझते हैं कि, भारत चीन के साथ क्षेत्रीय विवाद में फंसा हुआ है और भारत को सशस्त्र बलों की अच्छी तरह से आपूर्ति की जरूरत है''। वहीं, समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारी द्विपक्षीय व्यापार जारी रखने के लिए रूस के साथ 'रुपया-रूबल' तंत्र स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। रूस ने व्यापार और निवेश संबंधों को बनाए रखने के लिए अपने 'दोस्त देशों' से अपील की है।

अचानक रूस को बदलना मुमकिन नहीं...
एक अधिकारी के अनुसार, तेल के अलावा, भारत रूस और उसके सहयोगी बेलारूस से भी सस्ते उर्वरक की तलाश कर रहा है। भारत सरकार के अधिकारी ने कहा कि, ''हम अचानक रूस को किसी दूसरे आपूर्तिकर्ताओं के साथ नहीं बदल सकते हैं, खासकर डिफेंस सेक्टर में''। वहीं, पिछले दशक में भारत ने रूस से हथियारों के आयात में भारी कमी जरूर की है, लेकिन उसके बाद भी भारत अपनी रक्षा जरूरतों और हार्डवेयर के लिए 60 प्रतिशत तक रूस पर निर्भर है। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने फिलहाल इस बात से इनकार कर दिया है, कि क्या रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने को लेकर भारत पर प्रतिबंध लगाया जाएगा? आपको बता दें कि, साल 2018 में भारत ने रूस से पांच एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए रूस के साथ 5.5 अरब डॉलर का करार किया था।

भारत को 25 प्रतिशत का डिस्काउंट
बिजनेस स्टैंडर्ट अखबार ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि, रूसी तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की पुरानी कीमतो पर 25-27 प्रतिशत तक छूट देने का ऑफर दिया है। रूसी तेल कंपनियों ने कहा है कि, 'जो प्रस्ताव दिए गये हैं, वो आकर्षत हैं'। लेकिन, भारत के लिए रूसी तेल कंपनियों से मिल इस ऑफर का फायदा उठाना आसान नहीं है। जबकि, रूस पर लगे प्रतिबंधों के बाद भारत के लिए रूस से तेल आयात करना अब आसान नहीं रहा है, क्योंकि यूक्रेन संकट में भारत की 'तटस्थ' नीति के चलते अमेरिका और पश्चिमी देशों का भारी प्रेशर भारत पर है और भारत सरकार की तरफ से भी रूस से तेल खरीदने पर कई मजबूरियों की बात कही गई है।

भारत के फैसले पर पश्चिमी देशों की राय
इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी अफेयर्स के लिए यूएस असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस, एली रैटनर ने पिछले हफ्ते अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई में कहा था कि, भारत अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता ला रहा है। उन्होंने कहा कि, 'हम मानते हैं कि भारत का रूस के साथ एक जटिल इतिहास और संबंध है। वे जो हथियार खरीदते हैं उनमें से अधिकांश रूस के हैं। अच्छी खबर यह है कि वे रूस से अलागा भी अब अलग अलग देशों से हथियार खरीदने की प्रक्रिया में विविधता ला रहे हैं, लेकिन इसमें कुछ समय लगने वाला है। लेकिन वे स्पष्ट रूप से ऐसा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें उनके अपने रक्षा उद्योग का स्वदेशीकरण भी शामिल है और इसका हमें समर्थन करना चाहिए।' वहीं, ब्रिटिश विदेश मंत्री लिज़ ट्रस ने भी पिछले सप्ताह कहा था, कि लंदन को रूस पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद करने के लिए भारत के साथ घनिष्ठ आर्थिक और रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।












Click it and Unblock the Notifications