LAC Row: भारत-चीन के बीच 18वें दौर की कोर कमांडर वार्ता, देपसांग और डेमचक का मुद्दा जल्द सुलझाने पर सहमति
भारतीय सैनिकों ने पिछले साल दिसंबर में यांग्त्से में एक प्रयास को विफल कर दिया था जब एक चीनी टुकड़ी को वहां एलएसी पर भारतीय चौकियों पर आने की कोशिश करने के बाद बलपूर्वक उसके क्षेत्र में वापस धकेल दिया गया था।

तीन साल पुराने सैन्य गतिरोध को हल करने की मांग को लेकर भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 18वीं दौर की बैठक हुई। यह बैठक आज पूर्वी लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्दो में हुई। इस वार्ता में सीमा पर टकराव के अनसुलझे मसलों को हल करने के लिए अहम बातचीत हुई।
रक्षा सूत्रों ने एएनआई को बताया कि भारत की तरफ से फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राशिम बाली और चीन की तरफ से उनके समकक्ष अफसर ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर पर बैठक की। बैठक पांच महीनों के अंतराल के बाद हुई। दोनों के बीच पिछली बैठक 20 दिसंबर 2022 को हुई थी।
दोनों देशों के बीच ये बैठक तब हो रह है जब दोनों ही देश अपनी-अपनी तरफ निर्माण कार्यों को तेज करने में लगे हुए हैं। दोनों ही देश अपनी-अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए एड़ी-चोटी का दम लगा रहे हैं। भारत ने बैठक में देपसांग के मैदान, डेमचक और दोनों तरफ से सैनिकों की वापसी का मुद्दा उठाया।
आपको बता दें कि इससे पिछली बैठक में भी देपसांग और डेमचक से सेना वापसी का मुद्दा उठाया गया था। ये बैठक तवांग में दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प के बाद हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, चीन देपसांग और डेमचक के मसले को मई, 2020 में शुरू हुए ताजा विवाद से पहले का मानते हुए उस पर ठोस प्रतिक्रिया देने से बच रहा है।
वार्ता में, दोनों पक्ष निकट संपर्क में रहने और सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से एक दूसरे संग बातचीत बनाए रखने और जल्द से जल्द शेष मुद्दों के परस्पर स्वीकार्य समाधान पर काम करने पर सहमत हुए हैं। हालांकि, चीनी पक्ष मुद्दों को हल करने की जल्दी में नहीं लग रहा है और देपसांग के मुद्दों पर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। वे लंबे समय से भारतीय गश्ती दल को उस क्षेत्र में अपने गश्ती बिंदुओं पर जाने से रोक रहे हैं।












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