रिटायर्ड चीनी जनरल ने दी चेतावनी- लद्दाख में तैनात भारत के 1 लाख सैनिक, कभी भी घुस सकते हैं चीन में
बीजिंग। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव बरकरार है। भारत की तरफ से चीन बॉर्डर पर करीब एक लाख सैनिक तैनात हैं। इस बीच रिटायर्ड चीनी जनरल ने पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) को आगाह किया है कि वह भारतीय सेना की तरफ से अचानक होने वाले हमले को लेकर अलर्ट रहे। हांगकांग से निकलने वाले अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में इस जनरल के एक आर्टिकल के हवाले से यह बात लिखी गई है। उन्होंने आगाह किया है ये एक लाख भारतीय सैनिक आसानी से कुछ ही घंटों में चीन की सीमा में घुस सकते हैं।

भारत ने बढ़ा दी है सैनिकों की संख्या
रिटायर्ड जनरल वांग होंगगुआंग ने ली जियान पर एक आर्टिकल लिखकर चीनी नेतृत्व को वॉर्निंग दी है। ली जियान एक सोशल मीडिया अकाउंट है जो कि रक्षा मामलों से जुड़ा है। होंगगुआंग ने दावा किया कि भारत की तरफ से पूर्वी लद्दाख में तैनात सैनिकों की संख्या को दोगुना कर दिया है। होंगगुआंग ने लिखा है, 'भारत को एलएसी की रक्षा के लिए बस 50,000 सैनिकों की जरूरत होती है लेकिन सर्दियों में सैनिकों की संख्या कम करने की बजाय दोगुने जवान यानी करीब एक लाख सैनिकों की तैनाती लद्दाख में कर डाली है।' उन्होंने आगे लिखा, 'भारत ने एलएसी के करीब अपने जवानों की संख्या को दोगुना या तिगुना कर दिया है। यह सभी सैनिक चीनी सीमा से बस 50 किलोमीटर दूर ही हैं। ऐसे में आसानी से कुछ ही घंटों में ये चीन की सीमा में दाखिल हो सकते हैं।'

अमेरिकी चुनावों से भारत को मिल सकता है मौका
वांग, नानजियान मिलिट्री रीजन के डिप्टी कमांडर रह चूके हैं जो कि अब ईस्टर्न थियेटर कमांड का हिस्सा है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी कैसे मिली कि भारत ने एक लाख सैनिकों की तैनाती एलएसी पर की है। उन्होंने आगाह किया कि ताइवान स्ट्रेट में संघर्ष का खतरा बहुत बढ़ गया है और आने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के दौरान भारत को कुछ बड़ा करने का मौका मिल सकता है। उन्होंने कहा है कि चीन की मिलिट्री नवंबर के मध्य से पहले अपने सुरक्षा इंतजामों को कम करने के बारे में नहीं सोच सकती है। वांग का यह आर्टिकल भारत और चीन के बीच 21 सितंबर को हुई कोर कमांडर वार्ता के बाद आया था। इस मीटिंग में दोनों ही देश इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच जिन बिंदुओं को लेकर सहमति बनी है, उसे अमल में लाया जाएगा। इसके अलावा यह भी तय हुआ है कि अब लद्दाख में और ज्यादा जवानों को नहीं भेजा जाएगा।

भारत करेगा जमीन वापस लेने की कोशिश
हांगकांग में मिलिट्री मामलों के जानकार सोंग झोंगपिंग ने कहा है कि चीन को भारत की तरफ से विवादित क्षेत्र में की गई अतिरिक्त जवानों की तैनाती से आगाह रहना होगा। उन्होंने कहा, 'भारत को हमेशा लगता है कि वह एक निम्न स्थिति में है और न ही वह एलएसी को मानता है। ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि भारत हमला करके अपनी उस जमीन को वापस ले जिस पर वह अपना दावा जताता है। उनका कहना है कि भारत में जिस तरह से राष्ट्रवाद की भावना बढ़ रही है। उनका कहना है कि इस इलाके में जवानों की तैनाती की वजह से भारत को एक बड़ा मौका मिल सकता है। वह मानते हैं कि भारत की सेनाएं अब पीछे नहीं हटेंगी और ऐसे में लंबे समय तक टकराव की आशंका भी बहुत बढ़ गई है।

विशेषज्ञ बोले चीन पर भरोसा मुश्किल
भारत और चीन के बीच मई माह से ही पूर्वी लद्दाख में टकराव की स्थिति है। 15 जून को इस टकराव ने गलवान घाटी में हिंसा का रूप ले लिया था। भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे जबकि 76 जवान घायल हो गए थे। जबकि चीन के कितने सैनिक मारे गए, इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं है। फिलहाल बस दो किलोमीटर के दायरे में ही दोनों सेनाओं के जवान आमने-सामने हैं। भारत और चीन के कोर कमांडर की मीटिंग पिछले हफ्ते इस वादे के साथ खत्म हुई कि वह अगले कुछ दिनों में फिर से मिलेंगे। भारत में रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पर भरोसा करना बहुत मुश्किल है। वहीं रक्षा मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो चीन साल 2017 में डोकलाम संकट के बाद से ही कोई समझौता नहीं मान रहा है।












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